कवर्धा

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रेल लाइन के हवाई सर्वे में शामिल थे 86 गांव अफसर जमीन पर पहुंचे तो निकले सिर्फ 50

कबीरधाम जिले से होकर गुजरने वाली कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना को लेकर जमीनी सर्वे का काम पूरा किया जा चुका है। इस...

Danik Bhaskar

May 26, 2018, 02:45 AM IST
कबीरधाम जिले से होकर गुजरने वाली कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना को लेकर जमीनी सर्वे का काम पूरा किया जा चुका है। इस सर्वे में आश्चर्यजनक तथ्य निकलकर आए हैं, जो रेल रुट के लिए हुए हवाई सर्वे की बड़ी चूक भी साबित करते हैं। हवाई सर्वे के दौरान सेंसर से कबीरधाम जिले में 86 गांव ऐसे चिन्हित किए गए, जहां से होकर ट्रेन गुजरनी थी। लेकिन जब अफसर फील्ड में पहुंचे, तो पता चला कि हकीकत में ये 50 गांव ही हैं।

जिले के सहसपुर लोहारा, कवर्धा व पंडरिया तहसील के गांवों से रेल रुट बनना है। दरअसल एक गांव को तय करते-करते आसपास के दो-तीन गांवों को भी सिस्टम ने ले लिया। यदि हवाई सर्वे में तय इन 86 गांवों से रूट बनती, तो पटरियों को कई बार विपरीत दिशा में भी घुमाना पड़ता। तीनों तहसील मिलाकर कुल 1891 किसानों से जमीन ली जाएगी। इन किसानों से 920.25 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होगा। इसमें से 20 एकड़ सरकारी जमीन है।

जमीन की हकीकत कुछ और ही निकली, परेशान हुए अफसर

कवर्धा. रेलवे रूट का संभावित नक्शा।

कवर्धा व लोहारा तहसील से ही कम हुए 36 गांव

सर्वे के बाद तय हुए हैं कि 12 गांव पंडरिया, 23 गांव कवर्धा व 15 गांव सहसपुर लोहारा तहसील के होंगे, जहां से रेल की पटरी गुजरेगी। पहले कवर्धा में 36 व सहसपुर लोहारा में 38 गांव शामिल थे।

कुछ गांव ऐसे जिनके नाम ही गलत

दूसरी ओर सेंसर सिस्टम ने मैप से गांव के जो नाम दर्ज किए, उनमें भी गलती है। स्पेलिंग गलत होने से अफसरों को उन गांवों को तलाशने में पसीने छूट गए। भास्कर के पास मौजूद सूची में ऐसे कुछ गांव हमें मिले। इनमें कंवलपुर को कलावलपुर, बोधवाकला को कोड़वाकला, भटरुसे को महरुसे, बारदी को वर्दी, घुघरीकला को घुंघनकला जैसे नाम लिखे गए थे।

जिले में 61 किलोमीटर बिछेगी पटरी

छत्तीसगढ़ रेलवे काॅर्पोरेशन लिमिटेड परियोजना पर काम कर रही है। यह रुट 277 किलोमीटर का होगा। कबीरधाम जिले में 61 किलोमीटर रेल लाइन होगी। इसमें पंडरिया तहसील में 9 किलोमीटर, कवर्धा तहसील में 28 किलोमीटर व लोहारा तहसील में 24 किलोमीटर पटरी बिछेगी। कवर्धा समेत जिले में कुल 7 स्टेशन होंगे। परियोजना में 4821 करोड़ खर्च का अनुमान है।

इधर, पंडरिया व बोड़ला में रेल रूट न होने का विरोध

प्रस्तावित रेल परियोजना को लेकर विरोध के स्वर भी फूटने लगे हैं। चूंकि इस रेल रुट से बोड़ला व पंडरिया के बहुसंख्यक आबादी को आवागमन का फायदा नहीं मिलेगा। इसे लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी है। बोड़ला, पंडरिया, पांडातराई व पोड़ी ने इसी मुद्दे पर एक दिन नगर बंद रखकर अपना विरोध भी दर्ज कराया है। प्रशासन लगातार इस मुद्दे पर लोगों से बातचीत में भी लगा हुआ कि परिस्थितियों को अनुकूल किया जा सके। संभव है कि रेलवे संघर्ष समिति के सदस्य 27 मई को विकास यात्रा के दौरान पंडरिया पहुंचने पर मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखें।

भूअर्जन की प्रक्रिया होगी


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