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1200 साल पुरानी प्रतिमा, पहाड़ों के बीच बन रहा तीर्थ

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:05 AM IST

Kawardha News - आज भगवान महावीर का जन्मोत्सव है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर। समाज ने भगवान महावीर के जन्मोत्सव की तैयारी पूरी कर ली...

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आज भगवान महावीर का जन्मोत्सव है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर। समाज ने भगवान महावीर के जन्मोत्सव की तैयारी पूरी कर ली है। दूसरी ओर भगवान महावीर से पहले 23वें तीर्थंकर भगवान चिंतामणी पार्श्व नाथ का तीर्थ भी कवर्धा से लगभग 50 किलोमीटर दूर बकेला में निर्मित हो रहा है। इस तीर्थ में भगवान पार्श्व नाथ की प्रतिमा विराजमान है, जो खोदाई के दौरान 1979 में मिली थी। अब ख्यात पुरा स्थल पचराही से लगे हुए बकेला में भव्य मंदिर का निर्माण जारी है। मंदिर निर्माण में सरिए का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

भगवान पार्श्व नाथ की यह प्रतिमा विराजित होगी।

1200 वर्ष प्राचीन प्रतिमा की स्थापना के लिए मंदिर का निर्माण जारी है। मंदिर का डिजाइन नक्शा तैयार करने वाले सोनपुरे ने बनाई है। मंदिर संगमरमर से बनाया जा रहा है। मंदिर के करीब बड़े हिस्से में यह संगमरमर तराशे भी जा रहे हैं। धीरे-धीरे करके इससे मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। भीतर गर्भगृह को अंतिम रूप देने का साथ ही गुंबद का काम भी जारी है। मंदिर का निर्माण पिछले 3 साल से हो रहा है, बकेला श्री चिंतामणी पार्श्व नाथ तीर्थ के ट्रस्टी रमेश चोपड़ा बताते हैं कि इस साल दीपावली से पूर्व मंदिर का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।

इस साल दीपावली से पहले तैयार होगा

राजस्थान के सोनपुरे ने यह डिजाइन तैयार किया है, जिस पर नक्काशी जारी है।

12 एकड़ में यह तीर्थस्थल विकसित किया जा रहा

बकेला में भगवान चिंतामणी पार्श्व नाथ का तीर्थस्थल 12 एकड़ में विकसित किया जा रहा है। अब तक धर्मशाला और प्रवचन हॉल बनाए जा चुके हैं। साधू-संतों के रुकने के लिए भी भवन बनाए गए हैं। भोजनशाला का निर्माण भी किया गया है। बताया जाता है कि बकेला में जिस स्थान पर भगवान की प्रतिमा मिली, वहां आदिवासी कभी हल नहीं चलाते थे, क्योंकि वे इनकी देवगन गुरु के नाम से पूजा करते थे। जीर्णोद्धार के लिए श्री बकेला पार्श्व नाथ जैन श्वेतांबर तीर्थ ट्रस्ट काम कर रहा है।

जानिए, भगवान पार्श्व नाथ के बारे में

जैन ग्रंथों के अनुसार 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्व नाथ के मोक्ष प्राप्त करने के 188 वर्ष बाद भगवान महावीर का जन्म हुआ था। भगवान पार्श्व नाथ का जन्म 3 हजार वर्ष पूर्व वाराणसी में हुआ था। प्रारंभिक जीवन राजकुमार के रूप में बीता। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में घर त्याग दिया था और जैनेश्वरी दीक्षा ली थी। काशी में 83 दिन की कठोर तपस्या करने के बाद 84वें दिन उन्हें केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था। उन्होंने 5 मुख्य व्रत सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य की शिक्षा दी।

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