गरियाबंद

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आजादी के माने समझौ, चला जुर मिल देस ल बनाबोन

15अगस्त 1947 के दिन हमर भारत देस हा ब्रिटिश हुकुमत के दू सौ बछर के गुलामी ले आजाद होये रीहिस, अउ इही बात के खुसी ल हमन हर...

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 03:56 AM IST
आजादी के माने समझौ, चला जुर मिल देस ल बनाबोन
15अगस्त 1947 के दिन हमर भारत देस हा ब्रिटिश हुकुमत के दू सौ बछर के गुलामी ले आजाद होये रीहिस, अउ इही बात के खुसी ल हमन हर बछर 15 अगस्त के दिन रास्ट्रीय परब कइके मनाथन। आज आजादी के 72 वाँ परब म मनखे ये जाने ते झन जाने कि कोन कीमत मा आजादी मिलिस, येखर मायने काये, फेर अपन आप ल आजाद कइके हक मांगे बर खच्चित जानथे। अउ यहू गोठ हा गुने के आये कि का हमन सिरतोन म आजाद होये हन? थोकन सोंचव कोई लइका जब पहिली कक्छा म भरती होथे, त ओखर दाई-ददा अउ परवार के खुसी के ठिकाना नइ राहय, अउ स्कूल म घलो तो प्रवेसोत्सव मनाए जाथे, त का वो लइका कक्छा म पास होगे? या ओखर पढ़ई सिरागे? सिरतोन कबे त येहा अबगा ओखर जिनगी गढ़े के रद्दा म पहिली पांव धरे के खुसी आये। अइसने 1947 के दिन हमर बर खुसी के दिन रीहिस फेर ठोक्को एके दिन ला आजादी मान के खुद ल सबले बड़े समझ लेना हमर गलती आये। जेन दिन हम आजाद होयेंन वो दिन हमन बिकास अउ खुसहाली के रद्दा म पांव भर धरे रेहेन, हमर भारत ल नवा ढंग ले सिरजाय बर जम्मों झन ल बिना सुवारथ के समिलहा मिहनत करना रीहिस, काबर की हमर देस ले गुलामी के बेरा धन दौलत, प्रकृति के अकूत संपदा तो लूटे गिस अउ ओखरो ले जादा हमर जुन्ना संस्कृति परंपरा साहित्य भंडार गियान-बिग्यान के धरोहर अउ उज्जर इतिहास ल लूटे खंड़े गिस। हमर भारत हा इही गियान अउ संपदा के सेतन दुनिया म सबले आघू रीहिस, इही दुनिया भर के लोगन के अंतस म खटके लगिस तभे तो हमर देस ल छल प्रपंच करके हथियाय रीहिन, फेर सबले जादा दुख ये बात के होथे कि हमन आजादी पायेंन तंह ले गुलामी के दिन ल तुरते भूला गेन अउ देस समाज बर काहीं बूता करे ल छोड़ के अपन घर ओली खिसा भरे म लग गेन, अउ देस के दिसा-दसा ल भगवान भरोसा छोड़ देन। अब जतके मनखे हे ओतके अकन आजादी के मायने हे। जम्मों मनखे अपन-अपन बर आजादी सबद के नवा मायने बना डरथे। कोनो ल अखरी कपड़ा पहिरे बर आजादी चाही, त कोनो ल परंपरा ल खंड़े बर, कोनो ल अलकरहा झगरा मताय वाला गोठ करे के आजादी चाही त कोनो ल देश ल खंड़े बर, अउ ते अउ अब मनखे मन हा, तिरंगा झंडा के रंग, राष्ट्र गान के बोल, वंदेमातरम कहना हे कि नही तेखरो बर झगरा मताथे, अउ ये बिसय ल मनखे के आजादी ले जोड़ दे जाथे।

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आज आजादी के 72 वां परब म मनखे ये जाने ते झन जाने कि कोन कीमत मा आजादी मिलिस

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