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अंतागढ़ में रही कांटे की टक्कर, जो थे एक-दूसरे के खिलाफ, अब हो गए साथ

अंतागढ़ विधानसभा का नाम पहले नारायणपुर विधानसभा था तब से ही नतीजा हमेशा रोचक रहा है। 1993 लेकर 2008 तक के चुनाव में...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 02:31 AM IST
Kanker - the collision of the fork in antagarh which were against each other now it has happened
अंतागढ़ विधानसभा का नाम पहले नारायणपुर विधानसभा था तब से ही नतीजा हमेशा रोचक रहा है। 1993 लेकर 2008 तक के चुनाव में भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच हमेशा कांटे की टक्कर रही है। 2008 चुनाव में मामला इतना करीबी था कि गणना के बाद कांग्रेसियों ने अपनी जीत समझ उम्मीदवार को फूलमाला से लाद दिया था।

नतीजे की अधिकारिक घोषणा के बाद खुशी काफूर हो गई थी जबकि भाजपा प्रत्याशी हार की झूठी खबर से उबर नहीं पा रहे थे। अधिकांश बार के चुनाव में एक-दूसरे को टक्कर देने वाले विक्रम उसेंडी और मंतू पवार दोनों इस चुनाव में एक ही नाव में सवार होकर साथ हो गए हैं। नारायणपुर सीट पर पहली बार 1951 में अंतागढ़ क्षेत्र के एकमात्र कांग्रेस विधायक रामेश्वर देहारी मैदान में थे जिन्हें नॉमिनेट किया गया था। इसके बाद नारायणपुर से अंतागढ़ बनने तक सभी चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारा लेकिन कुल 15 चुनाव में 5 बार कांग्रेस जीती। 1951 और 1957 में अंतागढ़ क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर देहारी विधायक बने। 1962 में निर्दलीय अंतागढ़ के रामभरोस जीते क्योंकि कांग्रेस ने नारायणपुर के महिपाल को टिकट दी थी। 2008 में अंतागढ़ विधानसभा अलग हो गई।

गुरूजी बनते रहे विधायक

इस विधानसभा से विधायक बनने वाले अधिकतर पूर्व में शिक्षक थे। 1972 में विधायक बने रतीराम, 1977 के विधायक गुडरूराम शोरी, 1993 के विधायक विक्रम उसेंडी और 1998 के विधायक मंतू पवार भी पहले गुरूजी हुआ करते थे।

कांकेर। विक्रम उसेंडी और मंतू पवार इस चुनाव में एक साथ हैं।

उप चुनाव में दिल्ली तक गरमाई सियासत

2014 में हुए अंतागढ़ उपचुनाव में सियासत दिल्ली तक गरमा गई थी। विक्रम उसेंडी के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद उपचुनाव में भाजपा ने भोजराज नाग को उतारा था, कांग्रेस ने मंतू पवार पर दांव खेला लेकिन अंतिम समय में मंतू ने नाम वापस लेकर सबको चौंका दिया था। इसके बाद अकेले अंबेडकराइट पार्टी प्रत्याशी रूपधर पुड़ो को छोड़ बाकी निर्दलीय प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए थे। मैदान में अकेले डटे पुड़ो व नाग के बीच मुकाबले में नाग 50 हजार से ज्यादा मतों से जीते थे।

तीन के आंकड़े ने तीन बार किया फैसला

यहां जब जब कांग्रेस के मंतू पवार और भाजपा के विक्रम उसेंडी आमने-सामने हुए तब तब परिणाम काफी नजदीकी रहे। पहली बार 1993 विक्रम उसेंडी ने मंतू पवार को मात्र 316 वोटों से हराया, 1998 में मंतू पवार ने विक्रम उसेंडी को 634 वोटों से हराया, 2003 विक्रम उसेंडी ने मंतू पवार को 8814 वोटों से हराया, 2008 में विक्रम उसेंडी ने मात्र 109 वोटों से मंतू पवार को हराया, 2013 में विक्रम ने मंतू को 5171 वोटों से हराया।

जानिए... अंतागढ़ विधानसभा में 1951 से अब तक क्या रहे नतीजे

चुनाव उम्मीदवार पार्टी नतीजे

1951 रामेश्वर देहारी अंतागढ़ कांग्रेस निर्विरोध

1957 रामेश्वर देहारी अंतागढ़ कांग्रेस जीते

1962 राम भरोस अंतागढ़ निर्दलीय जीते

महीपाल सिंह नारायणपुर कांग्रेस हारे

1967 बद्रीनाथ जयदेव नारायणपुर निर्दलीय जीते

एम अमर सिंग अंतागढ़ जनसंघ हारे

एल करीया नारायणपुर कांग्रेस हारे

1972 रतीराम नारायणपुर कांग्रेस जीते

1977 गुडरूराम शोरी अंतागढ़ जनता पार्टी जीते

बद्रीनाथ जयदेव कांग्रेस हारे

1980 शंभूनाथ नाइक परलकोट जनता पार्टी जीते

मंहगूराम समरथ अंतागढ़ कांग्रेस हारे

गुडरूराम शोरी अंतागढ़ भाजपा हारे

1985 बद्रीनाथ बघेल नारायणपुर कांग्रेस जीते

शंभूनाथ नाइक परलकोट भाजपा हारे

चुनाव उम्मीदवार पार्टी नतीजे

1990 शंभूनाथ नाइक परलकोट भाजपा जीते

मंतूराम पवार परलकोट सीपीएम हारे

बद्रीनाथ बघेल नारायणपुर कांग्रेस हारे

1993 विक्रम उसेंडी अंतागढ़ भाजपा जीते

मंतू पवार कांग्रेस हारे

1998 मंतू पवार कांग्रेस जीते

विक्रम उसेंडी भाजपा हारे

2003 विक्रम उसेंडी भाजपा जीते

मंतूराम पवार कांग्रेस हारे

2008 विक्रम उसेंडी भाजपा जीते

मंतूराम पवार कांग्रेस हारे

2013 विक्रम उसेंडी भाजपा जीते

मंतूराम पवार कांग्रेस हारे

2014 भोजराज नाग भाजपा जीते

रूपधर पुड़ो अांरापा हारे

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