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सघन जंगलों में पड़ी बेशकीमती मूर्तियों में तलाशने पहुंचते हैं प्रेम

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 02:42 AM IST

Kanker News - धनंजय शर्मा | बड़गांव (कांकेर) प्यार हासिल करने के लिए मन्नत मांगने, मंदिर की सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ने के किस्से और...

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धनंजय शर्मा | बड़गांव (कांकेर)

प्यार हासिल करने के लिए मन्नत मांगने, मंदिर की सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ने के किस्से और चांद-तारे तोड़ने के वायदे तो बहुत सुनने को मिलते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की एक जगह पर अनूठी मान्यता ख्यात है। प्रेम के मंदिर की पहचान रखने वाले इस स्थान पर कई ऐतिहासिक मूर्तियां रखी हैं। कहते हैं कि यहां की मूर्ति को खुरचकर पत्थर का चूरा ले लिया जाए तो प्रेमी का अपना होना तय है।

यह स्थान जिला मुख्यालय से 150 किमी दूर बड़गांव इलाके में है। बड़गांव से भी 30 किमी दूर जंगल में जाने पर किनार खुटा देव का प्राचीन मंदिर है। जिन्हें सम्मोहन के देवता के रूप में जाना जाता है।

वैलेंटाइन डे



बड़गांव से 30 किमी दूर घने जंगल में खुले में पड़ीं एतिहािसक मूर्तियां और इन्हें खुरचते लोग, जिससे नष्ट हो रही है बेशकीमती धरोहर।

आदिवासी कहते हैं ये सदियों पुरानी मान्यता

ऐसा कब से शुरू हुआ इस बारे में कोई स्पष्ट तो नहीं बता पाता, लेकिन यहां से सबसे नजदीक रामपुर गांव के 65 साल के पुजारी दुर्गसाय तुलावी कहते हैं कि हमने अपने पूर्वजों से सुना है कि यह हजारों साल पुराना मंदिर है। इसे किनार खुटा देव का मंदिर कहा जाता है। जिन्हें हम प्रेम के देवता के रूप में जानते हैं।

अध्ययन हो तो खुल सकती हैं इतिहास की परतें

बड़गांव के इस स्थान पर जो मूर्तियां और कलाकृतियां बिखरी हैं, उन्हें किनार खुटा देव ने ही गढ़ा है। जंगल मे जगह-जगह पड़ी प्राचीन मूर्तियों के इतिहास की सही जानकारी का कभी अध्ययन तो नहीं हुआ है। यहां आसपास किसी राजवंश से जुड़े तथ्य भी नहीं मिलते। ये मूर्तियां कितनी पुरानी हैं बगैर शोध के ये कहना मुश्किल है।

घरेलू रिश्ते सुधारने की आस लेकर आते हैं

यहां लोग सच्चे प्रेम की चाहत, घरेलू रिश्ते सुधारने की आस लेकर पहुंचते हैं। इस जगह की जानकारी मिलने पर भास्कर टीम घने जंगलों में पगडंडियों से होते इस स्थान पर पहुंची तो चार-पांच लोग मूर्तियों को पत्थर से खुरचकर चूरा निकालने में जुटे थे। पूछने पर उनमें से दो ने बड़ी मुश्किल से बताया कि हम सम्मोहन पैदा करने वाला चूरा लेने आए हैं।

मान्यता- मूर्ति खुरचकर पत्थर का चूरा लाने से मिल जाता है प्रेमी

कुछ यूं नष्ट हो रही धरोहर

पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों की देखरेख न होने से ये नष्ट हो रही हैं। यहां के दरवाजे चोरी हो गए हैं। बताते हैं कि ये पत्थर के दरवाजे थे। छोटी-छोटी मूर्तियां भी गायब हो रही हैं। जो बची हैं उन्हें लोग खुरचकर खंडित कर रहे हैं। हालांकि अभी आमजन की पहुंच से दूर होने के कारण इस स्थान पर काफी धरोहरें बची हैं, इनके संरक्षण के लिए काफी काम किया जा सकता है।

जानिए, वो कहानी

आदिवासी समाज में 7 और 14 भाइयों का महत्व है। इन्हें सृष्टि का जनक माना गया है। इनमें उसेह मुदिया सबसे बड़े माने गए हैं, इसी तरह हिरतोहरोपा, राजबूढ़ा परमहा, रायताल, लिंगो, भुरकाल देव और किनार खुटा देव अन्य भाई हैं। भाइयो में किनार खुटा सबसे छोटे थे। चिंगारा वाद्य बजाने में महारत रखने वाले किनार खुटा चिंगारा बजाते तो महिलाएं उसकी धुन पर इर्द-गिर्द थिरकती रहतीं। नाराज होकर बड़े भाइयों ने किनार खुटा को बांधकर नदी में फेंक दिया। किनार खुटा बहते हुए एक स्थान पर पहुंचे। वहां उन्होंने रात के पहर में भव्य मंदिर बना डाला। ये स्थान महाराष्ट्र के मरखण्डा में है।

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