दुलदुला गोठान में गोकुलधाम जैसी सुविधाएं 500 गायों की देखरेख के लिए 84 समिति

Jashpuranagar News - नरवा, गरवा, घुरवा बाड़ी से गांवों की तस्वीर बदलने लगी है। इस योजना के तहत गांवों में पशुओं विशेषकर गौ-वंशी पशुओं के...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:05 AM IST
Jashpur News - chhattisgarh news facilities like gokuldham in duldula gothan 84 committees for the maintenance of 500 cows
नरवा, गरवा, घुरवा बाड़ी से गांवों की तस्वीर बदलने लगी है। इस योजना के तहत गांवों में पशुओं विशेषकर गौ-वंशी पशुओं के लिए बनाए जा रहे गोठान ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के इर्द-गिर्द ही घूमेगी। गांव, ग्रामीण, किसान और पशु हमेशा से ही एक-दूसरे पर आश्रित रहा हैं, समय के साथ इनके बीच कम होते गए सरोकार से कमजोर होती गई ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नवजीवन देने के लिए ही नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी योजना संजीवनी का काम करेगी।

जशपुर जिले के दुलदुला में नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी योजना के तहत 6 एकड़ से ज्यादा रकबे के गौठान में में लगभग 507 पशुओं के लिए चारे-पानी की व्यवस्था के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य की देखभाल के के लिए पशु चिकित्सक की व्यवस्था की गई है। जनपद सीईओ प्रेम सिंह मरकाम ने बताया कि गौठान में पशुओं के लिए फिलहाल 9 नग पानी टंकी, चारे के लिए 9 नग कोटना के साथ चबूतरे का निर्माण किया गया है। यहां पशुओं की देख-रेख के लिए 84 लोगों की एक समिति बनी है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नवजीवन देने नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी योजना बनेगी संजीवनी

पशुओं के लिए बने कोटना में चारा देतीं समिति की महिलाएं

चारे के लिए 5 एकड़ में मक्का व बाजरा लगाया गया

सीईओ ने बताया कि यहां लगभग 5 एकड़ रकबे में मक्का और बाजरा की बुआई की गई है। गौठान के पास में ही बारह मासी श्रीनदी नाला है। इस नाले पर नदेराटुकू में स्टॉप डेम बनाया गया है। जिसमें भरपूर पानी है। यहां पर लिफ्ट एरिगेशन के माध्यम से चारागाह के सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी। नाले के बहते पानी को रोकने के लिए यहां बोल्डर चेक आदि का भी निर्माण कराया जाएगा। दुलदुला गांव में उद्यानिकी विभाग द्वारा बाड़ी विकास का भी काम किया जा रहा है। यहां दस लोगों का चयन बाड़ी विकास के लिए किया गया है।

बारी-बारी से करते हैं मवेशियों की देखरेख

रोजाना इस समिति के 5-5 सदस्य बारी-बारी से पशुओं के देख-रेख करते हैं। गौठान में आने वाले पशुओं के लिए गांव की स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं और ग्रामीण पैरे का दान कर रहे हैं। चारा रखने के लिए 7 मचान बनाए गए हैं। यहां स्व-सहायता समूह की महिलाएं स्वीमिंग पूल का भी निर्माण कर रही है। गौठान के एरिया में 500 नग नारियल के पौधे के लिए गड्ढे खोदे गए हैं। पशुओं के पेयजल के लिए सोलर पंप स्थापित किया गया है। श्री मरकाम ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा यहां वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए 25 नग वर्मी बेड तथा 2 नाडेप टाके बनाए गए हैं। गौठान में गोबर गैस, वर्मी एवं कम्पोस्ट खाद तैयार करने के साथ ही यहां गौमूत्र शोधन यंत्र तथा अगरबत्ती निर्माण से भी ग्रामीणों को जोड़ा जाएगा।

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