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ईद पर विशेष जिस गाय के नाम पर होती है राजनीति वहां है ऐसी सौहार्द्रता

जिस गाय के नाम पर देश में जमकर राजनीति होती है और मुस्लिम समाज निशाने पर लिए जाते हैं, उसी गाय के कच्चे दूध के बिना...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 16, 2018, 02:45 AM IST

जिस गाय के नाम पर देश में जमकर राजनीति होती है और मुस्लिम समाज निशाने पर लिए जाते हैं, उसी गाय के कच्चे दूध के बिना कबीरधाम जिले के एक गांव में ईद की रिवाज अधूरी मानी जाती है।

कवर्धा शहर से 10 किलोमीटर दूर पोंड़ी में ईद के दिन सुबह की नमाज से पहले गाय के दूध से ही फातेहा (पूजा) होती है। यह रिवाज पोंड़ी के मुस्लिम पिछले 100 साल से भी ज्यादा समय से निभा रहे हैं। इसके पीछे वे वजह बताते हैं कि हुजूर-ए-पाक ने गाय की दूध को शिफा (दवा) बताया है, इसलिए यह रवायत जारी है। यह रिवाज उनके पुरखे भी निभाते रहे हैं, इसलिए इसे अब भी निभाया जाता है।

पाक-ए-रमजान महीने की समाप्ति के बाद शनिवार को देशभर में ईद मनाई जाएगी। इस दिन मुस्लिम समाज के लोग सुबह के वक्त ईद की नमाज अता करते हैं। नमाज से पहले घरों में फातेहा (पूजा) होती है। वैसे तो किसी भी खाद्य पदार्थ की मौजूदगी के अनुसार भी उससे फातेहा हो सकती है। लेकिन पोंड़ी में गाय के कच्चे दूध से ही यह रस्म निभाने की परंपरा रही है। यह परंपरा 100 वर्षों से अधिक समय जारी है। गांव के मुस्लिम गाय के कच्चे दूध से फातेहा देने के बाद ही ईद की नमाज पढ़ने ईदगाह जाते हैं।

गाय के कच्चे दूध के बगैर पोंड़ी गांव के ईद की रिवाज रहती है अधूरी इसी से बना सिरखुरमा खाकर एक-दूसरे को देते हैं पर्व की मुबारकबाद

हुजूर-ए-पाक ने कहा कि गाय का दूध दवा, इसलिए पोड़ी में होता है इस्तेमाल

गांव की आबादी 2300 के करीब, इसमें 700 मुस्लिम परिवार हैं, दूध के लिए पहले से ऑर्डर

पोंड़ी की आबादी करीब 2300 के आसपास है। इसमें 700 मुस्लिम समाज के लोग रहते हैं। करीब 150 मुस्लिम परिवार ईद के दिन गाय के कच्चे दूध से ही सिरखुरमा बनाते हैं। ईद के दिन इस गांव में गाय के कच्चे दूध की डिमांड बढ़ जाती है। मुस्लिम समाज के कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद हुसैन ने बताया कि समाज के लोग एक दिन पहले ही कच्चे दूध का आर्डर दे देते हैं, ताकि ईद की सुबह परेशानी न हो। इसी तरह यहां के समाज की ईद का त्योहार मनाने का तरीका भी गजब है। पोंड़ी मुस्लिम समाज तीन गांव पोंड़ी, पोंड़ीटोला व बुधवारा से मिलकर बना है। इसलिए सुबह से देर रात तक तीनों गांव के लोग ईद में एक-दूसरे के घर जाकर सेवइयां खाते हैं और मुबारकबाद देते हैं।

ईद के रोज होती है विशेष फातेहा, बरसों से चल रही परंपरा यहां निभाई जा रही

पोंड़ी मस्जिद के पेश इमाम अशफाक रजा ने बताया कि ईद के दिन विशेष फातेहा दिया जाता है। फातेहा किसी भी खाद्य सामान से दिया जा सकता है, इसमें पानी भी जायज है। यह फातेहा पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के साहबजादे तैय्यब व ताहिर के नाम से दिया जाता है। पोंड़ी में इस रिवाज के लिए केवल गाय के कच्चे दूध का ही इस्तेमाल होता है। चूंकि हजरत तैय्यब व ताहिर बचपन में ही खुदा के पास चले गए थे, इसलिए उनकी याद में पोंड़ी की मुस्लिम जमात कच्चे दूध का फातेहा देते हैं। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। ईद के दिन बाकायदा सभी ग्रामीण पर्व की खुशियां बांटते हैं।

पूर्वजों के जमाने से चली आ रही यह प्रथा

यह प्रथा शुरु से चली आ रही है। हमारे पूर्वज भी गाय के कच्चे दूध से ईद की फातेहा देते आ रहे हैं। यह प्रथा आज भी कायम है। शेख नियामुद्दीन, नायब मुतवल्ली, पोंड़ी मुस्लिम समाज

गाय के दूध से फातेहा देना गलत नहीं

गाय के दूध से फातेहा देना कोई गलत नहीं हैं। वैसे भी हुजूर-ए-पाक ने गाय के दूध को शिफा (दवा) करार दिया है। युनूस मोहानी, प्रवक्ता, ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड, दिल्ली

यह बड़ी बात है साथ ही अनुकरणीय भी है

जहां मुस्लिम समाज गाय को लेकर इतना संवेदनशील है, दूसरे समाज को भी इससे सीख लेनी चाहिए। गाय के कच्चे दूध से ही फातेहा करना बड़ी बात है। यह अनुकरणीय है। फैज खान, गौ रक्षा समिति, राष्ट्रीय अध्यक्ष

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