1.08 करोड़ रु. खर्च किए 5 लाख के बिल पर विवाद हुआ, कबाड़ हो गए पंप-पाइप

Kanker News - अरौद में 24.98 लाख वाली उद्वहन सिंचाई योजना पर शासन ने 1.08 करोड़ खर्च दिए। लेकिन 5 लाख के बिजली बिल विवाद पर इसे बंद कर दिया...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:11 AM IST
Lakhanpuri News - chhattisgarh news 108 crore there was a dispute over the bill of 5 lakhs spent the punk pipe
अरौद में 24.98 लाख वाली उद्वहन सिंचाई योजना पर शासन ने 1.08 करोड़ खर्च दिए। लेकिन 5 लाख के बिजली बिल विवाद पर इसे बंद कर दिया गया। योजना बंद करने के कारण किसानों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है।

जानकारी के मुताबिक 30 साल पहले अरौद में किसानों के लिए उद्वहन सिंचाई योजना शुरू की गई थी। 24.98 लाख की लागत वाली इस योजना को 6 साल में पुरा होना था लेकिन काम अधूरा रह गया। तब कहा जाता था तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार योजना को पुरा करने पैसे नहीं दे रही है। 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बना तो अधूरी योजना को पूरा करने के लिए फिर काम शुरू हुआ। खर्च 1.08 करोड़ रुपए हो गए। इसे पूरा किया गया। योजना का ट्रॉयल शुरू हुआ तो बिजली बिल 5 लाख रुपए आया। योजना का काम पूरा होने के बाद इसे किसानों का समूह बना हस्तांतरित करना था लेकिन ट्रायल के दौरान आया 5 लाख के बिजली बिल अड़चन बन गया। किसानों ने बिल के साथ योजना को लेने से इंकार कर दिया। योजना का काम पूरा हुए 15 साल बीत चुके हैं एक इंच जमीन की सिंचाई नहीं नहीं हुई है। लाखों की मशीन कबाड़ हो गई है।

महानदी पर वर्ष 1988-89 में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्घ कराने उद्वहन सिंचाई योजना शुरू की गई थी। 24.98 लाख की लागत वाली इस योजना को 6 सालों में 1994-95 तक पुरा करना था। तब काम नहीं हो पाया। 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बना विभाग ने फिर योजना बनाई। लागत बढ़कर 1.08 करोड़ रुपए हो गई। काम पूरा किया गया। ट्रायल भी हुआ। बिजली बिल 5 लाख का आया। विभाग का कहना था बिजली बिल किसान देंगे। दूसरी ओर किसानों का कहना था जिस दिन से योजना उनको हस्तांतरित की जा रही है उसके बाद से वे बिजली बिल पटाएंगे। इसके बाद किसानों ने ही इसमें रूचि दिखाना कम कर दिया। जनप्रतिनिधियों व अफसरों ने इसे शुरू करने के लिए प्रयास ही नहीं किए। योजना ठप हो गई। मशीनें कबाड़ हो चुकी हैं।

लखनपुरी. उद्वहन सिंचाई योजना बंद पड़ी है।

दो गांव के 250 किसानों को मिलना था पानी

अरौद एवं टांहकापार के 188 अजाजजा के अलावा 62 अन्य किसानों के 207 हेक्टेयर खेतों को सिंचाई के लिए पानी मिलना था। महानदी से 60 हार्सपावर के तीन पंपों से पानी नदी तल से उठाकर 21.55 मीटर की उंचाई पर स्थित डिस्ट्रीब्यूशन चेंबर में पहुंचाना था। यहां से नहरों के माध्यम से अरौद व टांहकापार के किसानों के खेतों को सिंचाई के लिए पानी देना था।

भूमि अधिग्रहण किया पर नहीं हो पाई सिंचाई

योजनास्थल तक बिजली पहुंचाई गई, ट्रांसफार्मर लगाए गए। महानदी जल ग्राह क्षेत्र पर कुआं निर्माण किया गया। पंप लगे। निर्माण में लगने वाली किसानों की भूमि का अधिग्रहण हुआ। मुआवजा राशि मिली। सारा कुछ होने के बाद भी 30 सालों बाद भी हालात ये हैं की किसानों को सिंचाई के लिए योजना से पानी नहीं मिल पा रहा है।

नए सिरे से बनाएंगे

जलसंसाधन विभाग के एसडीओ ई लकड़ा ने कहा योजना बहुत पुरानी है। यहां लगी मशीनें खराब हो चुकी है। योजना क्यों बंद पड़ी है इसकी जानकारी ली जाएगी साथ ही योजना को चालू कराने नए सिरे से प्राकलन बनाया जाएगा।

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