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दाखिले से पूर्व लाड़लों को गिनती सिखा रहीं माताएं

16 जून से नया शिक्षा सत्र शुरू होगा। आंगनबाड़ी केंद्रों से 6 साल उम्र तक के हजारों बच्चे निकलकर स्कूलों में कक्षा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 26, 2018, 02:45 AM IST

दाखिले से पूर्व लाड़लों को गिनती सिखा रहीं माताएं
16 जून से नया शिक्षा सत्र शुरू होगा। आंगनबाड़ी केंद्रों से 6 साल उम्र तक के हजारों बच्चे निकलकर स्कूलों में कक्षा पहली में पहला कदम रखेंगे। दाखिले से पहले घरों में माताएं अपने लाड़लों को गिनती और अक्षर ज्ञान सिखाने में लगी है। ताकि स्कूलों में दाखिला होने पर उनमें झिझक न रहें।

इसे लेकर बोड़ला और पंडरिया ब्लॉक के 60गांव में प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन बाल मेला लगा रही है। गांवों में 10 से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी कर चुके युवा-युवतियों को वालिंटियर नियुक्त किया है, जो इस साल स्कूलों में दाखिले के लिए तैयार बच्चों का नॉलेज टेस्ट कर मूल्यांकन करने में लगे हैं। ताकि वह अपना नाम, पता, चित्र में रंग भरना, वस्तुओं का वर्गीकरण, 1 से 20 तक अंक पहचान और बेझिझक बातचीत कर सके। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए माताएं भी काम से समय निकालकर उन्हें अक्षर ज्ञान और गिनती सिखा रही हैं।

16 जून से नया सत्र

बोड़ला और पंडरिया ब्लॉक के 60 गांव में 6 साल उम्र तक के बच्चों का नॉलेज टेस्ट होगा

कवर्धा. बच्चों को अक्षर ज्ञान कराती उनकी माताएं।

दो ब्लॉक के 60 गांव में लगाएंगे बाल मेला

शाला प्रवेश पूर्व तैयारी को लेकर पंडरिया और बोड़ला ब्लॉक के 30-30 गांव का चयन किया गया है, जहां बाल मेला लगाया जाना है। अभी तक पंडरिया ब्लॉक के सिंगपुर, दैहानटोला, मुंगाडीह, दमगढ़, भैसाडबरा में बाल मेला लगा बच्चों की दक्षता का प्राथमिक मूल्यांकन किया जा चुका है।

घरों में बच्चों को सिखाने पैरेंट्स को फ्री में बांट रहे किट

बच्चों को सिखाने के लिए पैरेंट्स को फ्री में किट बांट रहे हैं। इस किट में अंक, अक्षर, नदी, मेला का चार्ट, बच्चों के लिए उपयोगी वर्कशीट, शाला पूर्व तैयारी पुस्तिका शामिल है, जो क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करेगी। अभी बाल मेल के जरिए बच्चों का प्राथमिक मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके 45 दिन बाद दोबारा उन्हीं बच्चों का मूल्यांकन होगा। इसमें ये देखा जाएगा कि डेढ़ महीने पहले बच्चों की शैक्षिक स्थिति कैसी थी और माताओं के सिखाने के बाद क्या सुधार हुआ।

बच्चों की क्षमता विकास में भी मिलेगी इससे मदद

फाउंडेशन प्रमुख सुनील केशरवानी बताते हैं कि ऐसा करने से नींव शिक्षा को मजबूर करेगी। स्कूलों में दाखिला होने पर बच्चे कम बात करते हैं। झिझकते हैं। कक्षा अनुरूप स्तर में कमियां रहती हैं। अगर बच्चों को घर में ही खेल-खेल में गिनती और अक्षर ज्ञान कराया जाए, तो क्षमता बढ़ेगी।

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