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जिले का वाटर लेबल जा रहा नीचे इसलिए पानी की बचत है वक्त की जरूरत

भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा पानी प्रकृति का अनमोल तोहफा है, इसे बनाया नहीं जा सकता इसलिए केवल बारिश पर ही...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:40 AM IST
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

पानी प्रकृति का अनमोल तोहफा है, इसे बनाया नहीं जा सकता इसलिए केवल बारिश पर ही निर्भरता रहती है। बारिश के पानी को रोकने के लिए अभी भी गंभीरता नहीं दिखती यही वजह है कि गर्मी से पहले ही तालाब सूखने लगे हैं और हैंडपंप का पानी का लेबल भी लगातार नीचे जा रहा है।

इस भयंकर समस्या से बचने के लिए एक ही उपाय है कि पानी का केवल सदुपयोग किया जाए। होली पर पानी की बर्बादी रोकने के लिए लोगों को गंभीर होना होगा। जल संरक्षण के प्रति जागरूक होकर ही होली में लाखों लीटर पानी के अपव्यय को रोका जा सकता है। यह तब संभव है जब अबीर-गुलाल के साथ सूखी होली खेलें। अब गर्मी की दस्तक भी हो चुकी है। शहर में हर रोज तकरीबन 40 लाख लीटर पानी की खपत होती है। होली के दिन पानी की खपत काफी बढ़ जाती है। सामान्य दिनों में जहां एक व्यक्ति को नहाने के लिए 3 से 4 बाल्टी पानी की जरूरत होती है वहीं होली के दिन यह खपत 8 से 10 बाल्टी तक पहुंच जाती है। गहरे रंग से सराबोर कपड़ों को धोने में भी चार-पांच बाल्टी पानी लग जाता है। अगर अभी पानी बचा लिया गया तो यह आने वाले गर्मी के दिनों में अमृत से कम नहीं होगा। रंग गुलाल से सराबोर कपड़ों की धुलाई में पानी की बेवजह बर्बादी को रोकने सूखी होली कारगर उपाय है। तिलक होली हर मायने में बेहतर है।

ब्राह्मण समाज की महिलाएं खेलेंगी सूखी होली

ब्राह्मण समाज की महिलाओं ने पानी की समस्या को देखते हुए केवल अबीर गुलाल के साथ ही इस बार होली खेलने का निर्णय लिया है। समाज की महिलाओं का कहना है कि जिला मुख्यालय में पानी की गंभीर समस्या बढ़ती जा रही है इसलिए इसे बचाने के हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रियंवदा गौरहा ने बताया कि समाज की महिलाओं का कार्यक्रम 4 मार्च को रखा गया है, जिसमें केवल सूखी होली खेली जाएगी इससे पहले लोगों को भी इसके लिए जागरूक किया जाएगा।

होली में रखे ध्यान