भवन नहीं इसलिए दिव्यागों के लिए नहीं खुली 6वींं कक्षा

Kanker News - शहर के शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बधितार्थ स्कूल में इस वर्ष 6वीं कक्षा शुरू होनी थी लेकिन भवन के अभाव में यहां 6वीं...

Jul 14, 2019, 07:00 AM IST
Kanker News - chhattisgarh news not building therefore not open for divya 6th class
शहर के शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बधितार्थ स्कूल में इस वर्ष 6वीं कक्षा शुरू होनी थी लेकिन भवन के अभाव में यहां 6वीं कक्षा शुरू नहीं हो पाई। पांचवी पास करने के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए जगदलपुर जाना पड़ रहा है।

वर्तमान में जहां दृष्टि एवं श्रवण बधितार्थ स्कूल संचालित है वहां मैदान तक नहीं होने से बच्चे खेल नहीं पाते। स्कूल किराए के छोटे से भवन में संचालित है जहां पहली से लेकर पांचवीं तक की कक्षाएं एक ही कमरे में संचालित होती है। आवासीय विद्यालय होने के कारण दिन में बच्चे जहां बैठकर पढ़ाई करते हैं रात में वहीं बिस्तर बिछा उन्हें सोना पड़ता है। शहर के सुभाष वार्ड में शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बधितार्थ विद्यालय 15 अगस्त 2014 से संचालित है लेकिन अभी इसका भवन नहीं बन पाया है।

पहले सत्र में कक्षा पहली मात्र संचालित थी जिसमें 7 बच्चों ने प्रवेश लिया था। तात्कालिक व्यवस्था के लिए किराए के मकान में स्कूल संचालन शुरू किया गया जो एक कक्षा तथा 7 बच्चों के लिए पर्याप्त था। हर साल एक कक्षा बढ़ने लगी, छात्र भी बढ़ने लगे लेकिन स्कूल भवन पांच सालों में नहीं बन पाया। नियमत: कक्षा पांचवी के बाद यहां छठवीं की भी कक्षाएं लगनी थी लेकिन मात्र भवन नहीं होने से यहां छठवीं की कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई। कक्षा पांचवी में गत शिक्षा गत शिक्षा सत्र में 7 बच्चे थे जो इस वर्ष पास होकर 6वीं में गए। सातो बच्चों को जगदलपुर के दृष्टि एवं श्रवण बधितार्थ विद्यालय में भर्ती कराना पड़ा।

स्कूल का स्वयं भवन बन जाता है तो यहां 12वीं कक्षा तक पढ़ाई शुरू हो जाती। स्कूल शुरू हुए पांच साल हो गए लेकिन भवन बनाना तो दूर अभी तक भवन बनाने जगह का चयन नहीं हो पाया है।

पांच शिक्षक स्वीकृत लेकिन पदस्थ मात्र एक: स्कूल में 5 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन मात्र एक ही पदस्थ है जबकि तीन प्रशिक्षित शिक्षकों के अलावा एक व्यवसायिक शिक्षक का भी पद रिक्त है।

किराए के छोटे से मकान में चल रहा दृष्टि एवं श्रवण बधितार्थ स्कूल।

एक कमरे में लगती है पांच कक्षाएं

वर्तमान भवन में एक बरामदा और पांच छोटे कमरे हैं कमरे बहुत छोटे हैं इसलिए पहली से लेकर पांचवी तक बरामदे में ही लगती है। दिन में इसी कमरे में बच्चे बैठकर पढ़ते हैं तथा रात में इसी कमरे में रखे पलंग पर सोते हैं। मात्र दो शौचालय तथा दो ही बाथरूम हैं जो यहां रहने वाले 27 बच्चों के लिए कम पड़ते हैं।

जगह नहीं मिल रही

विद्यालय अधीक्षक विजय रामटेके ने कहा भवन बनाने शासकीय जगह नहीं मिल पा रही है। यह भवन छोटा पड़ रहा है। दूसरा भवन तलाश कर रहे हैं।

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