रहमत का पहला अशरा खत्म, मगफिरत का दूसरा शुरू, गुनाहों की माफी मांगेंगे

Kawardha News - मुस्लिम समाज पूरी शिद्दत के साथ रमजान के मुबारक माह में इबादत में मशरूफ हैं। रमजान माह का पहला अशरा रहमत का...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:06 AM IST
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मुस्लिम समाज पूरी शिद्दत के साथ रमजान के मुबारक माह में इबादत में मशरूफ हैं। रमजान माह का पहला अशरा रहमत का गुरुवार को पूरा होते ही शुक्रवार से दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू हो गया है।

पाेंड़ी जामा मसजिद के पेश इमाम अश्फाक रजवी ने बताया कि पूरे रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जो पहला, दूसरा और तीसरा अशरा कहलाता है। अशरा अरबी का 10 नंबर होता है। इस तरह रमजान के पहले 10 दिन (1-10) में पहला अशरा, दूसरे 10 दिन (11-20) में दूसरा अशरा और तीसरे दिन (21-30) में तीसरा अशरा बंटा होता है। पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है और तीसरा अशरा जहन्नम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है। शुक्रवार को जिले की तमाम मसजिदों में रमजान माह का दूसरा जुमा की नमाज अदा की गई। जैसे-जैसे मई के माह बढ़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे रोजा का समय भी बढ़ रहा है। वर्तमान समय में रोजा करीब 15 घंटे का पड़ रहा है। शुक्रवार को सेहरी का समय सुबह 4.06 व इफ्तार का समय शाम 6.37 था। शनिवार सेहरी का समय सुबह 4.05 बजे व इफ्तार का समय शाम 6.37 बजे होगा।

70 गुना सवाब: इमाम अश्फाक रजवी ने बताया कि रमजान को इस्लाम धर्म में सबसे पवित्र माह माना जाता है। इस महीने में एक निफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है। नमाज के बाद इस महीने अधिक से अधिक कुरान की तिलावत किया जाता है। अल्लाह को कुरअान की तिलावत पसंद है।

पोंड़ी जामा मसजिद में शुक्रवार को दूसरे जुमे की नमाज अदा की गई।

ये हैं रमजान के तीन अशरे

रमजान का पहला अशरा: रमजान महीने के पहले 1 से 10 दिन रहमत के होते हैं। रमजान के पहले अशरे में ज्यादा से ज्यादा दान कर के गरीबों की मदद करनी चाहिए। हर एक इंसान से प्यार और नम्रता का व्यवहार करना चाहिए। पहले अशरे से ही तरावीह की नमाज शुरू होती है, जो पूरे रमजान के माह में सभी मसजिदों में पढ़ी जाती है।

रमजान का दूसरा अशरा: 11वें रोजे से 20वें रोजे तक दूसरा अशरा चलता है, यह अशरा माफी का होता है। इसे मगफिरत का अशरा कहा जाता है। इस अशरे में लोग इबादत कर के अपने गुनाहों से माफी पा सकते हैं। इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, अगर कोई इंसान रमजान के दूसरे अशरे में अपने गुनाहों (पापों) से माफी मांगता है, तो दूसरे दिनों के मुकाबले अल्लाह बंदों को जल्दी माफ करता है।

रमजान का तीसरा अशरा: रमजान का आखिरी अशरा 21 वें रोजे से शुरू होकर चांद के हिसाब से 29वें या 30वें रोजे तक चलता है। ये अशरा सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। तीसरे अशरे का उद्देश्य जहन्नुम की आग से सुरक्षित रखना है। रमजान के आखिरी अशरे में कई मुस्लिम मर्द और औरतें एतकाफ में बैठते हैं। एतकाफ में मुस्लिम पुरुष मस्जिद में एक जगह बैठकर अल्लाह की इबादत करते हैं, जबकि महिलाएं घर में इबादत करती है।

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