भाजपा से रमन, अभिषेक व मधु तो कांग्रेस से मंत्री अकबर व चारों विधायकों की भी प्रतिष्ठा दांव पर

Kawardha News - नामांकन दाखिले के बाद से भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने अप्रैल में पड़ रही झुलसा देने...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:05 AM IST
Kawardha News - chhattisgarh news raman abhishek and madhu from the bjp the reputation of the akbar and the four legislators of the congress at stake
नामांकन दाखिले के बाद से भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने अप्रैल में पड़ रही झुलसा देने वाली तेज धूप व 40 डिग्री टेम्प्रेचर के बीच संसद भवन तक पहुंचने के लिए खूब पसीना बहाया। लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ढोल-नगाड़ों के बीच जोर लगाया। वहीं 16 अप्रैल को मतदान के 48 घंटे पहले चुनाव शोर थमा गया। इस चुनाव में एक तरह नरेन्द्र मोदी तो दूसरी ओर राहुल गांधी का चेहरा है तो वहीं लोकसभा क्षेत्र के उन नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव में लगी है जो कभी इस सीट पर काबिज रहे हैं तो वहीं विधानसभा के चुनाव में भारी मतों से जीतकर आए हैं।

भाजपा से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व सांसद मधुसूदन यादव तो कांग्रेस के जिले के प्रभारी मंत्री मोहम्मद अकबर, विधायक दलेश्वर साहू, विधायक छन्नी साहू, विधायक भुवनेश्वर बघेल व विधायक इंदर शाह मंडावी की प्रतिष्ठा दांव पर है। इसके बाद नगरीय निकाय व पंचायत स्तर के चुनाव होने हैं। इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस की दखल ज्यादा रही है। आजादी के बाद से अब 16 लोकसभा चुनाव हुए हैं। 1952 से 1999 के बीच 13 चुनाव हो चुके हैं। इन चुनावों के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में रहे हैं। यानी की सीट पर कांग्रेस कब्जा रहा है पर वर्ष 2000 में छग की स्थापना के बाद से इस सीट पर कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा ने राज किया है।

प्रचार: 40 डिग्री तापमान में प्रत्याशियों ने खूब बहाया पसीना

अंतिम दौर में भाजपा की जनंसपर्क यात्रा

16 अप्रैल को समय कम होने की वजह से शाम 5 बजने से पहले ही भाजपा-कांग्रेस के नेताओं ने शहर में पैदल भ्रमण कर जनसंपर्क किया और समर्थन मांगा। भाजपा ने गायत्री मंदिर के पास से जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की। पूर्व सांसद अशोक शर्मा, खूबचंद पारख, संतोष अग्रवाल, शोभा सोनी, नीलू शर्मा व अन्य नेता शामिल हुए। युवा मोर्चा ने बाइक रैली निकाली।

2007 के उपुनाव में कांग्रेस के कब्जे में गई थी यह सीट

राजनांदगांव जिले में वर्ष 2004 के चुनाव में भाजपा के प्रदीप गांधी जीते थे। 2007 में ऑपरेशन दुर्योधन कांड के बाद उपचुनाव हुआ तो यह सीट कांग्रेस के कब्जे में चली गई। यानी की देवव्रत सिंह सांसद चुने गए थे। इसके बाद जब 2009 में चुनाव हुआ तो फिर से भाजपा का कब्जा हुआ। मधुसूदन यादव पार्षद से सांसद बने थे। इसके बाद 2014 में चुनाव हुआ तक मुख्यमंत्री के पुत्र अभिषेक सिंह को मैदान में उतारा गया। अभिषेक ने जीत दर्ज कर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा। बता दें कि 1999, 2004, 2009, 2014 के चुनाव में बीजेपी सीट पर काबिज रही है।

जानिए, कब किसने कैसा प्रदर्शन किया

2014 के चुनावों में राजनांदगांव सीट की स्थिति

अभिषेक सिंह बीजेपी 643473 जीते

कमलेश्वर वर्मा कांग्रेस 407562 हारे

2009 के चुनावों में राजनांदगांव सीट की स्थिति

मधूसूदन यादव बीजेपी 437721 जीते

देवव्रत सिंह कांग्रेस 318647 हारे

2007 के उपचुनाव में राजनांदगांव सीट की स्थिति

देवव्रत सिंह कांग्रेस 345009 जीते

लीला राम भोजवानी बीजेपी 293395 हारे

2004 के चुनावों में राजनांदगांव सीट की स्थिति

प्रदीप गांधी बीजेपी 314520 जीते

देवव्रत सिंह कांग्रेस 300197 हारे

शहर में कांग्रेस की पूरी टीम निकली

प्रचार थमने के आखिरी दिन दोपहर में कांग्रेस ने जयस्तंभ चौक स्थित कार्यालय से जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की। प्रत्याशी भोलाराम साहू के साथ ही पूर्व सांसद करुणा शुक्ला, शहर अध्यक्ष कुलबीर सिंह छाबड़ा सहित ब्लॉक अध्यक्षों ने अपनी टीम के साथ शहर भ्रमण कर लोगों से समर्थन मांगा। चौक-चौराहों में नुक्कड़ सभा भी की।

इनकी प्रतिष्ठा इसलिए दांव पर

भाजपा से

1. रमन सिंह: राजनांदगांव-कवर्धा लोकसभा सीट ने ही डॉ. रमन सिंह को राजनीतिक ऊंचाइयां दी हैं। रमन ने कांग्रेस दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा को इस सीट से हराकर केन्द्र की राजनीति में कदम रखा था। केन्द्रीय मंत्री बनें। 15 साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।

2.अभिषेक सिंह: इन्हे 2014 में लोकसभा चुनाव की टिकट मिली। 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर प्रदेश में अपनी पहचान बनाई। इस सीट से जीतने के बाद केन्द्रीय स्तर के नेताओं की नजर में आए, राजनीतिक कॅरियर की यहीं से शुरुआत हुई, वर्तमान में चुनावी कमान मिली है।

3. मधुसूदन यादव: कवर्धा-राजनांदगांव सीट पर चुनाव लड़कर पार्षद से सीधे सांसद बनें। सांसद बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनीं। मॉस लीडर के रूप में जाने जाते हैं। संसदीय क्षेत्र के हर गांव के कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क है। वर्तमान में लोकसभा संयोजक भी हैं।

4. नीलू शर्मा: युवा नेता हैं, इन्हें भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला था। विधानसभा चुनाव में दावेदारी भी कर रहे थे। महापौर चुनाव के लिए भी दावेदारी कर चुके हैं। युवाओं के बीच अच्छी पकड़ होने से अहम भूमिका।

कांग्रेस से

1.मोहम्मद अकबर: जिले के प्रभारी मंत्री होने के साथ ही कवर्धा और पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते हैं। वर्तमान में लोकसभा चुनाव की कमान संभाले हैं और प्रत्याशी के साथ ही स्टार प्रचारकों के साथ प्रचार में जुटे रहे।

2. भुनेश्वर सिंह बघेल: डोंगरगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं। 35 हजार वोटों से जीत दर्ज की है। इनके जिम्मे विस चुनाव में मिली जीत के रिस्पांस को कायम रखना है। वोट प्रतिशत से इनके परफार्मेंस का आंकलन होगा, राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत हुई

3. छन्नी साहू: खुज्जी सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। महिला होने के साथ ही जिलेभर में चर्चित नेत्री हैं। इसलिए इनके कंधे पर लोकसभा चुनाव में विधानसभा की तरह ही जीत दर्ज करने की जिम्मेदारी है, पूर्व में ये किसान संगठन से भी जुड़ी रहीं हैं।

4. दलेश्वर साहू: डोंगरगांव सीट से दोबारा विधायक चुने गए हैं। मॉस लीडर कहे जाने वाले मधुसूदन यादव को हराकर ये प्रदेश स्तर पर चर्चा में आए हैं। साहू समाज से हैं। कांग्रेस प्रत्याशी भी इसी समाज से हैं। इसलिए इनके कंधे पर कुछ ज्यादा ही बोझ है।

5. इंदर शाह मंडावी: आदिवासी बाहुल्य मानपुर-मोहला सीट से पहली बार विधायक चुने गए हैं। जीत दर्ज कर कांग्रेस की परंपरागत सीट पर कब्जा बरकरार रखा। बेहतर प्रदर्शन बनाए रखना होगा।

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