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मप्र में संविलियन के बाद छग में भी जल्द मांग पूरी होने की अास

मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षाकर्मियों के संविलियन की आखिरी बाधा भी दूर कर ली है। अपने वादे के अनुरूप शिवराज कैबिनेट...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 31, 2018, 02:35 AM IST

मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षाकर्मियों के संविलियन की आखिरी बाधा भी दूर कर ली है। अपने वादे के अनुरूप शिवराज कैबिनेट ने व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक के पद को पुनर्जीवित कर दिया है। लिहाजा अब मध्यप्रदेश में शिक्षाकर्मियों के शिक्षा विभाग में संविलियन का पूरा रास्ता साफ हो गया है।

मध्यप्रदेश में अध्यापकों के संविलियन संबंधी इस आदेश के बाद छत्तीसगढ़ में भी 1.80 लाख शिक्षाकर्मियों में खुशी की लहर है। छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मी मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट के फैसले पर नजरें गड़ाए थे। क्योंकि 90 फीसदी संभावना यही है कि मध्यप्रदेश में संविलियिन मॉडल को ही छत्तीसगढ़ में आइडल मानकर शिक्षाकर्मियों की मांगों को पूरा किया जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार के आज का फैसला छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों के लिए भी वरदान साबित होगा।

शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के जिला संचालक व शालेय शिक्षाकर्मी संघ के जिलाध्यक्ष शिवेंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि मप्र सरकार ने शिक्षाकर्मियों के हित मे ऐतिहासिक निर्णय लिया है। शिक्षकों के पद को डाइंग कैडर घोषित करने का जो कांग्रेस सरकार ने जो फैसला लिया था। उसे हटा लिया गया। अब वे राज्य सरकार के कर्मचारी हो जाएंगे। यह फैसला शिक्षकों की जिंदगी बदलने वाला फैसला साबित होगा। संघ के प्रदेश प्रवक्ता गजराज सिंह राजपूत ने कहा कि करीब ढ़ाई दशक के लंबे संघर्ष के बाद शिक्षाकर्मियों को संविलियन के रुप में सम्मान मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने दिया है।

बिना देर किए छत्तीसगढ़ सरकार संविलियन करे

जिला उपसंचालक अब्दुल आसिफ खान, ब्लाक संचालकगण मोहन राजपूत, संजय जायसवाल, राकेश जोशी व वीरेंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि मप्र सरकार ने अपना निर्णय ले लिया है। अब छत्तीसगढ़ सरकार की बारी है। छग सरकार को बिना देर किए समस्त शिक्षाकर्मियों का संविलियन कर देना चाहिए। 18-20 वर्षों से संघर्षरत शिक्षाकर्मियों को सरकार द्वारा संविलियन का इंतजार है।

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