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शादी कर ससुराल चली गई कार्यकर्ता, चार साल से सहायिका के भरोसे संचालित आंगनबाड़ी केंद्र

बाजारडांड़ आंगनबाड़ी केन्द्र में 4 वर्ष से कार्यकर्ता नहीं है। इससे यह केन्द्र सहायिका के भरोसे संचालित हो रहा है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 07, 2018, 02:45 AM IST

बाजारडांड़ आंगनबाड़ी केन्द्र में 4 वर्ष से कार्यकर्ता नहीं है। इससे यह केन्द्र सहायिका के भरोसे संचालित हो रहा है। लिहाजा सहायिका के दोनों कार्य निपटाने से बच्चों का पढ़ाई प्रभावित हो रहा है, जबकि इस केन्द्र में अंकिरा पंचायत में सबसे ज्यादा बच्चे दर्ज हैं।

फिलहाल यहां 14 बच्चे हैं,जिन्हें पढ़ाने एवं पौष्टिक भोजन तैयार कर खिलाने का काम सिर्फ सहायिका के भरोसे चल रहा है। लिहाजा बच्चों के भविष्य की चिंता में पालक वर्ग अन्य स्कूलों में पढ़ाने का मन लगा रहे हैं। यहां पदस्थ कार्यकर्ता का जुलाई 2014 को अन्यत्र शादी हो जाने के बाद यह केन्द्र मुखिया विहीन हो गया है। इसके बाद विभाग द्वारा यहां पर कार्यकर्ता की नियुक्ति नहीं किया गया है।

कई केन्द्रों की है यही स्थिति

मुख्य आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चे नहीं होने के कारण ताला लटक गया है। यह स्थिति सिर्फ यहां का नहीं है बल्कि विकासखंड फरसाबहार के अनेक आंगनबाड़ी केन्द्रों का यही स्थिति है। जो बच्चों के कमी के कारण बंद होने के कगार पर हैं। उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा केन्द्र खोलने के लिए जांच कर सूची मंगाई गई थी। पर तात्कालीन अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण नहीं किया गया एवं बैठे-बैठे ही केन्द्र खोलने की सूची भेज दिया गया। जिससे उचित मापदंड नहीं होने के बावजूद केन्द्र खोल दिया गया। जो अब बंद या संविलियन होने की कगार पर है।

वहीं ऐसे केन्द्र जहां पर्याप्त बच्चे होने के बावजूद कार्यकर्ता नहीं होना सोचनीय है।

8 अगस्त की बैठक में लिया जाएगा फैसला

8 अगस्त को जिला में बैठक है। इस बैठक में सेक्टर सुपरवाइजर से चर्चा कर आवश्यक पहल की जाएगी। '' आई टोप्पो, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।

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