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एजेंट धक्का खाने के लिए छोड़ गए, कान पकड़कर बाेले लोग-दोबारा चिटफंड में जमा नहीं करेंगे रकम

कान पकड़कर कह रहे हैं-अब कभी किसी के बहकावे में आकर ऐसे रुपए नहीं जमा करेंगे। ये शब्द निवेशकों की कतार में लगी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:00 AM IST

एजेंट धक्का खाने के लिए छोड़ गए, कान पकड़कर 
बाेले लोग-दोबारा चिटफंड में जमा नहीं करेंगे रकम
कान पकड़कर कह रहे हैं-अब कभी किसी के बहकावे में आकर ऐसे रुपए नहीं जमा करेंगे। ये शब्द निवेशकों की कतार में लगी वृद्धा के हैं, जो अपनी डूबी रकम वापस पाने के लिए जिला कार्यालय की लंबी लाइन में धक्के खा रहे हैं। निवेशकों ने कहा कि जब पैसे लेने थे तब एजेंट रोज-रोज घर के चक्कर लगाते थे। कहते थे कि दफ्तर तक मत जाओ-हम पैसे जमा कर देंगे। अब यहां धक्के खाने की बारी है तो वे साथ आने तैयार नहीं है। कुछ तो गायब हो गए हैं।

जिला प्रशासन ने जब से एलान किया है कि चिटफंड कंपनियों की प्रॉपर्टी बेचकर मिलने वाली रकम को ठगे गए निवेशकों के बीच बांटा जाएगा, तब से दावा करने के लिए निवेशकों की लाइन लग गई है। सोमवार को आवेदन जमा करने भानुप्रतापपुर के ग्राम करमोती से आईं यशोदा पोटाई ने कहा कि एजेंट को कई बार साथ में चलकर फाॅर्म जमा करने के लिए कहा लेकिन वह नहीं आया।

गाड़ी का खर्च भी देने की बात कही फिर भी नहीं आया। नरहरपुर की जयंती बाई ने बताया कि एजेंट के पास कई बार गए लेकिन वह अब मिलता ही नहीं है। उन्हें खुद आवेदन लेकर आना पड़ रहा है। अन्य निवेशकों ने बताया कि रोज घर आने वाले एजेंट कंपनी के भागने पर दिखना बंद हो गए हैं। कभी सामने आने पर रकम मांगते हैं तो कहते हम क्या करें कंपनी भाग गई।

कांकेर। दोबारा कंपनी में पैसे नहीं लगाने की कसम खातीं यशोदा पोटाई और अावेदन जमा करने के लिए लगी कतार।

ब्लैक में एक का दस में बिक रहा फॉर्म

फोटोकॉपी सेंटरों के संचालक मौके का पूरा फायदा उठा रहे हैं। पूर्व में एजेंटों के बनाए गए फॉर्मेट का प्रचलन शुरू हो गया है। यह अब तक एक से दो रुपए में उपलब्ध था जिसकी कीमत अब 10 रुपए कर दी गई है। आवेदन सादे कागज पर भी जमा किया जा सकता है। पेटोली की सावित्री धनकर ने बताया कि उसने 10 रुपए में एक पेज का फॉर्मेट खरीदा है।

लाइन तीन से अधिक, काउंटर एक

जिला प्रशासन ने निवेशकों से आवेदन लेने कलेक्टोरेट परिसर में एक काउंटर खोला है। इसमें एक ही कर्मचारी को बैठाया गया है। काउंटर के बाहर तीन से अधिक लाइन लग रही है। तीन पुरुषों की तथा एक महिलाओं की है। भीड़ अधिक होने के कारण महिलाओं की लाइन में कई बार धक्कामुक्की व बहस भी होती रही।

नोटबंदी जैसे हालात, कई बिना आवेदन दिए लौटे

आवेदन जमा करने वाली की भीड़ इतनी अधिक है कि कई लोगों का नंबर नहीं लग रहे हैं। हालात नोटबंदी जैसे ही हो गए हैं। निवेशक रकम वापस मिलने की आस में दूरदराज के गांव से सुबह से कलेक्टोरेट पहुंच रहे हैं। भीड़ अधिक होने के कारण शाम तक उनका नंबर नहीं आ रहा है। जयंत्री बाई ने कहा वह सुबह से आई हैं लेकिन नंबर नहीं आया।

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