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तमिलनाडु में काम करने गए 5 बच्चे घर लौटे

अंतागढ़ क्षेत्र के पांच नाबालिगों को दलाल ने अधिक पैसा दिलाने का लालच देकर तमिलनाडु में काम करने के लिए भेज दिया...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:50 AM IST
अंतागढ़ क्षेत्र के पांच नाबालिगों को दलाल ने अधिक पैसा दिलाने का लालच देकर तमिलनाडु में काम करने के लिए भेज दिया था। बच्चे पैसा की लालच में अपने माता-पिता को बिना बताए तमिलनाडु काम करने निकल गए थे। बच्चे तमिलनाडु पहुंचकर काम करने पहुंचे इससे पहले ही सेलम में ट्रेन से उतरते ही वहां की पुलिस ने उन्हें पकड़ कर पूछताछ की।

इसके बाद उन्हें बाल गृह आश्रम को सौंप दिया गया। बच्चों द्वारा अपने गांव का सही पता नहीं बता पाने के चलते वहां की पुलिस व बाल गृह आश्रम को काफी खोजबीन करनी पड़ी। खोजबीन के बाद 31 जनवरी को उन्हें कांकेर लाया गया। यहां उनके पालक पहुंचकर अपने साथ ले गए। अंतागढ़ विकासखंड के आतुरबेड़ा से 4 व बड़े पिंजौरी से एक बच्चे को अक्टूबर माह में ग्राम टेमरू के सुकुराम ने तमिलनाडु के एक कंपनी में अच्छी मजदूरी मिलने का लालच देकर तमिलनाडु के लिए भेज दिया। बच्चों ने अपने पालकों को बिना जानकारी दिए निकल गए। सभी की उम्र 12 से 15 वर्ष की बीच है। बच्चों ने बताया कि सुकुराम उन्हें एक कंपनी में प्रतिमाह 7 हजार रुपए मिलने की बात कही।

कांकेर. बच्चों के पहुंचने के इंतजार में बैठे पालक।

स्कूल भेजने की दी समझाईश

बालक कल्याण समिति ने काउंसिलिंग में पालकों से बच्चो का देखरेख अच्छे ढंग से करने और नियमित स्कूल भेजने कहा गया। इस दौरान बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष गजानंद जैन, सदस्य शालनी राजपूत, अरूणा ठाकुर व मोईन नवाब, जिला बाल संरक्षण इकाई के नोडल अधिकारी संध्या साहू, सोशल वर्कर बबीता पटेल उपस्थित थीं।

बाल संरक्षण इकाई भी प्रयास कर रही थी

पालकों को कुछ ग्रामीणों से जानकारी मिली टेमरू निवासी सुकराम ने पांचों बच्चों को भेजा है। पालकों ने जब इस संबंध में सुकुराम से पूछा तो उसने सभी बच्चों को एक कंपनी में काम करने की जानकारी दी। बाल संरक्षण इकाई शुरूआत से ही बच्चों का पतासाजी करने में जुटी थी। इसके आधार पर बच्चोंं का पता चल पाया। 25 जनवरी को पांचों बच्चो को तमिलनाडु के बालक कल्याण आश्रम में लाया गया। उन्हें यहां से धमतरी के बाल गृह आश्रम भेजा गया। वहां से 31 जनवरी को सभी को सिंगारभाठ के बाल गृह लाया गया। यहां बच्चों के साथ पालकों की काउंसिलिंग की गई। इस दौरान पालक फागूराम नरेटी, चैतूराम, लच्छुराम, बधुराम व सुंदरी बाई ने कहा उनके बच्चे बिना बताए उन्हें छोड़कर चले गए थे। बच्चोंं का काफी खोजबीन के बाद भी नहीं मिल रहे थे।

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