बरसात नहीं होने से दोबारा बोवनी का खतरा मंडराया

Kawardha News - अंचल में पिछले पांच दिनों से मानसून रुक गया है। बंगाल की खाड़ी में वर्षा से संबंधित कोई प्रभावी सिस्टम नहीं बन...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 06:45 AM IST
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अंचल में पिछले पांच दिनों से मानसून रुक गया है। बंगाल की खाड़ी में वर्षा से संबंधित कोई प्रभावी सिस्टम नहीं बन पाने के कारण अंचल में थम गई है। बारिश नहीं होने के कारण खेती किसानी का कार्य प्रभावित होने लगा है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम नहीं बन पाने से अगले चार पांच दिनों बाद ही बारिश होगी। बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन फसल बोने के लिए अनुकूल मौसम किसानों को नहीं मिल पा रहा है। हालांकि शुरुआती दौर में बारिश जरूर हुई। लेकिन कम बारिश होने के कारण कहीं-कहीं खंड वर्षा तथा अल्प वर्षा की वजह से खेती किसानी का कमजोर पड़ गया है।

जिले में अब तक 190.2 मिमी औसत वर्षा दर्ज: जिले में 1 जून से 7 जुलाई तक 190.2 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। सर्वाधिक 309.4 मिमी वर्षा बेमेतरा तहसील में तथा न्यूनतम 107.4 मिमी वर्षा नवागढ़ तहसील में दर्ज की गई है। बेरला तहसील में 145.0 मिमी वर्षा, साजा तहसील में 127.0 मिमी वर्षा, थानखम्हरिया तहसील में 262.2 मिमी दर्ज की गई है।

चिंता में किसान : अल्पवर्षा और खंडवर्षा के योग बन रहे

रोपा बियासी के काम में भी पिछड़ रहे

बारिश पिछड़ने की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोपा, बियासी का काम िस्थर हो गया है। िजससे मजदूरों खेती किसानी के काम नहीं मिल पा रहे हैं। इस साल वर्षा काल के शुरुआती दिनों से ही अंचल में बारिश रुक रुककर हो रही है। जिससे खेती किसानी के अलावा सामान्य कामकाज पर भी असर पड़ने लगा है। बारिश नही होने से वाटर लेवल नहीं बन पाया है, जिससें बिजली की खपत बढ़ गई है। तथा सिंचाई पावर पंप बड़े पैमाने पर चलने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से विद्युत आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

उमस और गर्मी से लोग परेशान

बारिश नही होने से तेज धूप िनकलने लगी है। कही कही लोग छतरी का सहारा ले रहे हैं। धूप के शाम होते ही उमस व गर्मी के चलते परेशानी बढ़ने लगी है। साथ ही जन स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ने लगा है मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल लगभग 1 हफ्ते तक कोई बारिश की संभावना नहीं है। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ना वाजिब है।

एक हफ्ते तक बारिश नहीं होने पर भी हाल ठीक


बोवनी के बाद भी अंकुरण में देर

बारिश थमने के बाद किसानो की चिंता बढ़ने लगी है। किसानो खेतों में धान की बुआई कर चुके हैं। शुरूआती दिनों में हल्की बारिश से खेतों में पर्याप्त जल की आपूर्ति नही हो पाई थी। बोनी के बाद भी अंकुरण में काफी विलंब हो रहा है। बीज पौधे का आकार लेने के पहले ही मुरझाने लगा है। ऐसे में किसानों को दोबारा बोनी की आवश्यकता पड़ सकती है।

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