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पल्स पोलियो की तर्ज पर मिजल्स रूबेला महा अभियान अगस्त से

भारत के सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम (यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम) में खसरा रूबेला (मिजल्स रूबेला) के नए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 02:30 AM IST

भारत के सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम (यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम) में खसरा रूबेला (मिजल्स रूबेला) के नए टीके को शामिल कर लिया गया है। अनेक राज्यों में पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर यह टीकाकरण अभियान शुरू हो चुका है। वहीं छत्तीसगढ़ में अगस्त से मिजल्स रूबेला टीकाकरण महाभियान शुरू करने शुक्रवार काे कार्यशाला हुई।

कार्यशाला में राज्य स्तर से बतौर प्रतिनिधि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की एसएमओ डॉ मैथिली ने बताया कि बुखार, मिचली और प्रमुख रूप से गुलाबी या लाल चकत्तों के निशान जो लगभग 50 से 80% मामलों में उत्पन्न होते हैं, ये मीजल्स रूबेला के लक्षण हैं। चकत्ते प्राय: चेहरे पर निकलते हैं, नीचे की ओर फैलते हैं और 1 से 3 दिनों तक रहते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 2 से 3 दिनों के बाद चकत्ते निकलते हैं। सर्वाधिक संक्रामक अवधि होती है चकत्ते निकलने के 1से 5 दिनों तक। रुबेला विशिष्ट रूप से विकसित हो रहे भ्रूण के लिए खतरनाक होता है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि अगस्त माह से प्रस्तावित महाभियान की तैयारी में कवर्धा जिला भी पीछे नहीं है। यह टीका 9 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को लगाए जाएंगे। इसलिए पल्स पोलियो की अपेक्षा मिजल्स रूबेला का लक्ष्य अधिक रहेगा। शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ सलिल मिश्रा ने बताया कि रुबेला वायरस का खसरा वायरस से कोई संबंध नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों में वर्ष 2012 में लगभग 100,000 रुबेला मामले सामने आए हैं।

संक्रामक हो सकते हैं रुबेला के वायरस

यह वायरस वायुजनित श्वसन के छींटों से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति रुबेला के चकत्तों निकलने के एक हफ्ते पहले और बाद तक संक्रामक हो सकते हैं। सीआरएस के साथ जन्मे बच्चे एक वर्ष से अधिक समय तक दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। जाड़े के अंत में या बसंत के शुरुआत में अपने चरम पर होते हैं।

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