भेलडीह-नवाटोली के बीच 24 स्थानों पर बनेगा चेक डेम

Jashpuranagar News - जिले का कुंभी नाला अब फिर से दर्जन भर गावों के लिए लाभदायक साबित होगा। सरकार की नरवा, गरुवा घुरवा, बाड़ी योजना के तहत...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:00 AM IST
Jashpur News - chhattisgarh news czech dame will be built in 24 places between bheldyeh navatoli
जिले का कुंभी नाला अब फिर से दर्जन भर गावों के लिए लाभदायक साबित होगा। सरकार की नरवा, गरुवा घुरवा, बाड़ी योजना के तहत कुंभी नाला को पुनर्जीवित करने की पहल शुरू हो गई है। इसकी शुरूआत ग्रामीणों एवं किसानों ने स्व-स्फूर्त रूप से श्रमदान करके शुरू कर दी है। कुम्भी नाले का उद्गम जशपुर ब्लॉक के भेलडीह और नवाटोली के मध्य स्थित पहाड़ी इलाके की तलहटी है।

यहां से यह बारहमासी नाला लगभग 8 किलोमीटर का सफर तय करता हुआ सालेकेरा के पास बहरी नाला में मिल जाता है और इसके बाद आरा होते हुए झारखंड राज्य की ओर चला जाता है। कुंभी नाला जशपुर ब्लॉक के दर्जन भर गांव से गुजरता है। ग्रामीण बताते हैं कि 15-20 वर्ष पहले तक यह स्थिति थी कि वर्ष पहले नाले में मई-जून महीने में भी पानी का अच्छा खासा बहाव बना रहता था। नाले के किनारे स्थित खेतों की सिंचाई इसी नाले के पानी से होती थी। गर्मी के दिनों में नाले के किनारे किसान सैकड़ों एकड़ खेत में सब्जी-भाजी की खेती के अलावा धान की खेती भी गर्मी के मौसम में किया करते थे। संरक्षण के अभाव में यह नाला धीरे-धीरे आने अस्तित्व को खोता चला गया। नाले में पानी के बहाव की कमी के चलते खेत परती रहने लगे। जगह-जगह कटाव की वजह से नाले के पानी के बहाव की दिशा भी बदल गई। जनपद पंचायत के सीईओ प्रेम सिंह मरकाम ने बताया कि नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी योजना के तहत इस नाले को पुनः उपयोगी बनाने का खाका तैयार कर काम शुरू कर दिया गया है। अभी तक 12 स्थानों पर बोल्डर चेक एवं गली प्लग का निर्माण किया जा चुका है। शेष 12 स्थानों पर बोल्डर चेक का निर्माण जारी है।

कुम्भी नाले के उपचार के साथ ही इसके किनारे स्थित गांवों के कुओं, नलकूप और हैण्डपंप की जल स्तर की जानकारी भी तैयारी की जा रही है ताकि आगामी ग्रीष्म ऋतु में नाले के उपचार से भू-जल स्तर में हुई बढ़ोत्तरी का पता चल सके। सीईओ श्री मरकाम ने बताया कि कुंभी नाला के किनारे राजस्व की सैकड़ों एकड़ भूमि खाली पड़ी है। यहां ब्लॉक प्लांटेशन कराए जाने की भी तैयारी कर ली गई है।

पोरतेंगा में निर्मित मॉडल गौठान में पशुओं के पेयजल एवं चारागाह की सिंचाई के लिए जलापूर्ति कुंभी नाला से होगी।

बोल्डर चेक डैम बांधते ग्रामीण।

फिर लौट रहे नहरों की ओर

बीते 15-20 सालों में बोरवेल और नलकूप को सिंचाई का सहज साधन मान लेने की भूल ने ग्रामीणों और किसानों को नरवा की महत्ता से विमुख कर दिया था। इसका दुष्परिणाम यह रहा कि दिनों दिन भू-जल स्तर पाताल की ओर खिसकने लगा और बोरवेल, नलकूप फेल होने लगे। सरकार की इस अभिनव योजना ने भारतीय जनजीवन की समृद्धि का आधार रहे नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी को न सिर्फ पुनः याद दिलाया है, बल्कि इसकी महत्ता एवं स्वीकार्यता को लेकर लोगों में संजीदगी ला दी है।

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