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15 यूरिनल बनाने के प्रस्ताव को नहीं मिली मंजूरी

शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों में पुरुष व महिलाओं के लिए प्रसाधन कक्ष की व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 02:55 AM IST
शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों में पुरुष व महिलाओं के लिए प्रसाधन कक्ष की व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। खासकर महिलाएं ऐसे समय में असहज स्थिति का सामना करती है।

दो साल पहल पालिका ने 15 यूरिनल बनाने का प्रस्ताव बनाकर शासन के पास भेजा था, पर उसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। नगर पालिका पूरे नगरीय क्षेत्र में मात्र 7 सामुदायिक-सुलभ शौचालय बनाया हैं। देश सहित जिले में स्वच्छता अभियान चलने के बावजूद मुख्य मार्केट स्थलों में प्रसाधन कक्ष बनाने के लिए पालिका ने गंभीर नहीं है। नगरीय क्षेत्र के सार्वजनिक स्थानों में यूरिनल की उचित व्यवस्था नहीं होने से बाहर से आने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। शेष पेज 12





नगर पालिका ने 2015 में मुख्य मार्केट स्थलों में 8 लाख से पुरुष व महिला प्रसाधन कक्ष बनाने का प्रस्ताव भेजा था, पर प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। फंड का अभाव होने से इसका निर्माण नहीं हो सका। जिसके कारण आज भी लोग सार्वजनिक स्थानों के आसपास खुले स्थानों का उपयोग करते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत तो महिलाओं को होती हैं।

प्रसाधन कक्ष में गंदगी का आलम

शासन ने मंजूरी नहीं मिलने और फंड के अभाव में जरूरत के मुताबिक प्रसाधन कक्ष तो नगरीय क्षेत्र में नहीं है लेकिन नगर पालिका ने पार्षद निधि से शहर के मुख्य मार्ग में फैशन हाउस के पीछे एक प्रसाधन कक्ष बनवाया है, पर उसकी हालत भी खस्ता हो रही है। अंदर गंदगी का आलम रहता है, जिससे इस प्रसाधन कक्ष का उपयोग करने पर संक्रमण का खतरा बना रहता है। वहीं इसके दरवाजों में भी टूट-फूट होने लगी है।

कम्यूनटी हाल के पास बना प्रसाधन केन्द्र जर्जर हुआ।

भास्कर न्यूज | जशपुरनगर

शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों में पुरुष व महिलाओं के लिए प्रसाधन कक्ष की व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। खासकर महिलाएं ऐसे समय में असहज स्थिति का सामना करती है।

दो साल पहल पालिका ने 15 यूरिनल बनाने का प्रस्ताव बनाकर शासन के पास भेजा था, पर उसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। नगर पालिका पूरे नगरीय क्षेत्र में मात्र 7 सामुदायिक-सुलभ शौचालय बनाया हैं। देश सहित जिले में स्वच्छता अभियान चलने के बावजूद मुख्य मार्केट स्थलों में प्रसाधन कक्ष बनाने के लिए पालिका ने गंभीर नहीं है। नगरीय क्षेत्र के सार्वजनिक स्थानों में यूरिनल की उचित व्यवस्था नहीं होने से बाहर से आने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। शेष पेज 12





नगर पालिका ने 2015 में मुख्य मार्केट स्थलों में 8 लाख से पुरुष व महिला प्रसाधन कक्ष बनाने का प्रस्ताव भेजा था, पर प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। फंड का अभाव होने से इसका निर्माण नहीं हो सका। जिसके कारण आज भी लोग सार्वजनिक स्थानों के आसपास खुले स्थानों का उपयोग करते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत तो महिलाओं को होती हैं।

प्रसाधन कक्ष में गंदगी का आलम

शासन ने मंजूरी नहीं मिलने और फंड के अभाव में जरूरत के मुताबिक प्रसाधन कक्ष तो नगरीय क्षेत्र में नहीं है लेकिन नगर पालिका ने पार्षद निधि से शहर के मुख्य मार्ग में फैशन हाउस के पीछे एक प्रसाधन कक्ष बनवाया है, पर उसकी हालत भी खस्ता हो रही है। अंदर गंदगी का आलम रहता है, जिससे इस प्रसाधन कक्ष का उपयोग करने पर संक्रमण का खतरा बना रहता है। वहीं इसके दरवाजों में भी टूट-फूट होने लगी है।

इन स्थानों पर है आवश्यकता

नगरीय क्षेत्र में खासकर खेल मैदानों के पास, कॉमर्शियल एरिया, सरकारी दफ्तरों की अधिकता वाले क्षेत्रों में यूरीनल की अधिक आवश्यकता महसूस की जा रही है। इन क्षेत्रों में रोजाना दो से तीन हजार लोग अपने कामों से पहुंचते हैं। हालांकि कलेक्टोरेट के सामने, बाजारडांड़, बस स्टैंड में सुलभ शौचालय है। पर इसके बावजूद ऐसे स्थानों में और अधिक प्रसाधन कक्ष खोले जाने की जरूरत है। इस बात को नगर पालिका के अधिकारी भी महसूस करते हैं।

प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था