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फिक्र क्यूं, मैं हूं ना खराब नेटवर्क के कारण डॉक्टर को नहीं लगा कॉल

बैगा बाहुल डोकरी घटिया गांव में गर्भवती भगवंतिन पति गंगाराम बैगा (30) की डिलीवरी को सिर्फ 1 घंटे का वक्त था। इसी 1 घंटे...

Danik Bhaskar | Jun 29, 2018, 02:45 AM IST
बैगा बाहुल डोकरी घटिया गांव में गर्भवती भगवंतिन पति गंगाराम बैगा (30) की डिलीवरी को सिर्फ 1 घंटे का वक्त था। इसी 1 घंटे में 108 एंबुलेंस को 8 किमी दूर उस गांव तक पहुंचना था, जहां से उन्हें कॉल आया था। वहां से फिर गर्भवती को लेकर उसी रास्ते से 8 किमी का सफर तय कर कुकदूर अस्पताल आना था।

संजीवनी 108 कर्मियों ये नहीं जानते थे कि बारिश उनका रास्ता रोक लेगी। वही हुआ, जिसका डर था। संजीवनी 108 में गर्भवती को लेकर गांव से करीब 3 किमी दूर ही निकले थे कि शाम 7 बजे तेज बारिश के कारण खराब पहाड़ी रास्ते पर गाड़ी रोकड़ा पड़ा। तभी गर्भवती की प्रसव पीड़ा बढ़ी और बच्चे का सिर दिखने लगा। ईएमटी विनोद धावलकर ने डॉक्टर से संपर्क करना चाहा, लेकिन खराब नेटवर्क से कॉल नहीं लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईएमटी ने एंबुलेंस में ही प्रसव कराने का फैसला लिया। पायलट रूप सिंह श्याम की मदद से महिला का सुरक्षित प्रसव कराया।

शाम 5.50 बजे आया कॉल, जननी नहीं थी, केस लेने 108 कर्मी पहुंचे थे गांव: ईएमटी विनोद बताते हैं कि बुधवार शाम 5.50 बजे कॉल आया था। तब महतारी एक्सप्रेस 102 दूसरे केस में गई थी। इस कारण संजीवनी 108 के स्टॉफ केस लेने करीब साढ़े 6 बजे डोकरी घटिया गांव पहुंचे। डिलीवरी को ज्यादा वक्त नहीं बचा था, इसलिए महिला काे लेकर तुरंत कुकदूर अस्पताल के लिए रवाना हुए, लेकिन बारिश में खराब रास्ते ने रोक लिया।

पांच किमी दूर था हॉस्पिटल, पहाड़ी रास्ते में बारिश ने रोका, महिला की जान पर बन आई तो रिस्क लेकर ईएमटी ने 108 एंबुलेंस में कराया सुरक्षित प्रसव

कवर्धा.108 एंबुलेंस में महिला ने दिया बच्चे काे जन्म। इसमें ईएमटी व पायलट ने मदद की।

गर्भवती की प्रसव पीड़ा बढ़ी और बच्चे का सिर दिखने लगा

जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित, अस्पताल दाखिल: 108 एंबुलेंस में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। करीब 1 घंटे बाद बारिश रुकने पर दोनों को कुकदूर अस्पताल लेकर गए, जहां स्टॉफ ने चेकअप किया। अभी जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं। इमरजेंसी सेवाओं के जिला प्रभारी नरेन्द्र चंद्रवंशी बताते हैं कि वनांचल क्षेत्रों में परिवहन सुविधा नहीं होने पर भी 108 और 102 एंबुलेस बेहतर सेवाएं दे रही है।

102 व 108 एंबुलेंस में ग्रेजुएट युवा करा रहे प्रसव, 6 महीने में 359 डिलीवरी: सरकारी अस्पतालों में जहां मोटी सैलरी पाने वाले डाॅक्टर सुरक्षित प्रसव नहीं करा पाते। कई केस रिफर कर देते हैं। वहीं 102 और 108 एंबुलेंस में गर्भवती को लाने वाले ईएमटी हालत नाजुक होने पर प्रसव करा रहे हैं। बीते 6 महीने में 359 केस में ऐसा हुआ, जब अस्पताल दूर होने या अन्य कारण से एंबुलेंस में ही महिलाओं का प्रसव कराया।

महतारी एक्सप्रेस 102

वर्ष डिलीवरी हुई

2016 856

2017 948

2018 343

संजीवनी एक्स. 108

वर्ष डिलीवरी हुई

2016 62

2017 83

2018 16