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इंजेक्शन अमानक, अफसरों ने कहा- इससे फैला था संक्रमण

क्रिश्चियन फैलोशिप अस्पताल में 30 मरीजों की एक आंख की रोशनी जाने के मामले में कोलकाता से रिपोर्ट आई है। सैंपलिंग के...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 03:55 AM IST
इंजेक्शन अमानक, अफसरों ने कहा- इससे फैला था संक्रमण
क्रिश्चियन फैलोशिप अस्पताल में 30 मरीजों की एक आंख की रोशनी जाने के मामले में कोलकाता से रिपोर्ट आई है। सैंपलिंग के दो महीने बाद कोलकाता लैब से एक इंजेक्शन की रिपोर्ट आई, जो अमानक पाया गया है। जाइलोकेन नाम का यह इंजेक्शन मरीजों को बहोशी (एनेथिसिया) के लिए दी गई थी। अभी तक सिर्फ संदेह था लेकिन रिपोर्ट आ जाने के बाद अफसर इस दवा को ही संक्रमण फैलने की वजह बता रहे है।

खुलासे के बाद ड्रग विभाग ने मोतियाबिंद ऑपरेशन में उपयोग की 23 अलग-अलग दवाइयों का सैंपल जांच के लिए कोलकाता लैब भेजे थे। 4 दवाइयों के सैंपल को रायपुर लैब टेस्ट के लिए भेजा गया था। रायपुर लैब में भेजे गए सैंपल जांच में पास हो गए। दो महीने बाद जांच रिपोर्ट आई जिसमें इंजेक्शन जाइलोकेन के सैंपल को अमानक पाया गया। अंधत्व निवारण के स्टेट नोडल डॉ.सुभाष मिश्रा ने कहा कि उन्होंने शाम को ही फोन पर रिपोर्ट की जानकारी दी गई है। अन्य सैंपलों की रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।

मोतियाबिंद अॉपरेशन कांड

क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में 30 मरीजों की आंखों की रोशनी जाने का मामला

नकली दवाओं की मार्केटिंग का खुला राज

सैंपल फेल होने से ये साबित हो चुका है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर नकली दवाईयों का कारोबार हो रहा है। क्योंकि इससे पहले बिलासपुर नेत्र कांड में भी दवाओं के सैंपल अमानक पाए गए थे। हालांकि जिनके सैंपल कोलकाता लैब भेजे गए थे उनका उपयोग नहीं करने को लेकर पूरे प्रदेश में सर्कुलर जारी किया गया था।

सीधी बात

डॉ. सुभाष मिश्रा, स्टेट नोडल, अंधत्व निवारण

एक दवा का सैंपल आया जो अमानक निकला


- एक दवा का सैंपल आया है वह अमानक निकला है।


- निश्चित है दवा से ही आंखों में संक्रमण फैला है।


- रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।


- पूरी सैंपल आने के बाद फार्मेंसी कंपनी पर क्लेम किया जा सकता है।

डिमांड : सीजीएमएससी नहीं दे पा रहा एंटी रैबिज का पूरा स्टॉक

एक हजार की जरूरत पर सिर्फ 200 इंजेक्शन

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) अभी भी पर्याप्त रूप से एंटी रैबिज वैक्सीन की सप्लाई नहीं कर पा रहा है। यही वजह है कि डिमांड के बाद भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल को इंजेक्शन की खेप नहीं मिल पा रही है। हाल ही में कॉर्पोरेशन की ओर से 200-200 वैक्सीन का स्टॉक अस्पताल को दिया गया है। यह स्टॉक नाकाफी है। आने वाले 10 दिनों में खेप खत्म हो जाएगा।

इस मामले को लेकर भास्कर लगातार खबरों का प्रकाशन कर रहा है। पिछली बार सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक वी रामाराव से चर्चा हुई थी। उस दौरान अफसर ने प्रदेश स्तर पर 15000 वैक्सीन स्टॉक में रहने की बात कही थी। जिला स्तर पर पड़ताल करने पर पता चला कि राजनांदगांव वेयरहाउस को सिर्फ 1000 वैक्सीन की सप्लाई की गई है। इसमें से दो बार 200-200 वैक्सीन की खेप मेडिकल कॉलेज अस्पताल को दी गई है।19 मई को फिर एक बार प्रबंधन मांग पत्र भेजेगा। यदि वैक्सीन नहीं मिली तो मारामारी की स्थिति निर्मित हो जाएगी।

एनओसी देने में की आनाकानी, तब दिक्कत

कॉर्पोरेशन बनने के बाद से सरकारी अस्पतालों को अपने स्तर पर दवाइयों की खरीदारी करने के लिए काफी कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है। इसमें से एक है जिस दवाई की खरीदी करनी है उसके लिए सीजीएमएससी से एनओसी लेना पड़ता है। इसमें होता ये है कि कॉर्पोरेशन के अफसर कबूल करते हैं कि हां उनके पास दवाई का स्टॉक अनुपलब्ध है। लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ। कॉर्पोरेशन के अफसर एंटी रैबिज वैक्सीन स्टॉक हवाला देकर अस्पताल के अधिकारियों को भ्रमित करते रहे और एनओसी नहीं मिला। आगे चलकर संकट की हालात बने।

जल्द आएगा स्टॉक


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