• Hindi News
  • Chhatisgarh
  • Janjgeer
  • सिकलसेल की जांच करने 4 लाख में खरीदी 9 मशीनें, चार महीने में एक भी जांच नहीं
--Advertisement--

सिकलसेल की जांच करने 4 लाख में खरीदी 9 मशीनें, चार महीने में एक भी जांच नहीं

Janjgeer News - भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा जिले के 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिकलेसल मरीजों की जांच हो सके इसलिए करीब...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:25 AM IST
सिकलसेल की जांच करने 4 लाख में खरीदी 9 मशीनें, चार महीने में एक भी जांच नहीं
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

जिले के 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिकलेसल मरीजों की जांच हो सके इसलिए करीब 45 हजार रुपए की दर से 9 मशीनों की खरीदी सीएमएचओ दफ्तर से की गई है। चार महीने पहले ये मशीनें सभी सीएचसी में लगाई जा चुकी है, लेकिन अब तक इन मशीनों से एक व्यक्ति की जांच तक नहीं हो पाई है।

लाइलाज बीमारी मानी जाने वाले सिकलसेल के मरीजों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने शासन जहां पूरा फोकस दे रही है। वहीं जिले का स्वास्थ्य महकमा इसमें काफी लापरवाही बरत रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में सिकलिन जांच की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि अगर किसी व्यक्ति को सिकलसेल की जांच करानी है तो उसे सीएचसी की जगह जिला अस्पताल तक आना पड़ रहा है। जिला सिकलसेल के मामले से काफी संवेदनशील है। सक्ती, बलौदा, डभरा, नवागढ़ क्षेत्र में लगातार सिकलेस के मरीज मिल रहे हैं। प्रदेश में लगभग 10% आबादी पीड़ित है।

बाराद्वार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिना काम के पड़ी इलेक्ट्राेफाेरिसिस मशीन जिसमें अभी जांच नहीं हो पा रही है


9 दिन पहले जिले में मिले 2 हजार 313 मरीज, सैंपल भेजा रायपुर

बीमारी के कारणों को पता लगाने स्वास्थ्य विशेष फोकस दे रही है। 9 दिन पहले ही सिकलसेल जांच को लेकर बुधवार 21 मार्च को कैंप लगाए गए थे, जिसमें 2 हजार 313 सिकलिन के नए मरीज मिले थे। पॉजिटिव मिले मरीजों की क्रॉस चेकिंग होनी होती है तभी 100 प्रतिशत बीमारी की पहचान हो पाती है। यह जांच इलेक्टोफोरिस मशीन से ही हो सकती है। अगर जिले के सीएचसी में इलेक्टोफोरिस मशीन से जांच शुरू हो जाती तब पॉजिटिव मिले मरीजों की क्रॉस चेकिंग जिले में हो जाती। अब 2313 मरीजों के जांच नमूने मेडिकल कॉलेज रायपुर भेजना पड़ा है।

टेस्ट के लिए मशीन में लगाने सिलोलस पेपर ही नहीं

इलेक्ट्रोफोरिस जांच के बाद ही सिकलिन बीमारी की 100 प्रतिशत रिपोर्ट तैयार हो पाती है। सभी सीएचसी के लिए इलेक्टोफोरिस मशीनों की खरीदी तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा कर ली गई, लेकिन टेस्ट के लिए सिलोलस पेपर की सप्लाई सीएचसी में नहीं की। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार मशीनों की खरीदी करने का आदेश राज्य सरकार से आया था, जबकि पेपर्स की सप्लाई सीजीएमएससी से होनी थी। एक बार सीजीएमएससी से सिलोलस पेपर्स की सप्लाई भी हुई थी, लेकिन पेपर्स की क्वालिटी अच्छी नहीं होने से वापसी कर दी गई। इसके बाद से सप्लाई ही नहीं हुई।

जानलेवा है सिलकसेल, समय पर इलाज नहीं तो मौत निश्चित

सिकलसेल नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल डॉ. एमडी तेदुवे के अनुसार सिकल सेल खून से जुड़ी बीमारी है। इसमें शरीर में पाई जाने वाली लाल रक्त कणिकाएं गोलाकार होती हैं, लेकिन बाद में वह हंसिए की तरह बन जाती है। वह धमनियों में अवरोध हो जाता है और शरीर में हिमोग्लोबिन व खून की कमी होने लगती है। यह एक अनुवांशिक बीमारी है। सिकलसेल का पूर्ण रुप से उपचार संभव नहीं है, मगर दवा सेवन व खानपान में सावधानी बरत कर इस बीमारी के साथ भी मरीज पूरी जिंदगी जी सकता है । फिर भी स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में इनकी आयु कम ही होती है। इलाज नहीं होने पर व्यस्क व्यक्ति की 40 और बच्चे की औसत उम्र 5 साल से ज्यादा नहीं होती। रोकथाम के लिए विवाह से पहले दंपति की जांच ही एकमात्र उपाय है।

X
सिकलसेल की जांच करने 4 लाख में खरीदी 9 मशीनें, चार महीने में एक भी जांच नहीं
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..