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साइकिल देने से इंकार पर महिलाएं बोलीं-नहीं देना है, तो ढकोसला बंद करो...

नई कृषि उपज मंडी में शनिवार सुबह साढ़े 11 बजे साइकिल लेने आई 40 श्रमिक महिलाओं ने हंगामा कर दिया। क्योंकि जो टोकन पर्ची...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 01, 2018, 02:45 AM IST

साइकिल देने से इंकार पर महिलाएं बोलीं-नहीं देना है, तो ढकोसला बंद करो...
नई कृषि उपज मंडी में शनिवार सुबह साढ़े 11 बजे साइकिल लेने आई 40 श्रमिक महिलाओं ने हंगामा कर दिया। क्योंकि जो टोकन पर्ची उन्हें मिली थी, उसमें लेबर इंस्पेक्टर का सिग्नेचर (हस्ताक्षर) नहीं था। ऐसे में जब मंडी पहुंचकर गोदाम में बैठे कर्मचारी को टोकन दिखाई, तो उन्हाेंने महिलाओं को साइकिल देने से साफ इंकार कर दिया।

फिर क्या था, महिला श्रमिकों को गुस्सा फूट पड़ा। श्रम विभाग के कर्मचारी को जमकर खरी-खोटी सुनाई दी। बोलीं कि साइकिल नहीं देना है, तो ढकोसला बंद करो। उनका ये गुस्सा लाजिमी था, क्योंकि धूप में लाइन लगकर एक हफ्ते बाद उन्हें टोलन पर्ची मिली थी। उसके बाद लगातार आज- कल कहकर गोदाम से लौटा रहे थे।

इधर, शनिवार को भी कर्मचारियों ने साइकिल देने से मना किया, तो महिलाओं से खुद पर काबू नहीं रख पाईं।

कवर्धा.नई मंडी में साइकिल नहीं मिलने से मासूस लौटी श्रमिक महिलाएं।

5200 श्रमिकों को देना है साइकिल

मुख्यमंत्री सहायता योजना के जरिए जिले में 5200 श्रमिकों को साइकिल देने का लक्ष्य है। विकास यात्रा के दौरान 2600 श्रमिकाें को साइकिल बांटने का दावा किया जा रहा है। हकीकत में 30 से 40 लोगों को ही बांटे थे। उसके बाद सभी ब्लॉक मुख्यालयों में साइकिल पाने के लिए श्रमिकाें को लाइन लगना पड़ा।

1 लाख साइकिल स्टॉक में, फिर भी ये स्थिति

नई मंडी के गोदाम में एक लाख साइकिल स्टॉक में पड़े हैं। 5200 का टारगेट है, लेकिन वाहवाही लूटने के लिए श्रम अफसरों ने 7,000 से ज्यादा श्रमिकों को टोकन जारी कर दिया है। स्टॉक में साइकिल पड़ा होने पर भी पंजीकृत श्रमिकाें को दिया नहीं दिया जा रहा है, इसलिए कर्मचारियों के साथ कहासुनी हो रही है।

जो श्रमिकों को दी उनके नट-बोल्ट ढीले

2600 साइकिलें बांटने का दवा है। करीब 3700 रुपए कीमती जो साइकिलें श्रमिकाें को बांटी गई है, उनके नट-बोल्ट ही ढीले हैं। गोदाम से श्रमिकों को या तो पैदल या फिर मोटर साइकिल पर उठाकर ले जाना पड़ रहा है। यानि श्रमिकाें को उनकी रिपेयरिंग पर खुद की जेब से खर्च करना पड़ रहा है।

सीधी बात: राजेश आडिले, श्रम पदाधिकारी, कबीरधाम

प्रयास कर रहे हैं, जल्द लक्ष्य पूरा कर लेंगे

महिला श्रमिकाें को बिना सिग्नेचर वाला टोकन क्यों दिया?

- लेबर इंस्पेक्टर दूसरे काम में व्यस्त थे, इसलिए वे मौके पर नहीं जा पाए और व्यवस्था बिगड़ गई।

विकास यात्रा में साइकिल बंटने थे, तो ये लेटलतीफी क्यों?

- जब लक्ष्य मिला, तो हमारे पास समय बहुत कम था। पंजीयन कराना था, टोकन बांटने थे। इसलिए देर हुई। प्रयास कर रहे हैं, जल्द ही लक्ष्य पूरा कर लेंगे।

श्रमिकों को जो साइकिल दिया जा रहा है, उसमें खराबी है। पार्ट्स भी ढीले हैं?

- जहां साइकिल बांटी जा रही है, वहां कुछ मजदूर रखे हैं, जो साइकिल को ठीक करने का काम करते हैं।

श्रमिकों का दर्द: गर्भवती हूं, खयाल नहीं रखा

बिरकोना से 13 किमी दूर कवर्धा आई थी। इसी उम्मीद में कि आज साइकिल मिलेगी, लेकिन टोकन में अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं होने का हवाला देकर लौटा दिया। 7 महीने के गर्भ से हूं। साइकिल के लिए 4 बार चक्कर काट चुकी हूं। गायत्री बाई, ग्राम बिरकोना

धूप में लाइन लगकर जैसे-तैसे टोकन मिला। साइकिल के लिए मंडी पहुंचे, तो कह रहे हैं इसमें अधिकारी का साइन लेकर आओ। अब हम कहां जाएं, उसे ढूंढने। संतोषी बाई, ग्राम बिरकोना

कलेक्टोरेट में पहले टोकन के लिए लाइन लगानी पड़ी। एक हफ्ते बाद किसी तरह टोकन मिला, तो अब साइकिल के लिए घुमा रहे हैं। यह तीसरी बार है, जब मैं यहां आई, लेकिन साइकिल नहीं दिया। नरबदिया बाई पटेल, ग्राम मजगांव

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