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भूमि हैंडओवर हुई नहीं और दुकानें बना कर की नीलाम

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के पुराना डाक बंगला की भूमि का हैंडओवर हुए बिना ही उस पर नगर पालिका ने 1.35 करोड़ रुपए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 05, 2018, 02:45 AM IST

भूमि हैंडओवर हुई नहीं और दुकानें बना कर की नीलाम
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के पुराना डाक बंगला की भूमि का हैंडओवर हुए बिना ही उस पर नगर पालिका ने 1.35 करोड़ रुपए सरदार वल्लभभाई पटेल शॉपिंग काॅम्प्लेक्स खड़ा कर दिया है। काॅम्प्लेक्स में 69 दुकानें बनी हैं। इनमें से 17 दुकानों पर प्रभावितों को व्यवस्थापन दिया जाना था, लेकिन उन्हें भी नीलाम कर दिया।

इधर नीलामी में करीब 21 लाख रुपए प्रीमियम राशि देने के 3 साल बाद भी बोलीदारों को आवंटन नहीं मिला। प्रीमियम की राशि पालिका के खाते में जमा है, जिसका ब्याज शहरी सरकार खा रही है।

पूरे मामले की जांच हुई, तो पूर्व सीएमओ अमिताभ शर्मा की संलिप्तता भी सामने आई है। प्रीमियम देने के बावजूद दुकानें हैंडओवर नहीं होने से व्यापारियों के साथ सीधे-सीधे धोखाधड़ी हुई है। अब व्यापारी पूर्व सीएमओ के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। वास्तव में काॅम्प्लेक्स के विवादों में पड़ने, प्रभावितों और व्यापारियों की परेशानी के लिए नगर परिषद भी जिम्मेदार है।

मनमानी से किराए में 74.52 लाख का नुकसान

पूर्व सीएमओ श्री शर्मा की मनमानी से न सिर्फ व्यापारी, बल्कि नगर पालिका को निर्मित दुकानों से किराए के रूप में लाखों रुपए का भी नुकसान हुआ है। क्योंकि अगर नियमानुसार काॅम्प्लेक्स की सभी 69 दुकानों की नीलामी हुई होती, तो परिषद को प्रति दुकान हर महीने 3 हजार रुपए के हिसाब से 2,0700 रुपए यानि सालाना 74.52 लाख रुपए किराया मिलता। यह रािश नहीं मिलने से नुकसान ही हुआ।

कवर्धा.पुराना डाक बंगला की जमीन खड़ा शॉपिंग काॅम्प्लेक्स, बंद दुकानें।

यूं समझें, ऐसे फंसता गया पेंच व विवादों में काॅम्प्लेक्स

1.जिस पुराने डाक बंगला की भूमि पर शाॅपिंग कांप्लेक्स खड़ा है, वह पीडब्ल्यूडी की है। इसका हैंडओवर नहीं हुआ है।अचल संपत्ति अधिनियम की धारा- 12 के मुताबिक भूमि का स्वामित्व मिले बगैर उस पर किसी तरह का निर्माण किया जाना अवैधानिक है। यही से सारा विवाद शुरू हुआ।

3.जून 2015 में कांप्लेक्स के 43 दुकानों की नीलामी हुई। उच्चतम बोली लगाकर व्यापारियों ने दुकानें खरीद ली। प्रीमियम के रूप में किसी ने 50 तो किसी ने 60 रुपए रुपए जमा किया। लेकिन 3 साल बाद भी उन्हें न दुकानें हैंडओवर हुई न ही प्रीमियम की राशि लौटाई गई।

अब आगे क्या: लौटाएंगे बोलीदारों को प्रीमियम राशि

शासन स्तर से जांच होने पर पूर्व सीएमओ अमिताभ शर्मा दोषी पाए गए हैं। शासन ने काॅम्प्लेक्स में दुकानाें की नीलामी रद्द करते हुए नगर पालिका को बोलीदारों की ज मा प्रीमियम राशि लौटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही नए सिरे से इसकी नीलामी करने कहा है। पालिका आदेश का पालन करने में लगी है। वहीं नए सिरे से दुकानाें की नीलामी के लिए दर अनुमोदन करने शासन को चिट्‌ठी भेजी गई है।

2.2014 में काॅम्प्लेक्स के लिए पूर्व सीएमओ ने व्यवसायियों को बेदखल किया था। ये कहकर कि उन्हें व्यवस्थापन देंगे। याचिका के बाद कोर्ट ने काॅम्प्लेक्स में “ए” की 17 दुकानें प्रभावितों को देने फैसला दिया। इससे पहले पालिका ने 43 दुकानें नीलामी कर दी, जिसमें प्रभावितों को मिलने वाली दुकानें भी शामिल हैं।

जांच में पता चला : दुकानें गलत ढंग से नीलाम की

शासन स्तर से मामले की जांच हुई। इस जांच में यह पाया गया कि वल्लभ भाई पटेल काॅम्प्लेक्स में बनी दुकानों को गलत तरीके से नीलाम होना पाया गया है। इसके लिए पूर्व सीएमओ को जिम्मेदार माना जा रहा है। नीलामी निरस्त कर बोलीदारों को उनकी जमा प्रीमियम राशि लौटाने की प्रक्रिया भी इस संबंध में जल्द ही शुरू होगी। सुनील अग्रहरि, सीएमओ, नपा कवर्धा

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