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डॉक्टर्स- डे आज जिले के 4 डॉक्टरों के अनदेखे पहलू जिन्हें जानकर आप को भी हैरत होगी

शौक बड़ी चीज है और जब इसे पूरा करना हो, तो भले ही आप जिस मर्जी फील्ड में काम कर लें। आप अपनी शौकिया हसरत को किसी न किसी...

Dainik Bhaskar

Jul 01, 2018, 02:45 AM IST
डॉक्टर्स- डे आज 
 जिले के 4 डॉक्टरों के अनदेखे पहलू जिन्हें जानकर आप को भी हैरत होगी
शौक बड़ी चीज है और जब इसे पूरा करना हो, तो भले ही आप जिस मर्जी फील्ड में काम कर लें। आप अपनी शौकिया हसरत को किसी न किसी तरह से पूरा कर ही लेते हैं। कुछ ऐसे ही शौक को पूरा कर रहे हैं कबीरधाम जिले के ये 4 डॉक्टर्स। इनमें कोई म्यूजिक का शौकीन है, तो कोई सामाजिक सरोकार से जुड़कर रोगियों की सेवा कर रहा है। डॉक्टर्स- डे पर भास्कर बताने जा रहा है, इन डॉक्टर्स के जीवन के अनदेखे पहलुओं के बारे में...

भले ही युवा हों या पेशे में नए लेकिन जज्बा सबसे अलग करता है इन्हें

डाॅ. गौरव सिंह परिहार

मूल निवास: ग्राम दामापुर, जिला कबीरधाम

पदस्थापना: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरिया

कब से: जुलाई 2017 से

39 वर्षीय डॉ. गौरव सिंह परिहार स्कूलों में सेनेटरी नेपकिन को लेकर अवेरनेस (जागरूकता) लाने प्रयास कर रहे हैं। 6 महीने पहले इन्होंने ये पहल शुरू की। स्कूलों में जाकर 11वीं-12वीं कक्षा की बच्चियों को खुद के खर्च से खरीदे सेनेटरी पैड फ्री में बांटते हैं। जिस हॉस्पिटल में इनकी पोस्टिंग है, वहां “वॉक एंड टॉक” की पहल भी शुरू की है इसके जरिए वे मरीजों के साथ आए परिजन को भी तंबाकू व धूम्रपान न करने सलाह देते हैं।

पेशे से डॉक्टर, लेकिन कोई म्यूजिक का शौकीन, तो कोई स्कूली बच्चियों को अवेयर करने फ्री में देते हैं सैनेटरी पैड

डॉ. जितेन्द्र कुमार वर्मा

मूल निवास: ग्राम मड़मडा, थाना पांडातराई

पदस्थापना: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पंडरिया

कब से: जुलाई 2016 से

ये युवा डॉक्टर अपनी खुशी के लिए अस्पताल में डिलवरी के बाद नवजात शिशुओं को गरम कपड़े उपलब्ध कराते हैं, वो भी खुद के खर्च से। डॉ वर्मा बताते हैं कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को हाईपोथर्मिया होने का डर रहता है, इसलिए तुरंत गरम कपड़ों की जरूरत होती है। चूंकि बैगा-आदिवासी क्षेत्र से प्रसव के लिए आने वाली महिला व उनके परिजनों की इकॉनामी कंडीशन ठीक नहीं रहती, इसलिए उन्हें गरम कपड़े देते हैं।

डॉ. सुदेश बनसोड

मूल निवास: राजनांदगांव

पदस्थापना: जिला अस्पताल कवर्धा

कब से: दिसंबर 2016 से

जिला अस्पताल कवर्धा में सेवा दे रहे इस युवा एमबीबीएस डॉक्टर को म्यूजिक का खासा शौक है। जब ये पं. जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज रायपुर में पढ़ाई कर रहे थे, तब छग आइडल प्रोग्राम हुआ था। उसमें इन्होंने गिटार प्ले किया और जीता। गिटार प्ले करने का शौक इन्हें अब भी है। हॉस्पिटल से जब भी वक्त मिलता है, तो वे घर में या पार्टी वगैरह में गिटार प्ले कर अपना ये शौक पूरा करते हैं। कई बार हॉस्पिटल में भी उन्होंने गिटार प्ले किया है।

डॉ. मोहन जैन

मूल निवास: कवर्धा, जिला कबीरधाम

पदस्थापना: मेघ क्लिनिक कवर्धा

कब से: 1978 से

जिले के पहले मेडिसिन डॉक्टर, जो वर्ष 1978 से कवर्धा में प्रैक्टिस कर रहे हैं। पेशे से डॉक्टर, लेकिन पार्श्व गायक मुकेश के मुरीद हैं। ये खुद भी हॉस्पिटल में उनके गाने गुनगुनाते रहते हैं। इनके इसी अंदाज से उनके पास आए मरीजों का मर्ज कम हो जाता है। वे समाजसेवा भी जुड़े हैं। लायंस क्लब के प्रेसीडेंट रह चुके हैं। अभी जैन संघ कवर्धा में सदस्य हैं और धार्मिक कार्यक्रमाें में रुचि रखते हैं।

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