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नक्सल प्रभावित जिले का ए ग्रेड स्टेशन, 14 में से 12 कैमरे बंद

Durg Bhilai News - शहर का रेलवे स्टेशन देश के ए ग्रेड स्टेशनों की सूची में तो शामिल है लेकिन यहां यात्रियों की सुरक्षा के लिए संसाधन...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:40 AM IST
नक्सल प्रभावित जिले का ए ग्रेड स्टेशन, 14 में से 12 कैमरे बंद
शहर का रेलवे स्टेशन देश के ए ग्रेड स्टेशनों की सूची में तो शामिल है लेकिन यहां यात्रियों की सुरक्षा के लिए संसाधन किसी छोटे स्टेशन से भी बुरी हालात में हैं। स्टेशन में सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए 14 में से 12 कैमरे बीते तीन माह से बंद हैं। वहीं जिन 2 कैमरों के भरोसे स्टेशन प्रबंधन है, उसकी विज्युलिटी भी खराब हो चुकी है। ऐसे में स्टेशन में एंट्री से लेकर एग्जिट तक यात्री कहीं भी सुरक्षित नहीं है। खास बात यह है कि हर दूसरे महीने स्टेशन में रेलवे के अफसरों का दौरा हो रहा है, सुरक्षा से लेकर सुविधा तक तमाम दावे भी किए जा रहे हैं, बाजवूद इसके सीसीटीवी कैमरों से माॅनिटरिंग को लेकर सुधार नहीं हो सका है।

स्टेशन बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों के अलावा मेटल डिटेक्टर की भी यही स्थिति है। परिसर में प्लेटफाॅर्म में एंट्री करने वाले दो हिस्सों में करीब 4 साल पहले दो मेटल डिटेक्टर गेट बनाए गए थे लेकिन कई महीनों से ये मेटल डिटेक्टर गेट भी बंद पड़े हुए हैं। इस लापरवाही ने स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को और बदहाल कर दिया है। हाल ही में रायगढ़ स्टेशन में लावारिस बैग में विस्फोटक बरामद किया गया था, इसके बाद सुरक्षा को लेकर निर्देश भी जारी किए। बावजूद रेलवे प्रबंधन गंभीर नहीं है। हालात यह है कि अगर यात्री अपराध का शिकार भी हो जाते हैं, तो जीआरपी को सुराग तक नहीं मिल पाता है।

बचे कैमरे हाई डेफिनेशन के नहीं, धुंधली तस्वीर

असामाजिक तत्वों का भी डेेरा, पर पुलिस लाचार

चाकूबाजी की घटना: मार्च महीने में ही स्टेशन परिसर में चाकूबाजी की घटना भी हो चुकी है। एक युवक को तीन आरोपियों ने मिलकर जमकर पीटा था, इसके बाद उसे चाकू मारकर घायल कर दिया था। घटना के बाद रेलवे पुलिस सक्रिय तो हुई, लेकिन आरोपियों तक अब तक नहीं पहुंच पाई है। अगर परिसर का मेटल डिटेक्टर गेट ऑन होता तो शायद यह घटना रुक सकती थी।

केस-1

बैग पार: मार्च महीने में स्टेशन परिसर से यात्रियों के बैग पार होने के पांच मामले सामने आए थे। सभी चाेरियां प्लेटफाॅर्म से ही हुई थी, लेकिन रेलवे पुलिस को बंद सीसीटीवी कैमरों की वजह से कोई भी मदद नहीं मिल सकी। चोर के बारे में सुराग हाथ नहीं लग सका।

केस-3

स्टेशन में जो दो कैमरे वर्तमान में चालू हैं, वे 2013 में लगाए गए थे, ये कैमरे हाई डेफिनेशन के भी नहीं हैं। इसकी वजह से इन कैमरों में कैद होने वाली तस्वीरें धुंधली रहती हैं। कुछ समय पहले ही रेलवे पुलिस ने चोरी के एक मामले में आरोपी की पहचान करने के लिए इन कैमरों के फुटेज खंगालने का प्रयास किया, आरोपी बैग उठाता तो दिखा लेकिन आरोपियों की 25 फीसदी पहचान भी इससे नहीं हो सकी, पूरी तस्वीर धुंधली ही रही।

यहां पर जमावड़ा: स्टेशन से होकर रोजाना बढ़ संख्या में नौकरीपेशा और कालेज की युवतियां दुर्ग, भिलाई और रायपुर के लिए गुजरती हैं। कुछ समय पहले ही परिसर में असामाजिक तत्वों द्वारा जमावड़ा लगाकर छेड़खानी करने की शिकायत हुई थी। लेकिन छेड़खानी करने वाले कौन लोग थे, ये केवल कैमरे नहीं होने की वजह से पुलिस पता नहीं कर पाई।

केस-3

तीन महीने में अफसरों के 10 दौरे, फिर भी सुधार नहीं

स्टेशन परिसर के कैमरे बीते तीन महीने से एक के बाद एक खराब हो रहे हैं। इन तीन महीनों में नागपुर मंडल के सीनियर डीसीएम से लेकर अन्य अफसरों के 10 से अधिक दौरे हो चुके है। तब अफसरों ने स्टेशन के हर हिस्से का जायजा लेकर कई निर्देश दिए। लेकिन खराब हो चुके सीसीटीवी कैमरों के सुधार के लिए कोई पहल नहीं किया गया।

नक्सल प्रभावित जिला फिर भी गंभीरता नहीं

नक्सल प्रभावित जिला होने के बावजूद स्टेशन में सुरक्षा को लेकर प्रबंधन गंभीर नहीं है। इसी स्टेशन से होकर ट्रेने अतिसंवेदनशील हिस्से दर्रेकसा, साल्हेकसा, बोरतलाव जैसे इलाकों से होकर गुजरती है। इस हिस्सों में आए दिन नक्सल मूवमेंट भी बनी रहती है।

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