दिल्ली के एम्स में नहीं मिला बेड, रांची के रिम्स में सुविधा नहीं, 34 दिन बाद शिक्षिका सुषमा की मौत

Jashpuranagar News - जशपुरनगर | सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल शिक्षिका सुषमा 34 दिन तक जिंदगी की लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार इस दुनिया...

Jul 14, 2019, 07:00 AM IST
जशपुरनगर | सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल शिक्षिका सुषमा 34 दिन तक जिंदगी की लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार इस दुनिया से चली गई। शनिवार को उसके निधन की खबर उसके भाई ने जब सोशल मीडिया पर पाेस्ट किया तो सिस्टम को लेकर बहस छिड़ गई।

बगीचा विकासखंड के प्राथमिक शाला बिरासी में पदस्थ शिक्षिका सुषमा चौहान बीते 9 जून को एक सड़क हादसे की शिकार हो गई थी। उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी। उसे अच्छे इलाज के लिए रांची से दिल्ली रेफ़र किया गया था, पर राजधानी दिल्ली में भी उसका साथ किसी ने नहीं दिया। 10-15 दिनों तक काफी भाग दौड़ करने के बाद भी एम्स जैसे शासकीय अस्पताल में उसे भर्ती तक नहीं लिया गया। मदद के लिए जब सुषमा के परिवार वालों ने स्वास्थ्य मंत्री से गुहार लगाई तो निराशाजनक जवाब मिला। सुषमा के भाई दीपक ने मंत्रीजी के साथ हुए संवाद को सोशल मीडिया पर साझा किया है।

अंततः थक हार कर फिर वे रिम्स रांची ले आए। वक्त के साथ पैसे भी ख़त्म हो रहे थे। सुषमा के भाई के मुताबिक इतने दिनों में अस्पताल में जगह दिलाने व इलाज में 14-15 लाख खर्च हो चुके थे। रांची वापस लाने के बाद किस्मत ने साथ नहीं दिया। मेडिकल कॉलेज रिम्स में अस्पताल प्रबंधन ने वेंटी बेड नहीं होने की बात कहकर परिजनों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अपने रिश्तेदारों और इष्ट-मित्रों की मदद से 14-15 लाख का इंतजाम करने वाला एक मध्यमवर्गीय परिवार सिस्टम से हारकर बेबस हो चुका था। अब ये भी सुषमा के बचने और बचाने की उम्मीद छोड़ चुके थे।

भाई ने कहा-मिडिल क्लास के लिए सिस्टम नहीं

अपनी बहन के इलाज की कोशिश में दिन-रात एक करने वाले दीपक चंद्र प्रकाश ने अपने सोशल मीडिया पेज में लिखा है कि देश का सिस्टम मिडिल क्लास के लिए नहीं है। यहां सरकार गरीबों के लिए योजना बनाती है और अमीरों के लिए पूरी सिस्टम काम करती है। दीपक अपनी बहन के इलाज में आ रही परेशानियों को लगातार सोशल मीडिया पर साझा कर रहा था। इसलिए पूरे शहर की संवेदना शिक्षिका सुषमा के साथ जुड़ गई थी।

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