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खरीदी हुई बंद, इस बार जिले में 15 हजार किसान धान बेचने नहीं पहुंचे

15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी 31 जनवरी तक चली। इस वर्ष सूखे का असर धान खरीदी में भी दिखा। इस वर्ष जिले में 22 लाख क्विंटल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:35 AM IST

15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी 31 जनवरी तक चली। इस वर्ष सूखे का असर धान खरीदी में भी दिखा। इस वर्ष जिले में 22 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया था जबकि लक्ष्य से कम मात्र 16.66 लाख क्विंटल धान खरीदी हो पाई। 15 हजार पंजीकृत किसान तो अपना धान बेचने केंद्रों में पहुंचे ही नहीं।

गत वर्ष जिले में 18 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया था तथा लक्ष्य से कहीं अधिक 21 लाख क्विंटल धान खरीदी हुई थी। इस वर्ष जिले में कमजोर बारिश तथा सूखा पड़ने से धान का उत्पादन कमजोर रहा। जिले में 59,708 किसान पंजीकृत हैं जिसमें से 44,505 किसानों ही धान बेचने केंद्रों तक पहुंचे।

15203 किसान धान बेचने खरीदी केंद्र पहुंचे ही नहीं। धान खरीदी के अंतिम दिन 31 जनवरी को प्राय: धान खरीदी केंद्रों में भारी भीड़ उमड़ती थी। अंतिम दिन किसानों को कूपन दिए जाते जिसका नापतौल अगले एक सप्ताह तक होता था। इस वर्ष अंतिम दिन प्राय: खरीदी केंद्रों में वीरानगी छाई रही।

25 जनवरी के बाद से तो प्राय: खरीदी केंद्र सूने ही रहे। कांकेर धान खरीदी केंद्र में 1165 किसान पंजीकृत हैं जिसमे 592 किसान ही धान बेचने पहुंचे। कांकेर खरीदी केंद्र में इस बार 21,293 क्विटंल धान खरीदी हुई जबकि गत वर्ष 30 हजार क्विंटल धान खरीदी हुई थी। पीढ़ापाल में अंतिम दिन बोहनी तक नहीं हुई। पटौद केंद्र में भी अंतिम दिन वीरानागी छाई रही।

सूखे के हालत के कारण इस बार धान खरीदी कम

जिला विपणन अधिकारी विजय कोड़ोपी ने कहा इस बार गत सत्र की अपेक्षा धान खरीदी कम हुई है। कमजोर बारिश तथा सूखा की वजह से धान खरीदी कम हुई।

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