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बेचा 23 क्विंटल खाद, 300 एकड़ में डाला तब आई सैंपल फेल की रिपोर्ट

सहसपुर लोहारा और सारंगपुर कला सेवा सहकारी समिति से 1 महीने पहले 150 से अधिक किसानों ने जो खाद खरीदा था, उसकी जांच...

Danik Bhaskar | Jun 30, 2018, 02:45 AM IST
सहसपुर लोहारा और सारंगपुर कला सेवा सहकारी समिति से 1 महीने पहले 150 से अधिक किसानों ने जो खाद खरीदा था, उसकी जांच रिपोर्ट अब अमानक आई है। किसान 300 एकड़ से ज्यादा रोपा लगे खेत में खाद डाल चुके हैं। इससे अब फसलें कमजोर आएंगी, वृद्धि कम होगी, तो उसकी क्वालिटी (गुणवत्ता) भी घटेगी।

खरीफ सीजन शुरू होने से पहले कृषि विभाग के अफसरों ने समितियों से खाद के 20 सैंपल लिए थे। इसमें से डीएपी और सिंगल सुपर फॉस्फेट खाद के 2 सैंपल अमानक आए हैं। जिस कंपनी से ये खाद मंगाए गए थे, उसे नोटिस भेजा गया है। साथ ही संबंधित समितियों को आवेदन कर सुनवाई का मौका दिया है, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई भी जवाब नहीं आया है। फिलहाल जो खाद समितियों में पड़ा है, उसकी खरीदी- बिक्री और भंडारण पर रोक लगा दी गई है। लेकिन खाद की सैंपलिंग और जांच रिपोर्ट आने के पहले उसे बेच देना, यह सीधे- सीधे विभागीय लापरवाही को दर्शाता है।

रिपोर्ट आने में लग जाता है 1 महीना: खाद जांच के नियमों में भी विसंगतियां हैं, जिसके चलते किसानों को अमानक खाद बेचे गए। दरअसल यहां से खाद के सैंपल लेकर जांच के लिए रायपुर भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने में 20 दिन से 1 महीने तक लग जाता है।

ये है खाद जांच के नमूनों की स्थिति

कवर्धा.समितियों से खरीदी कर खाद ले जाते किसान।

अमानक खाद बेचने के मामले में ये 3 जिम्मेदार

मार्कफेड: किसानाें को अमानक खाद बेचने के मामले में मार्कफेड की अहम भूमिका है। क्योंकि मार्कफेड ही कंपनियों से खाद पर्चेस करता है। इसे जिले में 60 सेवा सहकारी समितियाें को पहुंचाता है, जहां से ये किसानाें को बेचे जाते हैं। इस विभाग का दोष यह है कि इन्होंने सैंपल रिपोर्ट आने से पहले ही खाद बिकवा दी।

कृषि विभाग: इस विभाग की जिम्मेदारी अमानक खाद की बिक्री रोकने की है। खाद की जांच के लिए सैंपल लेने का अधिकार है। विडंबना है कि विभाग में एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर (एसएडीओ) के पद रिक्त हैं। जिन 3 निरीक्षकाें पर उर्वरक जांच की जिम्मेदारी है, उनमें से दो के पास बीएससी एग्रीकल्चर या बीएससी विथ केमेस्ट्री की योग्यता नहीं है।

खरीफ में खाद भंडारण की स्थिति पर एक नजर

लक्ष्य उपलब्धता समितियों में पहुंचे किसानों को बांटे

58,900 टन 30,255 टन 24,983 टन 19,811 टन

70

नमूनों की करना है जांच

20

सैंपल जांच के लिए भेजे गए

18

की आई थी जांच रिपोर्ट

समितियां: इनका काम सिर्फ खाद बेचना है। इन्हें मानक- अमानक से कोई सरोकार नहीं है। क्योंकि ये जितना खाद बेचेंगे, उसके हिसाब से इनका कमीशन तय है। प्रति टन डीएपी खाद की बिक्री पर 420 रुपए, यूरिया में 334 रुपए, सुपर फॉस्फेट में 210 रुपए और दानेदार सुपर खाद में 210 रुपए प्रति टन कमीशन मिलता है।

02

सैंपल निकला अमानक

सीधी बात

केके देवांगन, प्रभारी डीएमओ, कबीरधाम

उस वक्त जानकारी नहीं थी


- जिस समय समितियों ये खाद किसानों को बेची थी, उस वक्त इसकी जानकारी नहीं थी।


जवाब: सैंपल रिपोर्ट आने में 1 महीने से ज्यादा समय लग जाता है, तब तक किसानों को संभालना मुश्किल है।


- इस मसले में कृषि विभाग की भूमिका अहम हो जाती है। वे संबंधित कंपनी को नोटिस भेजेंगे। बिका हुआ खाद किसानाें से वापस लिया जाएगा।

फॉस्फेट लॉट अमानक