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पुरुषोत्तम मास में गुप्त दान से मिलता है परम धाम का सुख: पं चंद्रकिरण

प्राचीन देवालय एवं सिद्धपीठ श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में आयाेजित पुरुषोत्तम मास की कथा में रविवार को पं....

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 02:40 AM IST

पुरुषोत्तम मास में गुप्त दान से मिलता है परम धाम का सुख: पं चंद्रकिरण
प्राचीन देवालय एवं सिद्धपीठ श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में आयाेजित पुरुषोत्तम मास की कथा में रविवार को पं. चंद्रकिरण तिवारी ने रविवार को कहा कि संपुट (गुप्त) दान करने से सभी पाप दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होकर परमधाम मिलता है।

पुरुषोत्तम मास की कथा में पं. चंद्रकिरण तिवारी ने संपुट दान का महत्व बताते हुए कहा कि संपुट दान को संपूर्ण ब्रह्मांड का दान माना गया है। पुरुषोत्तम मास में व्रत के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि कौन सा उत्तम दान देना चाहिए, जिससे पुरुषोत्तम मास का मेरा व्रत संपूर्ण हो जाए। तब शिव जी ने कहा था कि, हे पार्वती कांशी का संपुट दान से व्रत पूर्ण होगा। इसके लिए 30 मालपुवा बनाकर उसे कांसे के पात्र में रखकर और दूसरा कांसे के ही पात्र से उसे ऊपर से ढक दें। इसके बाद उसे कपड़े से बांधकर मौली धागा को सात बार लपेटकर विधिवत पूजन करें और संकल्प कर किसी ब्राहम्ण को दान कर दें। इससे संपूर्ण ब्रह्मांड का दान माना गया है और पुरुषोत्तम मास का व्रत भी पूरा हो जाता है। उन्होंने बताया कि कांशी संपुट दान का महत्व और फल अनंत है। इसकी व्याख्या मानव के लिए ही नहीं बल्कि देवताओं के लिए असंभव बताया गया है।

कवर्धा.खेड़ापति हनुमान मंदिर में प्रवचन के दौरान जुटे भक्तजन।

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