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नोटों की कमी बरकरार, एटीएम आधे घंटे में हो जा रहे खाली

भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा अारबीआई ने बैंकों को कैश देना बंद कर दिया है। 2000 और 500 के नोट आ ही नहीं रहे, जिससे एक बार...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 02:50 AM IST
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

अारबीआई ने बैंकों को कैश देना बंद कर दिया है। 2000 और 500 के नोट आ ही नहीं रहे, जिससे एक बार नोटबंदी जैसे हालत बन रहे हैं। एटीएम में डालने के लिए बैंकों के पास बड़े नोट नहीं है। जिले में एसबीआई के दो व पीएनबी समेत तीन चेस्ट ब्रांच है। एसबीआई चेस्ट ब्रांच में 100 व 200 रुपए के नोट उपलब्ध हैं। मगर एटीएम में 100 के नोट ही डाले जा रहे हैं। इससे कोई राहत नहीं है। बैंक अधिकारियों के अनुसार 100 रुपए के नोट होने से एक एटीएम में दो लाख ही आ सकते हैं। शेष पेज 12





दो लाख रुपए कैश डालने के आधे घंटे के भीतर खाली हो जा रहे हैं। पिछले हफ्ते भर से शहर मुख्यालय में अधिकांश एटीएम ड्राई की स्थिति में रहते हैं। सुबह कैश डाला जाता है और कुछ घंटों बाद एटीएम दोबारा ड्राई हो चुका होता है। बैंक भी दिन में केवल एक बार ही कैश डाल रहे हैं। इसलिए शहर के अधिकतर एटीएम ड्राई मिल रहे हैं। लोग एक से दूसरे एटीएम दौड़ लगा रहे हैं।

परेशानी

जिले में 95 प्रतिशत लेन-देन अभी भी नकद ही इसलिए कैशलेस ट्रांजेक्शन बढ़ाने लोगों में बड़े नोटों की आदत की जा रही खत्म

सोमवार को एसबीआई मुख्य ब्रांच में कैश के लिए लगी लोगों की लंबी कतार।

जिले में प्रतिदिन 3 से 4 करोड़ कैश चाहिए

केवल एसबीआई के बैंकों में ही पैसे सर्कुलेट करने के लिए बैंक हर रोज 3 से 4 करोड़ रुपए जिलेभर में भेजता है। बावजूद इसके कई एटीएम एक दिन में ही खाली हो जाते हैं। खासकर महीने की 1 से 15 तारीख तक एटीएम से अधिक ट्रांजेक्शन होते हैं। क्योंकि इन्हीं तारीखों के बीच नौकरीपेशा लोगों के पेमेंट बैंकों में जमा होते हैं।

कैशलेस मोड को समझें तो ही मिलेगी कतार से मुक्ति

आरबीआई से नहीं आ रही कैश, इसलिए ऐसी स्थिति


एटीएम में कतार तो अब रहेगी। एक्सपर्ट के मुताबिक इससे बचने के लिए आपको कैशलेस मोड को समझना होगा। नेट बैंकिंग, चेक और अन्य जरूरी टूल्स को समझना आपके लिए मददगार हो सकता है।

समस्या यही कि सब कुछ नकद ही

कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ाने लोगों में बड़े नोटों की आदत कम करने ऐसी प्लानिंग की रही है, मगर इससे समस्या बढ़ी है, कारण जिले में कैशलेस ट्रांजेक्शन नहीं हो रहा। 250 पीओएस मशीन ही दुकानों में लग पाए हैं। बाकी 95 प्रतिशत लेन-देन नकद है। बैंकों के बजाए रुपए निकालने एटीएम का ही उपयोग सर्वाधिक होता है।