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गुजरात की कंपनी से हुआ टेंडर, मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट में लगेगी एक लिफ्ट

मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में निर्मित मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट के जल्द शुरू होगा। नेशनल हेल्थ मिशन से फंडिंग के...

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 03:30 AM IST
गुजरात की कंपनी से हुआ टेंडर, मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट में लगेगी एक लिफ्ट
मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में निर्मित मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट के जल्द शुरू होगा। नेशनल हेल्थ मिशन से फंडिंग के बाद यूनिट में लिफ्ट लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। गुजरात ओमेगा नामक कंपनी टेंडर लिया है। फिलहाल दो की जगह एक लिफ्ट लगाई जाएगी। इस ओर जल्द काम शुरू किया जाएगा।

एनएचएम से 19.17 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। लगने वाले लिफ्ट में 16 लोगों को एक साथ ऊपर से नीचे लाने ले जाने की क्षमता होगी। तय समय सीमा के हिसाब से लिफ्ट लगाने का कार्य अभी तक शुरु कर दिया जाना था, लेकिन नहीं हो पाया है। हालांकि मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन के अफसरों ने आश्वासन दिया है कि जल्द काम शुरु होगा। लिफ्ट लगने के तुरंत बाद यूनिट का उद्घाटन किया जाएगा। इसके बाद ही प्रसूती वार्ड में भर्ती होने वाली गर्भवती महिलाओं को राहत मिल पाएगी।

दो लिफ्ट लगाई जाना है, फिलहाल राहत देने यह पहल की गई

12 करोड़ रुपए से बनी है यूनिट

12 करोड़ रुपए की लागत से बने 100 बेड के मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट में लिफ्ट लगवाने के लिए 40 लाख रुपए खर्च होंगे। यूनिट में जी प्लस फोर के दो लिफ्ट लगवाएं जाएंगे। यूनिट के शुरू नहीं होने से अस्पताल के जचकी वार्ड की व्यवस्था गड़बड़ा गई है। लिफ्ट लगने के बाद यूनिट को खोला जाएगा। इससे प्रसूति वार्ड में भर्ती होने वाली गर्भवती महिलाओं को राहत मिलेगी।

इसी फेर में नहीं खुली यूनिट

गौरतलब है कि लिफ्ट के फेर में ही मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट शुरू नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रसूति वार्ड में परेशानी बढ़ती जा रही है। 40 बेड के साथ प्रबंधन पर्याप्त सुविधा का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत में सीमित व्यवस्था से गर्भवती और स्टाफ नर्सेस परेशान है। इधर मरीजों को राहत देने के लिए इसे जल्द करने की मांग की जा रही है।

12 फरवरी को दौरे में पहुंचे एनएचएम के अफसरों ने निरीक्षण कर लिफ्ट के लिए केंद्र से बजट आने की बात कही थी। लंबी प्रक्रिया के बाद आखिरकार अस्पताल प्रबंधन को फंड मिला। निरीक्षण के दौरान अफसरों ने यह भी कहा था कि लिफ्ट लगने तक वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर यूनिट के निचले दो तल को शुरू किया जा सकता है, इससे प्रसूति वार्ड में परेशानी कम हो जाएगी। इस ओर निर्णय लेने में प्रबंधन ने देरी की।

20 प्रसव होते हैं हर रोज

मेडिकल कॉलेज में मर्ज होने के बाद से अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बड़ी है। प्रतिदिन 30 से 35 गर्भवती ओपीडी में पहुंच रही है। जिन्हें डिलवरी के लिए वार्ड में भर्ती कराया जा रहा है। अस्पताल में हर रोज 15 से 20 प्रसव होते है। सीजर केस में प्रसूताओं को 5 और सामान्य डिलवरी में प्रसूताओं को 2 से 3 दिन भर्ती रखा जाता है। ऐसे में बेड कम पड़ रहे है। व्यवस्था बनाने के लिए रास्ते पर अतिरिक्त बेड लगाए गए है। इससे आवागमन में दिक्कत हो रही है। प्रसूताओं का कहना है कि यूनिट शुरू होने से संबंधितों का राहत मिलेगी।

फंड आ चुका है


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