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सर्पदंश से तीन साल में 31 की मौत 485 पीड़ित लोग पहुंचे अस्पताल

बारिश शुरू होते ही जिले में सर्पदंश के मामले सामने आने लगेे हैं। इसी साल जिले में 48 सर्पदंश के मामले सामने आए है,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 15, 2018, 02:40 AM IST

बारिश शुरू होते ही जिले में सर्पदंश के मामले सामने आने लगेे हैं। इसी साल जिले में 48 सर्पदंश के मामले सामने आए है, इसमें 7 लोगों की मौत झाड़-फूंक के कारण हो गई है। वहीं 4 लोगों की इसी माह में मौत हो चुकी हैं।

विभाग का दावा है कि हर साल सर्पदंश के मामले कम होते जा रहें है। साथ ही जिले में भरपूर मात्रा में एंटीवेनम इंजेक्शन भी है। इस साल जितने भी मौत के मामले आए हैं वे मरीज के परिजन की लापरवाही के कारण हुई है। परिजन सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक करवाते हैं। इसके चलते मौत हो रही है। पिछले तीन साल में 485 लोग सर्पदंश के शिकार हुए हैं, जिसमें 31 लोगों की मौत हो चुकी है। लोगों में जागरूकता की कमी के कारण झाड़-फंूक करवाते हैं।

सीएचसी केंद्रों में वेनम की कमी

विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में 400 एंटीवेनम इंजेक्शन है। वहीं पंडरिया, बोड़ला, सहसपुर लोहारा, कुकदुर में तो 50 से भी कम वेनम मौजूद हैं। जिले में जितने भी सर्पदंश के मामले सामने आए हैं उनमे पंडरिया व बोड़ला ब्लॉक के लोग हैं। लेकिन विभाग को मालूम होने के बाद भी इन क्षेत्राें में वेनम ज्यादा मात्रा में नहीं भेजी जाती है। यही कारण है कि डोस कम होने के चलते सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।

सर्पदंश के ये हैं लक्षण

जिला अस्पताल के सिविल सर्जल डॉ. एसआर चुरेन्द्र के मुताबिक सर्पदंश का पहला लक्षण गहरी नींद जैसा अनुभव होना है। विष से पलकें भारी होने लगती है। करीब 85 प्रतिशत मामलों में यह सांप के काटने का पहला लक्षण होता है। इसके बाद सांस लेने में परेशानी होती है। बोलने, थूक गटकने में तकलीफ और अत्यधिक कमजोरी के साथ छाती, पेटदर्द गले मे दर्द होता है।

वर्षवार कितने मरीज और कितने की जान गई जानिए

वर्ष मरीज की संख्या मौत

2015 119 4

2016 101 7

2017 217 13

2018 48 7

(अांकड़े विभाग के अनुसार)

झाड़-फूंक कर लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई नहीं

विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन साल में 31 लोगों की मौत सर्पदंश से हुई है। इनमें सभी मौत झाड़-फूंक के कारण हुई है। सीएमएचओ डॉ. अखिलेश त्रिपाठी का कहना है कि वनाचंल में सर्पदंश से शिकार हुए मरीज के परिजन द्वारा झाड़-फूंक का सहारा लिया जाता है। जब झाड़-फूंक से इलाज नहीं हो पाता तो परिजन अस्पताल पहुंचते हैं। तब तक लेट हो जाता है और मरीज के शरीर में सांप का जहर घूल जाता है और मरीज की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति सर्पदंश का शिकार होता है तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। इसमें जान बचने की पूरी संभावना रहती है। झाड़-फूंक करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।

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