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विस चुनाव में मांगी 90 कंपनी, मिली 50, लोस में उतने की भी उम्मीद नहीं

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 02:30 AM IST

Kawardha News - नक्सल प्रभावित कबीरधाम जिले में शांतिपूर्वक चुनाव कराना पुलिस के लिए कतई आसान नहीं होगा क्योंकि देशभर में चुनाव...

Kawardha News - chhattisgarh news 90 companies sought for election in the election found 50 not expected in los
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नक्सल प्रभावित कबीरधाम जिले में शांतिपूर्वक चुनाव कराना पुलिस के लिए कतई आसान नहीं होगा क्योंकि देशभर में चुनाव के कारण पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं मिल पाएगा। विधानसभा चुनाव में ही पुलिस ने सुरक्षाबलों की 90 कंपनी मांगी थी, लेकिन 50 ही मिली थी। इस बार इतने बल की भी उम्मीद नहीं है। कम बल में व्यवस्थित चुनाव कराने की चुनौती होगी। खास बात ये है कि इस बार संवेदनशील मतदान केंद्रों की संख्या और बढ़ गई है।

विधानसभा चुनाव में जहां 100 पोलिंग बूथ संवेदनशील माने गए थे, वहीं लोकसभा चुनाव में 102 मतदान केंद्रों को असुरक्षित करार दिया है। ये सभी केंद्र नक्सल मामले में संवेदनशील हैं। चुनाव के लिए पुलिस ने 50 कंपनी की डिमांड की है। हर कंपनी में 100 से 110 जवान रहते हैं। इस हिसाब से साढ़े 5 हजार जवानों की जरूरत होगी। जिले में नक्सली घटनाओं के लिहाज से ये बल पर्याप्त नहीं है।

हकीकत: एक भी संवेदनशील मतदान केंद्र नहीं हुए कम

कवर्धा. नक्सली कैंप ध्वस्त होने के बाद इलाके में सर्चिंग जारी।

संवेदनशील/अति-संवेदनशील केंद्रों की स्थिति

पोलिंग बूथ का वर्ग पंडरिया विस कवर्धा विस कुल

अति संवेदनशील(नक्सल) 07 49 56

संवेदनशील (नक्सल) 11 35 46

संवेदनशील (राजनैतिक) 102 89 196

सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं नक्सली

बकोदा मुठभेड़ में कोई दर्जनभर नक्सली नहीं थे, बल्कि उनकी एक पूरी कंपनी थी। झीरमघाटी के मास्टर माइंड में से एक सुरेन्द्र उर्फ कबीर भी शामिल था। मकसद था, चुनाव के दौरान सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए बड़ी घटना को अंजाम देना। मुठभेड़ के बाद नक्सली कैंप से मिले 5 किलो वजनी कुकर बम और आईईडी इसके सबूत हैं। सुरक्षा बलों से पिछले कुछ मुठभेड़ में नक्सलियों को नुकसान पहुंचा है, इसलिए वे आमने-सामने लड़ने की बजाय ऐसी रणनीति को अंजाम देने में लगे हैं।

भास्कर रिकॉल: पोलिंग पार्टियों को जल्दी निकाल लाए थे

लोकसभा चुनाव- 2019 के मद्देनजर जिले में 802 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। इनमें 102 बूथ नक्सल मामले में असुरक्षित हैं। चार महीने पहले ही विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हुई थी। सुरक्षा के लिहाज से पंडरिया सेक्टर के पहुंचविहीन बूथों से पोलिंग पार्टियों को शाम 5 बजे से पहले ही निकालकर ले आए थे। इनमें कांदावानी, सेंदूरखार, रुखमीदादर और तेलियापानी लेदरा जैसे कई संवेदनशील बूथ शामिल हैं।

डिमांड से शायद कुछ कंपनी कम मिले


दावा; नक्सलियों के लिए बॉर्डर सील करने का, फिर भी घुस आए

कवर्धा|नक्सल प्रभावित जिला घोषित होने पर पुलिस ने मध्यप्रदेश और राजनांदगांव जिले से लगे सीमावर्ती इलाके में 3 पुलिस कैंप और 1 थाना खोला है। दावे करते रहे हैं कि नक्सलियों के लिए बॉर्डर सील हो चुका है। इसके बावजूद सुरक्षा का आलम ये है कि नक्सली न सिर्फ यहां घुस आए, बल्कि इन पुलिस कैंप व थानों के बीच बकोदा के जंगल में ठिकाना बना लिए।

बकोदा वह इलाका है, जो सिंघनपुरी व झलमला पुलिस कैंप, रेंगाखार जंगल, चिल्फी थाना और भोरमदेव थाना के बीच मौजूद हैं। यहीं पर आधा किलोमीटर के दायरे में नक्सलियों ने 5 कैंप लगाया था। मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने घेराबंदी की थी। इसके बावजूद नक्सलियों की पूरी कंपनी भाग गई।

पिछली बार 4 जनवरी को लोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम पालक के पास केलाबाड़ी के जंगल में सुरक्षा बलों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ के बाद से अब तक 80 बार सर्चिंग करने का दावा किया जा रहा है।

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