किसान एक दूसरे की सिंचाई में करते हैं मदद इसलिए कम बारिश के बाद भी सभी लगा रहे साग-सब्जी

Jashpuranagar News - इस साल क्षेत्र में कम बारिश होने से कुएं- तालाब जल्दी सूखने की आशंका है, बावजूद ग्राम पंचायत तुमला के आश्रित ग्राम...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 02:32 AM IST
Fharshabhar News - chhattisgarh news farmers help each other in irrigation help therefore despite all the rains
इस साल क्षेत्र में कम बारिश होने से कुएं- तालाब जल्दी सूखने की आशंका है, बावजूद ग्राम पंचायत तुमला के आश्रित ग्राम टिकलीपारा के किसान एक दूसरे के भरोसे साग सब्जी खेती करना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि यदि जलस्रोत बीच में सूख भी जाते हैं तो वे उसका जीर्णोद्धार उसे बाकी समय के लिए उपयोगी बना लेंगे।

खेतों से धान की फसल कटते ही किसान दूसरी फसल लेने में जुट गए हैं। कुछ साल पहले वे महंगे एवं रसायनयुक्त साग-सब्जी खरीदारी करते थे, लेकिन किसानों की सोच ऐसी बदली की आज वे आज इसका खेतों में उत्पादन कर खुद के भोजन में तो इस्तेमाल कर ही रहे हैं साथ ही फरसाबहार के दक्षिणी क्षेत्र के 15-20 पंचायतों सहित ओडिशा में इसे बेचने से उनकी अच्छी खासी आमदनी हो जा रही है। पहले लेते थे सिर्फ धान की फल- पहले किसान धान की फसल कटने के बाद मवेशियों को आवारा छोड़ देते हैं। इससे साग-सब्जी सहित अन्य फसल उत्पादन लेने परेशानी होती थी। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा थी वो तो सब्जी की खेतीकर समृद्ध हो रहे थे किंतु सभी किसानों के पास ऐसी सिंचाई व्यवस्था सुलभ नहीं थी। इसलिए वे सब्जी की खेती में रुचि नहीं ले रहे थे। एक दूसरे का साथ मिलते ही किसानों में एक उत्साह का संचार हुआ और वे वर्तमान में धान कटाई के बाद दूसरी फसल की तैयारी में जुट गए हैं। इनकी एकजुटता से अब इनके खाली पड़े जमीन हरा भरा हो चुका है।

व्यापारी सब्जी खरीदने पहुंचते हैं बाड़ी तक

प्रतिवर्ष साग-सब्जी बेचकर इस गांव के किसान लाखों रुपए कमा रहे हैं। व्यापारी इनके घर पहुंचकर घर से ही सब्जी ले जा रहे हैं। इससे रुपए के साथ-साथ ये क्षेत्र के अन्य ग्रामों के किसानों के लिए आदर्श बन चुके हैं। लोचन यादव, हरिशंकर यादव, गणेश यादव, परमानंद, गोवर्धन, चुड़ामणि सहित दर्जनों किसान मिर्ची, बरबट्टी, भिण्डी, करेला, लौकी, गेहूं,चना लगाकर लाखों की आमदनी करते हैं।

सहयोग का मिला भरोसा तो सभी उगाने लगे सब्जी

यादव बाहुल्य ग्राम टिकलीपारा गांव में 50 से 60 परिवार रहते हैं। गांव में महज 12-15 घरों में ही कुआं, ट्यूबवेल की सुविधा है। इससे किसान धान कटाई के बाद जानवरों को खेतों में खुला छोड़ देते थे। गरीबी से उबरने ग्रामीणों ने बैठक कर सामूहिक रूप से सब्जी उत्पादन लेने का फैसला लिया गया। सब्जी की खेती के लिए सिंचाई के लिए पानी मिलने का एक दूसरे से भरोसा मिला तो सभी सब्जी की खेती में जुट गए।

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