25 साल बाद नक्सली शहीदी सप्ताह बेअसर, चलती रहीं बसें

Kanker News - कांकेर/बड़गांव/दुर्गूकोंदल। जिले के नक्सल संवेदनशील इलाकों में पिछले 25 सालों में पहली बार 28 जुलाई को नक्सली शहीदी...

Jul 29, 2019, 06:40 AM IST
Bhanupratappur News - chhattisgarh news naxalite marty week neutralized buses running after 25 years
कांकेर/बड़गांव/दुर्गूकोंदल। जिले के नक्सल संवेदनशील इलाकों में पिछले 25 सालों में पहली बार 28 जुलाई को नक्सली शहीदी सप्ताह बेअसर दिखा। अब तक नक्सलियों के एक फरमान से जहां गाड़ियों के पहिए थम जाते थे वहां भी दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रही। धुरनक्सल प्रभावित क्षेत्र में इरपानार, आमाबेड़ा और कोयलीबेड़ा से लोग बेखौफ होकर यात्रा करते रहे। जिन बाजारों में पहले सन्नाटा पसरा रहता था वहां भी भीड़ दिखी।

नक्सलियों ने जगह-जगह बैनर, पोस्टर लगाकर 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाने अपील की थी। पहले दिन भी चारगांव-मेटाबोदेली मार्ग पर नक्सलियों ने बैनर बांधे लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा। शनिवार रात तक शहीदी सप्ताह को देखते लोगों ने यात्रा स्थगित कर दी थी। रविवार सुबह इन लोगों में असमंजस की स्थिति बनी रही। बांदे से दुर्ग जाने वाली बस सुबह रवाना हुई जो खाली थी। इसके बाद वाहन चलने की जानकारी मिलते ही यात्री सड़कों पर आए और बिना किसी नक्सली डर के यात्रा करने लगे। भानुप्रतापपुर से कोयलीबेड़ा, नारायणपुर, पखांजूर, बांदे, अंतागढ़ जाने वाले मार्गो पर नियमित बस-टैक्सियां चलती रहीं।

बड़गांव। नक्सल शहीदी सप्ताह के पहले दिन चलते रहे यात्री वाहन।

कापसी के साप्ताहिक बाजार में लगी रही भीड़

इस बार नक्सली शहीदी सप्ताह का हाट बाजारों पर कोई असर नहीं दिखा। कापसी साप्ताहिक बाजार अन्य दिनों की तरह खुला रहा। बारिश के बावजूद लोग बाजार पहुंचे। पखांजूर, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, बांदे, आमाबेड़ा में भी दुकानें खुली रहीं। लोग खरीदारी करते रहे। गांव में लगने वाले छोटे बाजारों में भी रौनक बनी रही। शहीदी सप्ताह का असर अपवाद स्वरूप दुर्गूकोंदल में ही दिखा जहां दुकानें दोपहर तक बंद रहीं। हाहालद्दी और चेमल माइंस में जरूर काम बंद रहा।

बीएसएफ-पुलिस की सक्रियता से बदला माहौल

नक्सली शहीदी सप्ताह में मुठभेड़ में मारे गए साथियों का स्मारक बनाकर गांव-गांव में बैठक करते हैं। गांव के हर सदस्य को शामिल होना अनिवार्य होता था। बीएसएफ व पुलिस के नहीं पहुंचने पर नक्सली वहां स्मारक बनाते थे। साथ ही नक्सली जगह-जगह सड़क खोदकर और पेड़ काट मार्ग अवरुद्ध करते थे। लेकिन बीएसएफ व पुलिस द्वारा चलाए गए अभियान के कारण ग्रामीण नक्सलियों का साथ नहीं दे रहे हैं। इससे नक्सली अब ऐसा नहीं कर पा रहे हैं और वे सिर्फ अब बैनर पोस्टर तक ही सीमित रह गए हैं।

सीमापार महाराष्ट्र में लोगों ने जलाया नक्सली बैनर

पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के एटापल्ली के कुसुवाही गांव में ग्रामीणों ने नक्सली बैनर पोस्टर जलाया।

कांकेर जिले की सीमा से सटे महाराष्ट्र के एटापल्ली तहसील के गांव कुसवाही में लोगों ने नक्सलियों के शहीदी सप्ताह का विरोध किया। नक्सलियों द्वारा लगाए गए बैनर-पोस्टर को आग लगाकर विरोध प्रदर्शन करते नक्सलवाद मुर्दाबाद के नारे लगाए गए।

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