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बाराद्वार, मालखरौदा में चीर घर बनाने नहीं मिल रही जमीन, 8 में से 4 में काम शुरू नहीं

बाराद्वार का जर्जर चीरघर जिसे तोड़कर बनाया जाना है नया पर अब तक काम नहीं हो पाया शुरू।

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:55 AM IST
बाराद्वार का जर्जर चीरघर जिसे तोड़कर बनाया जाना है नया पर अब तक काम नहीं हो पाया शुरू।



भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

स्वाभाविक मौत के बजाय किसी हादसा, सर्पदंश, जर सेवन, फांसी या अन्य किसी प्रकार के संदेहास्पद मौत होने पर मृतक का पोस्ट मार्टम जिले के नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया जाता है, इनमें से अधिकांश चीरघरों की स्थिति जर्जर है। इन चीरघरों में मौत के बाद भी पार्थिव शरीर का अपमान होता है, क्योंकि खुले में पोस्टमार्टम कराना डॉक्टर्स की मजबूरी है।

मौत के बाद पीएम में किसी का अपमान न हो इसलिए जर्जर चीरघरों को व्यवस्थित व नया बनाने के लिए कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन ने डीएमएफ से 76 लाख रुपए की स्वीकृति दी है, लेकिन ग्रामीणों की अकड़ व विरोध के कारण पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चीरघर बनाने का काम ही प्रारंभ नहीं हो पाया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चीर घर की जर्जर स्थिति को बदलने स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन से मंजूरी मांगी थी। करीब पांच महीने पहले आठ नए चीरघर बनाने के लिए करीब 80 लाख रुपए का स्टीमेट तैयार कर प्रशासन को दिया। डीएमएफ फंड से करीब 76 लाख रुपए की मंजूरी दी।

निर्माण एजेंसी आरईएस को बनाया गया। जमीन स्वास्थ्य विभाग को मुहैया करानी थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जमीन नहीं मिल पाई। ले-देकर आठ चीरघर में से तीन ही मरच्यूरी तैयार हो पाए हैं।


चार अस्पतालों में निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ

चीरघर बनाने स्वास्थ्य विभाग ने शासन से राशि तो पहले मांग ली लेकिन जमीन मिलेगी या नहीं इसकी तैयारी नहीं की। अधिकारी यहीं मानकर चल रहे हैं कि पुराने चीरघर की जमीन पर ही नया बनना है तो जगह की परेशानी नहीं होगी लेकिन आसपास बसे लोग अब नहीं चाह रहे हैं वहां चीरघर बने। दूसरे जगह पर बनाने की मांग हो रही है। डभरा, बाराद्वार, बलौदा व मालखरौदा में काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

इन अस्पतालों में बनना है नया चीरघर

डीएमएफ फंड से जिले के अकलतरा, नवागढ़, जैजैपुर, पामगढ़, मालखरौदा, बाराद्वार और बलौदा सीएचसी में मरच्यूरी बनना है लेकिन अब तक अकलतरा, नवागढ़ और जैजैपुर में ही निर्माण पूरा हो पाया है। पामगढ़ में स्लैब ही बन पाए हैं। बाराद्वार, बलौदा, डभरा व मालखरौदा में निर्माण ही शुरू नहीं हुआ है।