नागपंचमी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशाेत्सव नवरात्र, दशहरा और दिवाली इसी दाैरान मनेंगे

Jashpuranagar News - शुक्रवार काे देवशयनी एकादशी के साथ ही भगवान विष्णु विश्राम के लिए क्षीर सागर में चले गए। इसी रात्रि से भगवान का...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:00 AM IST
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शुक्रवार काे देवशयनी एकादशी के साथ ही भगवान विष्णु विश्राम के लिए क्षीर सागर में चले गए। इसी रात्रि से भगवान का शयन काल आरंभ हाे गया। जिसे चातुर्मास या चौमासा का प्रारंभ कहते हैं। इसके साथ ही अब विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य नहीं होंगे।

चार महीने तक यानी 7 नवंबर काे देवउठनी एकादशी तक भगवान शयन काल में रहेंगे। इसके बाद ही शुभ कार्य शुरू हो पाएंगे। चातुर्मास के चार माह में व्रत, उपवास कर भगवान की भक्ति में लीन रहने का समय है। 16 जुलाई से विभिन्न तीज त्योहार शुरू हाेने जा रहे हैं। जाे कि अगले चार माह तक चलते ही रहेंगे।

इसी दाैरान नागपंचमी, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और गणेशाेत्सव, शारदेय नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे सभी प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे। एेसे में अाने वाला समय न सिर्फ भक्ति का रहेगा, बल्कि अापसी मेल मिलाप का भी रहेगा। विभिन्न तीज त्योहारों पर परिवार, कुटुंब और समाज के लाेग एक जगहाें पर एकत्र हाेंगे।

चातुर्मास के यह हैं नियम और निषेध- ये नियम अपनाएं पंडित शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार इस दौरान फर्श पर सोना और सूर्योदय से पहले उठना बहुत शुभ माना जाता है। उठने के बाद अच्छे से स्नान करना और अधिकतर समय मौन रहना चाहिए। वैसे साधुओं के नियम कड़े होते हैं। दिन में केवल एक ही बार भोजन करना चाहिए।

वर्जित कार्य पंडित लक्ष्मीनारायण शास्त्री मंगरा के मुताबिक चातुर्मास के 4 माह में विवाह संस्कार, जात-कर्म संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं।

तीज-त्योहारों की 16 जुलाई से हाेगी शुरुअात, मांगलिक कार्य रहेंगे बंद, चार महीने नियम और व्रत के रहेंगे

यह आएंगे त्योहार चातुर्मास के दौरान

























ध्यान और साधना के लिए है चातुर्मास- पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार व्रत, भक्ति और शुभ कर्म के 4 महीने को हिन्दू धर्म में ‘चातुर्मास’ कहा गया है। ध्यान और साधना करने वाले लोगों के लिए ये माह महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान शारीरिक और मानसिक स्थिति तो सही होती ही है, साथ ही वातावरण भी अच्छा रहता है। चातुर्मास 4 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है।

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