जिलेवासियों में फिर जागी रेल लाइन की उम्मीद

Jashpuranagar News - जिलेवासियों की 45 साल पुरानी कोरबा लोहरदगा रेल लाइन की मांग पूरी होने की उम्मीद फिर जग गई है। झारखंड के राज्यसभा...

Jan 01, 2019, 02:30 AM IST
जिलेवासियों की 45 साल पुरानी कोरबा लोहरदगा रेल लाइन की मांग पूरी होने की उम्मीद फिर जग गई है। झारखंड के राज्यसभा सांसद समीर उरांव की पहल पर इस रेल लाइन परियोजना को मंजूरी मिल गई है। इससे जशपुर में भी रेल लाइन आने की उम्मीद बढ़ गई है।

झारखंड के राज्यसभा सांसद समीर उरांव के सवालों का जवाब देते हुए राज्य मंत्री रेल मंत्रालय ने कहा है कि 326 किलोमीटर लंबी लोहरदगा से कोरबा वाया जशपुर, गुमला, लोहरदगा रेलवे लाइन के सर्वे का काम दिसंबर में किया गया है। प्राइमरी सर्वे को मंत्रालय ने टेकअप कर लिया है और अगले रेल बजट में इसको शामिल किया जाएगा । समीर उरांव ने बताया कि सदन में उन्होंने दो सवाल किए थे। उन्होंने पूछा था कि मंत्रालय रेलवे लोहरदगा से गुमला (मांझाटोली बॉर्डर छत्तीसगढ़) के लिए रेलवे लाइन की योजना चाहती है। यदि चाहती है, तो क्या इसे अगले रेल बजट में शामिल करेगी। इसपर जवाब आया है कि योजना को मंजूर कर लिया गया है। गौरतलब है कि जशपुर में रेल लाइन बिछ जाती है, ताे लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। बेरोजगारी दूर होगी। रोजगार के अवसर खुलेंगे। लोगों को काम की तलाश में पलायन नहीं करना पड़ेगा। क्राइम, पलायन, ह्यूमन ट्रैफिकिंग आदि पर रोक लगेगी। शहर का विस्तार होगा। फिर कल कारखाना व उद्योग लगाने के लिए उद्योगपति भी आगे आएंगे।

एक्सक्लूसिव
जशपुर में 45 साल पहले उठी थी पहली मांग

जशपुर में रेल लाइन की मांग 45 साल पहले 1973 में छात्रसंघ द्वारा उठाई गई थी। रेल संघर्ष समिति के सचिव अधिवक्ता अखिलेश सहाय ने बताया कि उस वक्त तीन मांगे उठाई गई थी। पहली मांग एनईएस कॉलेज के शासकीयकरण, दूसरी जशपुर को जिला बनाने और तीसरी मांग जशपुर में रेल लाइन की थी। पूर्व की दो मांगों को राज्य सरकार द्वारा पूरा किया जाना था। यह दो मांगें अब पूरी हो चुकी है। श्री सहाय ने बताया कि उस वक्त छात्रसंघ द्वारा उठाई गई रेल की मांग पर सर्वे आदेश जारी हुआ था। मोरारजी देसाई के समय 1977 में कोरबा जशपुर लोहरदगा रेल लाइन की लागत 600 करोड़ रुपए थी। पर उस वक्त इस रेल लाईन को लाभदायक ना मानते हुए हटा दिया गया था। रेल संघर्ष समिति द्वारा लगातार केन्द्र सरकार को पत्र व्यवहार किया गया। उसके बाद जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थी उस वक्त यह फाइल दोबारा खुली थी। ममता बनर्जी के कार्यकाल में अपग्रेड सर्वे में इसकी लागत 2400 करोड़ रुपए आई थी। इसके बाद ममता बनर्जी ने पद से इस्तीफा दे दिया और यह फाइल ठंडे बस्ते में चली गई थी। अब झारखंड सांसद के सवाल पर केन्द्र सरकार से जो जवाब आया है उससे फिर से एक बार उम्मीद जगी है।

राज्य सरकार भी करे मदद


अधिवक्ता व सचिव रेल संघर्ष समिति।

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