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समूह में यात्रा करने यात्रियों को रेलवे डिवीजन कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं

सीआरएस की अनुमति से 20 टिकट खरीद सकेंगे, बिलासपुर जाने की जरूरत नहीं 20 से अधिक बुकिंग के लिए एआरएम, स्टेशन...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:35 AM IST
सीआरएस की अनुमति से 20 टिकट खरीद सकेंगे, बिलासपुर जाने की जरूरत नहीं

20 से अधिक बुकिंग के लिए एआरएम, स्टेशन मास्टर और एसीएम को अधिकार

भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

समूह में यात्रा करने के लिए अब यात्रियों को रेलवे डिवीजन कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक साथ 20 टिकटों की बुकिंग यात्री स्टेशन में ही सीआरएस की अनुमति से करा सकेंगे। इससे अधिक टिकटों की बुकिंग के लिए एसीएम, एआरएम व स्टेशन डायरेक्टर से मंजूरी लेनी पड़ेगी।

जोनल कमर्शियल मुख्यालय ने कुछ संख्या में एक साथ यात्रियों की बल्क बुकिंग का अधिकार अफसरों को दिया है। इसके तहत स्लीपर कोच के लिए 20 यात्रियों को सीआरएस की अनुमति से रिजर्वेशन हो जाएगा। वहीं 21 से 40 के लिए एआरएम, एसीएम व स्टेशन डायरेक्टर को अधिकार दिया गया है। इन तीनों अधिकारियों को स्लीपर कोच में 24 यात्रियों तक रिजर्वेशन ग्रुप करने की अनुमति देने स्वीकृति दी गई है। समूह रिजर्वेशन को रेलवे की भाषा में बल्क बुकिंग कहते हैं। यह उन यात्रियों के लिए रेलवे की बड़ी सुविधा है जो शादी या एजुकेशन टूर के लिए एक साथ ग्रुप में जाते हैं। इस बुकिंग के कई फायदे हैं, एक तो बिना किसी रोक के वह आसानी से काउंटर में रिजर्वेशन करा सकता है।

अमूमन रिजर्वेशन कराने पर एक फार्म में केवल 6 यात्रियों की टिकट ही मान्य होते हैं। इसके बाद के यात्रियों के रिजर्वेशन के दूसरा फार्म भरकम जमा करना पड़ता है। रिजर्वेशन के दौरान यह जरूरी नहीं रहता है कि यात्रियों को एक ही कोच में बर्थ मिल जाए। यही वजह है कि यात्री समूह में जाने के समय रेलवे की इसी सुविधा का लाभ उठाना चाहता है, लेकिन इससे पहले बल्क टिकटों की बुकिंग के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। दरअसल सीआरएस या स्टेशन प्रबंधन, मैनेजर को उन्हें अनुमति देने का अधिकार नहीं था। उन्हें डिवीजन कार्यालय में यात्रियों की संख्या के हिसाब से एसीएम , डीसीएम या सीनियर डीसीएम से अनुमति लेनी पड़ती थी। उनके मुहर लगे आवेदन को ही काउंटर का कर्मचारी स्वीकार करता था। डिवीजन कार्यालय बिलासपुर में होने के कारण यात्री दौड़-धूप से बचना चाहते थे।

इन शर्तों का पालन जरूरी