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पुसवाड़ा के बालक आश्रम में 10 साल में नहीं बन सकी बाउंड्रीवॉल

पुसवाड़ा का बालक आश्रम 10 वर्षों से संचालित है, लेकिन इतने वर्षों बाद भी आश्रम का बाउंड्रीवाल नहीं बन पाया है। आश्रम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:50 AM IST

पुसवाड़ा का बालक आश्रम 10 वर्षों से संचालित है, लेकिन इतने वर्षों बाद भी आश्रम का बाउंड्रीवाल नहीं बन पाया है। आश्रम को फेसिंग तार से घेराव किया गया है। इसे कई बार जानवर तोड़ देते हैं। बालक आश्रम जंगल व पहाड़ी से लगा हुआ है। इस कारण जंगली जानवर का खतरा बना रहता है।

पुसवाड़ा का 50 सीटर का बालक आश्रम भवन 2008 से संचालित है, लेकिन बालक आश्रम भवन में बाउंड्रीवॉल से अब तक घेराव नहीं किया गया है। बीईओ ऑफिस द्वारा आश्रम परिसर के घेराव के लिए फेसिंग तार की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन फेसिंग तार को जानवर कई बार तोड़कर अंदर आ जाते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थाई बाउंड्रीवाल होना जरूरी है क्योंकि जहां पर बालक आश्रम भवन का निर्माण किया गया है। वहां पर जंगल के साथ पहाड़ी भी है। जहां पर भालू सहित अन्य जंगली जानवर रहते हैं। बालक आश्रम के अधीक्षक बीएस नेताम ने कहा कि आश्रम में बाउंड्रीवाल की मांग की जा रही है। बाउंड्रीवाल वैकल्पिक रूप से फेसिंग तार से की गई है लेकिन इसे जानवर तोड़ देते हैं। आश्रम में और भवन की मांग की जा रही है।

कांकेर. वैकल्पिक व्यवस्था के लिए फेसिंग तार से घेराव किया गया है।

भवन छोटा होने के साथ बेड भी कम

पुसवाड़ा का बालक आश्रम 50 सीटर का है। जिसमें सभी 50 बच्चे आश्रम में रहे हैं। आश्रम के लिए 14 लाख की लागत से भवन बना है। इसके अलावा एक अतिरिक्त कक्ष बना हुआ है। लेकिन फिर भी भवन छोटा पड़ता है। लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाए गए आश्रम के आवासीय भवन के छत में टिन लगी हुई है। जिसमें गर्मी के मौसम में काफी परेशानी होती है। यहां पर बेड भी केवल 25 हैं जिससे एक बेड में दो बच्चे सोते हैं। शौचालय चार हैं जबकि 6 शौचालय की जरूरत है। आश्रम परिसर में ही प्राथमिक शाला बनी हुई है। जहां पर बच्चे प्राथमिक शाला में पढ़ाई कर रहे हैं। प्राथमिक शाला के लिए बने बाथरूम में दरवाजा टूट गया है। जो अब तक नहीं लग पाया है।

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