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4 हजार से अधिक महिलाएं गृह उद्योग लगाकर आत्मनिर्भर बनीं, समूह का बनाया अचार पुष्कर मेले में हाथों हाथ बिका

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 02:41 AM IST

Jashpuranagar News - बेटी होने पर हो अभिमान उद्देश्य से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने जिले में बेहतर तरीके से काम हो रहा है। बेटी...

Jashpur News - chhattisgarh news more than 4 thousand women became self reliant by setting up the home industry the hand made by the group of pickles pushkar fair
बेटी होने पर हो अभिमान उद्देश्य से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने जिले में बेहतर तरीके से काम हो रहा है। बेटी बहुउद्देशीय सहकारी समिति ने इस अभियान में बहुत कम समय में ही 4000 से अधिक महिलाओं को स्व-रोजगार से जोड़ दिया है। जिले के सभी आठ विकासखंडों में इस समिति के माध्यम से महिलाओं का समूह काम कर रहा है। हैंडमेक में प्रोडक्ट में कैमिकल का इस्तेमाल नहीं होता इसलिए इनके बनाए प्रोडक्ट की डिमांड हर कही है। जशपुर के पुष्कर मेले में इनके बनाए आचार हाथों-हाथ बिक गए।

अगस्त 2018 में इस सहकारी समिति ने काम शुरू किया और अब तक जिले भर में 400 महिला समूहों को जोड़ चुकी है। हर एक समूह से औसतन 10 महिलाएं काम कर रही है। समिति की अध्यक्ष विजय विहार पैलेस की बहू डॉ. हीना सिंह जूदेव हैं, जिनके मार्गदर्शन में समूह की महिलाएं सहकारी संस्था से जुड़कर अचार बनाने, बड़ी, पापड़, चिप्स, नमकीन आदि बना रही हैं। सहकारी समिति की उपाध्यक्ष रूबी शर्मा ने बताया कि उन्होंने समिति में महिला समूहों को जोड़ने का काम किया है। पूर्व में विभिन्न उद्देश्यों से जिले भर में महिला समूहों का गठन किया गया था। समूह की इन महिलाओं के पास वर्तमान में कुछ विशेष काम नहीं था। इन समूहों को सहकारी समिति में जोड़कर इन्हें गृह उद्योग से जोड़ा।

‘बेटी होने पर हो अभिमान’ इस उद्देश्य से बेटी बहुउद्देशीय सहकारी समिति के माध्यम से जिले में चलाया जा रहा अभियान

घर में बैठकर चिप्स पैक करती सोसायटी की महिलाएं व टेबल में रखी आचार।

ट्रेनिंग देकर बनाया योग्य

महिलाओं को पहले ट्रेनिंग देकर योग्य बनाया गया। अब अधिकांश महिलाएं अचार बनाने का काम कर रही हैं। इसके लिए सामान सहकारी समिति ही देती है। महिलाएं सिर्फ उसे तैयार करती हैं। इसके एवज में उन्हें हर प्रॉडक्ट की एमआरपी का 15 से 20 प्रतिशत भुगतान किया जाता है। समिति के संचालक मंडल में सविता मिश्रा, मंजू श्रीवास, प्रतिभा कश्यप, निद्रावती चौहान, अनुपमा नंदे, डॉ हेमंती यादव, सुमिता सिंह, डॉ. अनुपमा सिंह और सुखमनी चंद्राकर शामिल हैं।

आप भी जुड़ सकते हैं. महिलाओं द्वारा संचालित इस सहकारी समिति में और भी महिलाओं को जोड़ा जाना है, जो महिलाएं घर पर हैं और उनके पास समय बच रहा है। वह अपने घर में बैठे-बैठे भी कुछ महिलाओं को इकट्ठा कर खाद्य पदार्थ बनाने व उसकी पैकिंग का काम कर सकती है। समिति से जुड़ने के लिए उन्हें रजिस्ट्रेशन फार्म भरना होगा। रूबी शर्मा ने बताया कि जशपुर शहर में ही इस समिति के अंतर्गत 20 महिला समूह कार्यरत हैं।

मार्केटिंग की फिक्र नहीं

उपाध्यक्ष रूबी शर्मा ने बताया कि महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों के मार्केटिंग की कोई फिक्र नहीं है। समिति द्वारा पैक खाद्य उत्पादों को बाहर के बाजार में बेचा जाता है। हाल ही में जयपुर के पुष्कर मेले में यहां निर्मित अचार बेचे गए। हैंडमेड होने के कारण यहां के अचार जयपुर में हाथों-हाथ बिके। यहां तैयार खाद्य उत्पादों की खासियत यह है कि इसमें किसी भी तरह के केमिकल का उपयोग नहीं होता है। यहां तक उत्पादों में लगने वाले मसाले, तेल आदि सभी अच्छी क्वालिटी के होते हैं।

महिलाओं को मिला है बेहतर प्लेटफार्म


पति से खेती की जिम्मेदारी लेकर सीता ने लगाए अदरक, आमदनी चार गुना बढ़ी

एक एकड़ में अदरक की खेती कर सीता ने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारा।

भास्कर न्यूज | जशपुरनगर

शहर से 8 किलोमीटर दूर सिटोंगा की सीता यादव की पहल ने उसके परिवार की आमदनी इस वर्ष चार गुना बढ़ा दी है। सीता ने अदरक के उत्पादन से होने वाले फायदों को पढ़ा और पति से एक सीजन के लिए खेती की जिम्मेदारी मांगी।

सीता के पति पहले अपनी बाड़ी में आलू व हरी सब्जी लगाया करते थे। सीता ने बाड़ी के एक एकड़ जमीन पर अदरक लगवाया और खुद उसकी देखरेख की। नतीजा एक एकड़ में जितने आलू उगते थे, उससे कहीं अधिक अदरक का उत्पादन हुआ। सीता के पति एक एकड़ में लगे आलू को 20 हजार में बेचते थे, वहीं इस वर्ष एक एकड़ में लगे अदरक की कीमत उन्हें 80 हजार रुपए मिले हैं।

सीता ने बताया कि उसने अदरक उत्पादन की विधि व उससे होने वाले फायदे के बारे में मोबाइल के किसी लिंक पर पढ़ा था। यह भी पता चला कि अदरक की खेती में मेहनत कम और फायदे ज्यादा है। इसलिए उसने गांव के बाकी किसानों से हटकर इस बार अदरक लगाया। नतीजा मुनाफा ज्यादा हुआ। अदरक की खेती के लिए जिले में बेहतर वातावरण है। सीता ने बताया कि उसके पास सिंचाई के साधन हैं पर अदरक की खेती कम पानी में भी की जा सकती है।

घर में भंडारित अदरक के साथ सीता यादव।

जशपुर की जलवायु अदरक की खेती के लिए अनुकूल

अदरक वैसे तो गर्म तथा आर्द्र जलवायु का पौधा है। पर इसकी खेती समुद्र तल से 1500 मीटर की ऊंचाई तक के स्थानों पर सफलतापूर्वक की जा सकती है। अदरक के लिए ऐसे स्थान सर्वोत्तम होते हैं, जहां नम वातावरण हो, फसल की वृद्धि काल में 50 से 60 सेमी वार्षिक वर्षा हो, भूमि में पानी नहीं ठहरता हो और हल्की छाया हो। पुराने आम के बागों की भूमि का उपयोग अदरक की खेती के लिए कर सकते हैं। वर्ष भर अदरक की मार्केट में भारी मांग भी बनी रहती है।

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