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परतापुर थानाक्षेत्र के महला में कैंप खुलने से नक्सली बौखलाकर बार-बार इसी मार्ग पर बम प्लांट कर रहे हैं

जिले में पिछले 16 दिनों में 9 तथा 6 माह में 31 बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नक्सलियों ने 9 जुलाई को ताड़वायली के पास एक बम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 02:45 AM IST

परतापुर थानाक्षेत्र के महला में कैंप खुलने से नक्सली बौखलाकर बार-बार इसी मार्ग पर बम प्लांट कर रहे हैं
जिले में पिछले 16 दिनों में 9 तथा 6 माह में 31 बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नक्सलियों ने 9 जुलाई को ताड़वायली के पास एक बम विस्फोट किया जिसमें दो जवान शहीद हुए थे। पिछले पांच सालों में 2017 से अचानक बम मिलने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।

विशेषज्ञों की मानें तो नक्सलियों की संख्या लगातार घट रही है जिससे नक्सली अब फोर्स का सामना करने की स्थिति में नहीं हैं। यही कारण है वे छुपकर बम के सहारे हमला कर रहे हैं। घटती संख्या के कारण नक्सलियों ने अपनी रणनीति बदली है। लगातार चलाए जा रहे अभियान से नक्सली पीछे तो हटे ही उन्हें मिलने वाले हथियार, कारतूस भी बंद हो गए। एेसे में अपनी उपस्थिती दिखाने लगातार बम प्लांट कर रहे हैं ताकी कम संख्या में भी छुपकर वार कर सकें। 2017 के पूर्व पिछले चार सालों का आंकड़ा देखें तो साल भर में भी बम 30 के करीब नहीं पहुंचे जबकि 2017 में इसकी संख्या 70 तथा इस साल 6 माह में 31 बम मिल चुके हैं। परतापुर मार्ग में मंदिर टेकरी के निकट 16 दिनों 9 बम बरामद किए गए।

नक्सलियों ने घटती संख्या के कारण बदली रणनीति; फोर्स का सामना करने हिम्मत नहीं इसलिए बमों से दहशत फैलाने की कर रहे कोशिश

2009 में खुले कैंप के कारण मुख्यमार्ग सुरक्षित

जिले में 2009 से कैंप खुलना शुरू हुए। पहले भानुप्रतापपुर से बांदे, अंतागढ़, नारायणपुर, कोयलीबेड़ा मार्ग में नक्सली बम लगाते थे। बीएसएफ आने के बाद से इन मार्गो में बम मिलना बंद हुए। अंदरूनी इलाकों में ही नक्सली बम लगा रहे हैं।

तकनीक बदलकर रिमोट किया शामिल

विस्फोट करने नक्सलियों ने तकनीक भी तेजी से बदली। स्विच से लेकर बम तक लंबा तार बिछाना छोड़ रिमोट से विस्फोट कर रहे हैं। रिमोट से बम को तत्काल लगा आसानी से विस्फोट हो जाता है। हाल में जितने भी बम मिले उनमें बैटरी के साथ रिमोट संचालित सेंसर सिस्टम मिला।

कांकेर। परतापुर मार्ग में नक्सलियों द्वारा लगाया प्रेशर कुकर बम।

बम लगाने का सिलसिला ज्यादा दिन नहीं चलने वाला

पांच सालों में नक्सलियों ने इतने बम लगाए

साल बम

2013 30

2014 22

2015 25

3016 19

2017 70

2018 अबतक 31

मुठभेड़ में आई कमी: एसपी केएल ध्रुव

एसपी केएल ध्रुव ने बताया नक्सलियों के खिलाफ छेड़ी मुहिम से जिले में उनकी संख्या कम होती जा रही है। उनमें फोर्स का सामाना करने हिम्मत नहीं बची इसलिए मुठभेड़ में भी कमी आई है। नक्सली छुपकर हमला करने बम लगा रहे हैं। उसे भी फोर्स खोज कर निकाल लेती है। बम लगाने का सिलसिला ज्यादा दिन नहीं चलेगा।

अब टिफिन की जगह कुकर का इस्तेमाल

पिछले 6 माह में जितने बम मिले उनमें 90 फीसदी प्रेशर कुकर से बने हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कुकर की परत मोटी होती है, इसे गैसकिट लगा आसानी से सील किया जा सकता है।

विधानसभा चुनाव को देखते हुए बढ़ी संख्या

इस साल विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी गई। इसे लेकर आशंका जताई जा रही है कि नक्सली चुनाव में बाधा पहुंचाने संवेदनशील इलाके में तेजी से बम लगा रहे हैं।

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