Hindi News »Chhatisgarh »Gariyaband» महाराष्ट्र में डेढ़ महीने तक बंधक बनाए गए पांच मजदूरों की घर वापसी

महाराष्ट्र में डेढ़ महीने तक बंधक बनाए गए पांच मजदूरों की घर वापसी

अधिक रोजी की लालच में दलाल के झांसे में आकर पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के लातूर जिले के मुरूर की एक बोरवेल कंपनी में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 02:55 AM IST

महाराष्ट्र में डेढ़ महीने तक बंधक बनाए गए पांच मजदूरों की घर वापसी
अधिक रोजी की लालच में दलाल के झांसे में आकर पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के लातूर जिले के मुरूर की एक बोरवेल कंपनी में करीब डेढ़ महीने तक बंधक बने जिले के पांचों युवकों को जिला प्रशासन ने मुक्त कराया लिया है। कलेक्टर के निर्देश मजदूरों को मुक्त कराने भेजी गई 5 सदस्यीय विशेष टीम बीती रात सभी को लेकर पहुंची। सोमवार की सुबह इन युवकों ने कलेक्टर श्याम धावड़े से भेंटकर आपबीती सुनाई। कलेक्टर ने मजदूरों का हाल-चाल जानने के बाद समझाइश देकर घर रवाना किया।

फिंगेश्वर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम किरवई के पांच युवक केशव ध्रुव, शंकर लोहार, कुमार ध्रुव, तुमेश ध्रुव और घनश्याम ध्रुव के महाराष्ट्र के लातूर जिले में बंधन होने की सूचना 20 अप्रैल को उनके परिजनों ने कलेक्टर को दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए बंधकों को मुक्त कराने कलेक्टर ने एक पांच सदस्यीय विशेष टीम बनाई थी। टीम में नायब तहसीलदार कृष्णमूर्ति दीवान, उपनिरीक्षक जेएल शांडिल्य, श्रम निरीक्षक अरविंद पांडे, महिला बाल विकास संरक्षक फवींद्रकुमार तथा आरक्षक कविन्द्र सिंह शामिल थे। टीम 26 अप्रैल को महाराष्ट्र रवाना हुई थी। 27 अप्रैल की सुबह टीम लातूर पहुंची और लातूर कलेक्टर तथा एसपी को मामले की जानकारी दी। इसके बाद लातूर कलेक्टर ने भी एक सहयोगी टीम गठित कर उन्हें जिले की टीम के साथ मुरूर भेजा। इस बीच लगातार जिले की टीम मजदूरों से फोन से संपर्क में रही। मजूदरों ने टीम को मुरूर के बालाजी पेट्रोल पंप के पास होने की सूचना दी, जहां पहुंचकर पुलिस ने मजदूरों को मुक्त करा 28 को लातूर के अनुविभागीय कार्यालय से रिलीविंग सर्टिफिकेट लेकर विशेष टीम 29 को गरियाबंद ले कर आई।

मजदूरों व परिजनों ने कलेक्टर व सामाजिक कार्यकर्ता का माना आभार

बंधक बनाए जाने की शिकायत लेकर सामाजिक कार्यकर्ता गैंदलाल साहू ने ही परिजनों की भेंट कलेक्टर से कराई थी। कलेक्टर ने परिजनों को भरोसा दिया था कि शीघ्र बंधक बने युवकों को छुड़ा लिया जाएगा। आज जब पांचों युवक लौटे तो उन्होंने प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ता का आभार व्यक्त किया है।

गरियाबंद. महाराष्ट्र में बंधक बनाए गए मजदूर लौटने पर कलेक्टर से मिले।

दलाल के झांसे में आए, नागपुर में 60 हजार में बेचा

पांचों युवक मार्च में रायपुर के भनपुरी इलाके स्थित एक दाल मिल में काम लगे थे। जहां उचित रोजी नहीं मिलने के चलते वे 11 अप्रैल को वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान फाफाडीह में सिमगा के दलाल रूपेश ध्रुव ने उन्हें अधिक रोजी मिलने का लालच देकर रायपुर से नागपुर ले गया। वहां दूसरे दलाल विशाल के पास 60 हजार में बेच दिया। विशाल उन्हें लातूर जिले अंतर्गत ग्राम मुरूर के एक बोर कंपनी में छोड़ दिया। जहां वे काम कर रहे थे। कुछ दिन काम करने के बाद कंपनी कर्मचारी के दुव्र्यवहार से परेशान होकर मजदूर वहां से निकलने का प्रयास किए और रोजी मांगी तो ठेकेदार ने उन्हें छोड़ने के एवज में 60 हजार रुपए देने और पांच दूसरे मजदूर लाने की बात कही। इसकी सूचना मजदूरों ने किसी तरह छुपकर परिजनों को दी।

कंपनी में रोज मारा-पीटा खाना भी नहीं देते थे

मुक्त होकर आए मजदूरों ने बताया कि बोरवेल कंपनी के कर्मचारियों द्वारा उनसे दिन-रात काम लिया जाता था। रोजी मांगने या जाने की बात कहने पर मारा-पीटा भी जाता था। तीन वक्त ठीक से खाना भी नहीं दिया गया। वहीं छोड़ने के एवज में 60 हजार रुपए व पांच मजदूर लाकर देने की बात कही जाती थी।

श्रम निरीक्षक ने बताया कि बंधक बनाए गए मजदूरों को न्यायालयीन कार्रवाई के बाद बंधक पुनर्वास योजना के तहत 50-50 हजार रुपए देने का प्रावधान है। इसमें 40 हजार रुपए राज्य व 10 हजार रुपए केन्द्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। इसके साथ ही इनका श्रम कार्ड भी बनाया जाएगा। जिला पंचायत से उनके परिजनों को पीएम आवास भी दिया जाएगा।

श्रम कार्ड व आवास बनेगा 50-50 हजार रुपए भी देंगे

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Gariyaband

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×