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डीजल के दाम बढ़ने का असर, हाट-बाजार में दुकानें हुई कम / डीजल के दाम बढ़ने का असर, हाट-बाजार में दुकानें हुई कम

Bhaskar News Network

Dec 08, 2018, 02:56 AM IST

Jashpuranagar News - डीजल का रेट बढ़ने का सीधा असर गांव की दुकानों पर पड़ा है। गांव-गांव में लगने वाली साप्ताहिक बाजारों में दुकानें कम...

Pathalgaon News - diesel prices have risen low cost shops in hot markets
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डीजल का रेट बढ़ने का सीधा असर गांव की दुकानों पर पड़ा है। गांव-गांव में लगने वाली साप्ताहिक बाजारों में दुकानें कम होने लगी हैं। कई व्यापारियों ने गांव के बाजारों से अब किनारा कर लिया है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार तक सामान पहुंचाना खर्चीला हो चुका है। जितना किराया देकर सामान बाजार में पहुंचाते हैं सामान बेचने के बाद उतना मुनाफा भी नहीं निकल पाता है।

अंकिरा क्षेत्र में क्षेत्र का बड़ा बाजार लगता है। इसके साथ ही जोरण्डाझरिया, कोल्हेनझरिया, बाम्हरमारा, बाबूसाजबहार जैसे अनेक गांव हैं, जहां सप्ताह में एक दिन साप्ताहिक बाजार लगता है। गांव के इन बाजारों में साग-सब्जी के अलावा कपड़ा, किराना, अनाज, सौंदर्य प्रसाधन, लोहे के औजार, बांस के बर्तन, प्लास्टिक के सामान, जूता-चप्पल सहित अन्य जरूरी सामग्रियों की दुकानें सजती है। बाजार में दुकान लगाने वाले व्यापारी बाहर के होते हैं। हाल ही में डीजल के मूल्य बढ़कर पेट्रोल के बराबर हो गया है। ऐसी दशा में गाड़ियों में माल ढुलाई भी ज्यादा लग रही है, इसलिए बिक्री ज्यादा नहीं होती है। व्यापारियों का कहना है कि गांव के बाजार में दुकान सजाकर बिक्री करने के बाद जितना मुनाफा नहीं होता है।

गांव में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में अब नहीं लग रही कपड़ा और किराना सहित अन्य दुकानें

परिश्रम के बराबर दाम नहीं. व्यवसायी मोतीलाल साहु व मुकेश गुप्ता का कहना है कि डीजल का दाम बढ़ने के कारण उन्हें बाजार तक सामाना लाना ले जाना महंगा पड़ रहा है। दिनभर की बिक्री के बाद कई बार मुनाफा गाड़ी भाड़ा से भी कम निकलता है। नुकसान के साथ-साथ दिनभर का शारीरिक श्रम भी लगता है। दिनभर पसीना बहाने के बाद भी नुकसान हो रहा है। इसलिए हमने गांव के बाजार में दुकान लगाना बंद कर दिया है।

खरीदी करने अब जाएंगे 50 किमी दूर

गांव के साप्ताहिक बाजारोें से कपड़ा, चप्पल-जूता, सौंदर्य प्रसाधन, प्लास्टिक के सामान की दुकानें अब लगभग बंद हो चुकी है। ऐसे में ग्रामीण चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जो सामग्री उन्हें गांव के बाजार में मिल जाती थी अब उसे खरीदने के लिए 40 से 50 किमी का सफर करना पड़ेगा। टिकलीपारा निवासी लोचन यादव का कहना है कि उसे स्वेटर, शॉल आदि खरीदने हैं। गांव के साप्ताहिक बाजार में इस बार गर्म कपड़ों की दुकान नहीं लग रही है। अब उसे खरीदने के लिए या तो पत्थलगांव, तपकरा या फिर ओडिशा के सुंदरगढ़ जाना पड़ेगा। तीनों ही जगह की दूरी गांव से लगभग 50 किमी दूर है। सागजोर निवासी अंतोनिस का कहना है अब जरूरी सामान के लिए उसे विशेष रूप से तैयार होकर नगरीय क्षेत्र में जाना पड़ेगा।

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