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सामाजिक संगठनों को ही यहां पर छूट

पाक-ए-रमजान का महीना जारी है। इस महीने में मुस्लिम समाज के लोग 30 दिन रोजा रखकर ख़ुदा की इबादत करते हैं। सुबह फर्ज की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 02:40 AM IST

पाक-ए-रमजान का महीना जारी है। इस महीने में मुस्लिम समाज के लोग 30 दिन रोजा रखकर ख़ुदा की इबादत करते हैं। सुबह फर्ज की नमाज से पहले सेहरी करते हैं। इसके बाद शाम को मगरिब की नमाज के बाद रोजा खोलते हैं।

इसके साथ ही इफ्तार का भी आयोजन होता है। राजनीतिक पार्टियां भी मुस्लिमों के बीच जाकर ऐसे आयोजन करती हैं लेकिन एक गांव ऐसा भी है, जहां राजनीतिक पार्टियां इफ्तार का आयोजन नहीं कर सकतीं।

कबीरधाम जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर 2300 लोगों की आबादी वाले ग्राम पोड़ी की मुस्लिम जमात ने राजनीतिक इफ्तार पार्टिंयों पर बैन लगा रखा है। पवित्र रमजान माह में यह रोक 13 साल से लगा कर रखी गई है। रोक लगाने को लेकर समाज का तर्क है कि मजहब में न राजनीति घुसनी चाहिए, न मजहब का इस्तेमाल राजनीति में होना चाहिए। इसलिए ही ऐसे सख्त फैसले लिए गए हैं।

13 साल से मुस्लिम समाज ने लगा रखा है प्रतिबंध, ऑल इंडिया उलमा बोर्ड ने भी सराहा फैसला

धर्म में नहीं आए राजनीति सो पोड़ी ने बंद किए पार्टियों के रोजा इफ्तार

समाज ने ऐसे कायदे बनाए कि कोई भी राजनीतिक पार्टी इफ्तार नहीं करवा सकी

2005 में आखिरी बार हुई थी राजनीतिक इफ्तार पार्टी

पोंड़ी मुस्लिम समाज के कार्यकारिणी सदस्य शेख मुश्ताक खान बताते हैं कि 2005 में पंचायत चुनाव हुए। चुनाव में प्रत्याशियों ने इफ्तार पार्टी दी। लेकिन जब चुनाव परिणाम आए, तो जो प्रत्याशी हारा, उसने इफ्तार को लेकर गलत बयान दिया। इसके बाद समाजजन ने राजनीतिक इफ्तार पार्टी नहीं करने का फैसला किया।

इस साल चुनाव फिर भी इफ्तार पार्टी नहीं देंगे दल

इस साल नवम्बर महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को देखते हुए राज्य के विभिन्न शहरों में राजनीतिक पार्टियां इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रही हैं। लेकिन इफ्तार को लेकर सख्त नियम के कारण है रमजान के 23 रोजा हो जाने के बाद भी पोंड़ी में राजनीतिक पार्टी इफ्तार देने के लिए आगे नहीं आई है।

संस्था व व्यक्तिगत लोगों को छ़ूट, युवा भी देते हैं साथ

एेसा नहीं कि समाज ने इफ्तार पार्टी पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया है। समाज को सामाजिक या दूसरे समाजसेवी संगठनों द्वारा दिए जाने वाले इफ्तार पार्टी से किसी तरह की आपत्ति नहीं है। साथ ही कोई भी गैर राजनीतिक व्यक्ति इफ्तार पार्टी दे सकता है। समाज के युवा भी अपने समाज के हर फैसले को लेकर साथ दे रहे हैं।

इफ्तार को लेकर उलेमाओं की राय

इफ्तार को लेकर आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड दिल्ली के प्रवक्ता व हदीस के जानकार युनूस मोहानी बताते हैं कि इफ्तार रमजान माह में रोजा खोलने के लिए किया जाता है। यह इफ्तार रोज मगरिब की अज़ान के साथ होता है। धर्म के अनुसार इफ्तार उन लोगों को कराया जाता है, जो सफर पर हों, गरीब हों, जिन्हें रोजा खोलने के लिए खाना नसीब नहीं होता है। न कि उन लोगों द्वारा जो दिखावे को लेकर व अपने फायदे को लेकर इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं। पोंड़ी मुस्लिम कमेटी ने जो किया है, काबिले तारीफ है। मेरी जानकारी में इस तरह पहल करने वाली यह देश की पहली कमेटी है। आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ऐसी कमेटी को प्रोत्साहित करेगा।

मुस्लिम वोट रिझाने का हथकंडा

समाज की सोच है कि राजनीतिक इफ्तार पार्टी से मुस्लिम वोटों को रिझाया जाता है। यानी राजनीतिक पार्टी केवल अपने फायदे को लेकर इफ्तार पार्टी देते हैं। इस पाक महीने में हमारे लोगों का दुरुपयोग न हो, इसे लेकर राजनीतिक इफ्तार पार्टी को बैन किया गया है। ये आगे भी जारी रहेगा। शेख नियामुद्दीन, नायब मुतवल्ली, पोंड़ी

मेरी नजर में तो जमात की यह पहल बेहद काबिले तारीफ है। ऐसे कदम की सराहना की जानी चाहिए। सैय्यद सैफुद्दीन, अध्यक्ष, हज बोर्ड रायपुर

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