सरकार ने प्रति मानक बोरा 15 सौ रु. बढ़ाए फिर भी सिर्फ 70 फीसदी तेंदूपत्ता संग्रहण

Jashpuranagar News - 20 दिन चला संग्रहण का काम, 27 हजार मानक बोरा हो पाया संग्रहण। भास्कर न्यूज | जशपुरनगर नई सरकार ने तेंदूपत्ता...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:00 AM IST
Jashpur News - chhattisgarh news the government has given rs1500 per standard bag even though only 70 per cent of tubewell collection
20 दिन चला संग्रहण का काम, 27 हजार मानक बोरा हो पाया संग्रहण।

भास्कर न्यूज | जशपुरनगर

नई सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया था। तेंदूपत्ता के दाम 25 सौ रुपए मानक बोरा से बढ़ाकर 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा कर दिया। इसके बाद भी जिले के संग्राहक इसका लाभ नहीं उठा पाए। तेंदूपत्ता संग्रहण का सीधा असर नगरीय इलाकों के बाजार पर पड़ता है। कपड़ा, सोने-चांदी, खेती संबंधी उपकरण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रानिक समानों की बिक्री तेंदूपत्ता संग्राहकों को भुगतान के बाद बढ़ती है।

विभाग की मानें तो इस वर्ष बार-बार हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण पत्ते ही खराब हो गए इस कारण संग्रहण कम हुआ है। सरकार ने जब तेंदूपत्ता के दाम बढ़ाए तो संग्राहकों में उत्साह की बातें कही जा रही थी। यह कहा जा रहा था वनोपज का ज्यादा लाभ ग्रामीण संग्राहकों को मिलेगा तो शहर के बाजार में भी उछाल आएगा। पर इस वर्ष का संग्रहण बता रहा है कि तेंदूपत्ता के पैसे से बाजार में कोई खास असर नहीं दिखने वाला है। कुल संग्रहण के एवज में सरकार की ओर से जिले के संग्राहकों के खाते में 10 करोड़ 92 लाख रुपए दिए गए हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का प्रमुख जरिया है।

इसी पैसे से ग्रामीण खेती के लिए नए उपकरण, खाद बीज या फिर अपने घर के बेटे-बेटियों की शादी करते हैं। इस वर्ष जिले में संग्रहण का काम 5 मई से शुरू हुआ और 25 मई को संग्रहण का काम बंद कर दिया गया। 20 दिन में जिन ग्रामीणों ने जितना संग्रहण किया उसका हिसाब किताब कर दिया गया। वन विभाग की मानें तो पत्ते खराब होने से जितने पत्ते अच्छी क्वालिटी के निकल सके उतने का संग्रहण कार्य बीस दिन में कर लिया गया।

20 दिन चला संग्रहण का काम, 27 हजार मानक बोरा हो पाया संग्रहण।

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नई सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया था। तेंदूपत्ता के दाम 25 सौ रुपए मानक बोरा से बढ़ाकर 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा कर दिया। इसके बाद भी जिले के संग्राहक इसका लाभ नहीं उठा पाए। तेंदूपत्ता संग्रहण का सीधा असर नगरीय इलाकों के बाजार पर पड़ता है। कपड़ा, सोने-चांदी, खेती संबंधी उपकरण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रानिक समानों की बिक्री तेंदूपत्ता संग्राहकों को भुगतान के बाद बढ़ती है।

विभाग की मानें तो इस वर्ष बार-बार हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण पत्ते ही खराब हो गए इस कारण संग्रहण कम हुआ है। सरकार ने जब तेंदूपत्ता के दाम बढ़ाए तो संग्राहकों में उत्साह की बातें कही जा रही थी। यह कहा जा रहा था वनोपज का ज्यादा लाभ ग्रामीण संग्राहकों को मिलेगा तो शहर के बाजार में भी उछाल आएगा। पर इस वर्ष का संग्रहण बता रहा है कि तेंदूपत्ता के पैसे से बाजार में कोई खास असर नहीं दिखने वाला है। कुल संग्रहण के एवज में सरकार की ओर से जिले के संग्राहकों के खाते में 10 करोड़ 92 लाख रुपए दिए गए हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का प्रमुख जरिया है।

इसी पैसे से ग्रामीण खेती के लिए नए उपकरण, खाद बीज या फिर अपने घर के बेटे-बेटियों की शादी करते हैं। इस वर्ष जिले में संग्रहण का काम 5 मई से शुरू हुआ और 25 मई को संग्रहण का काम बंद कर दिया गया। 20 दिन में जिन ग्रामीणों ने जितना संग्रहण किया उसका हिसाब किताब कर दिया गया। वन विभाग की मानें तो पत्ते खराब होने से जितने पत्ते अच्छी क्वालिटी के निकल सके उतने का संग्रहण कार्य बीस दिन में कर लिया गया।

जिले के संग्राहकों के खाते में 10 करोड़ 92 लाख रुपए डाले गए

गोदाम में भरे जाएंगे सभी पत्ते क्योंकि ठेका नहीं हुआ

बीते कई सालों से तेंदूपत्ता की बिक्री संग्रहण से पहले ही हो जाया करती थी। इसका टेंडर जारी होता था और खरीदी करने वाले ठेकेदार अपना दाम लगाकर समिति वार पत्तों के बंडल बुक कर लिया करते थे। जैसे-जैसे समितियों में संग्रहण होता जाता था ठेकेदार अपना माल उठाते जाते थे। इस वर्ष इसका ठेका नहीं हुआ है। बताया जाता है कि किसी ने भी पत्तों का पर्याप्त दाम नहीं दिया जिस कारण ठेका निरस्त हो गया। जो भी खरीदी जिले भर में हुई है उसे भंडारण किया जाएगा। इसके बाद इसकी बिक्री होगी। पर पूरे पत्ते बिक जाएंगे इसकी उम्मीद कम है।

शाक कर्तन की ट्रेनिंग फरवरी में हुई थी

तेंदूपत्ता संग्रहण शुरू होने से शाक कर्तन का काम किया जाता है। इसमें पत्ते आने से पहले पेड़ों की छुपाई का काम किया जाता है। इसके लिए वन विभाग द्वारा बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है। जिले में इस ट्रेनिंग का कोई असर नहीं दिख रहा है। यदि ट्रेनिंग हुई होती तो पत्ते अच्छे निकलते और संग्राहकों को इस वर्ष अच्छे दाम मिलते। जिससे बाजार में भी उछाल अाता।

बारिश और ओलावृष्टि के कारण खराब हुआ तेंदूपत्ता।

बड़ा सवाल - साग सब्जियां खराब नहीं हुई तो फिर सिर्फ तेंदूपत्ता कैसे

ओलावृष्टि का असर दूसरे किसी भी उत्पादों पर नहीं देखा जा रहा है। गर्मी के दिनों में कृषि विभाग की उपज नगण्य होती है। गर्मी में किसान खेत छोड़ बाड़ियों का रूख कर लेते हैं और साग-सब्जियों के उत्पादन में जुट जाते हैं। उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक राम अवध सिंह भदौरिया का कहना है कि ओलावृष्टि से उद्यानिकी की फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। उन्होंने बताया कि ओलावृष्टि के बाद सभी इलाकों से रिपोर्ट मंगाई थी। कहीं से भी फसलों को नुकसान होने की जानकारी नहीं मिली। अब सवाल यह उठता है कि जब साग-सब्जियां ओलावृष्टि से खराब नहीं हुईं तो सिर्फ तेंदू के पत्तों में छेद कैसे हो गए।

दुलदुला में एक पत्ते का भी संग्रहण नहीं

जिले की 24 समितियों के माध्यम से इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण किया गया। दुलदुला एक ऐसी समिति रही जिसमें एक पत्ते का भी संग्रहण नहीं हुआ। यहां संग्रहण का प्रतिशत शून्य है। दुलदुला की समिति में लगभग 1200 संग्राहक हैं। मतलब सरकार द्वारा दाम बढ़ाए जाने के बाद यह 1200 संग्राहक इस वर्ष पूरी तरह से लाभ लेने से वंचित रह गए। जिले में सबसे अधिक संग्रहण गंझियाडीह समित में हुआ है। यहां 1300 मानक बोरा लक्ष्य के विरूद्ध 1500 मानक बोरा का संग्रहण हुआ है जो कि 115 प्रतिशत है।

मौसम के कारण पत्ते खराब हुए


इसकी जांच कराएंगे


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