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बिजली तिहार धोखा, लोड शेयरिंग न फीडर चालू, लो वोल्टेज के साथ बिजली भी गुल

छत्तीसगढ़ सरकार की बिजली कंपनी ने सरकार के साथ ही अपने उपभोक्ताओं से भी बड़ा धोखा किया है। बिजली तिहार के नाम पर...

Danik Bhaskar | May 29, 2018, 02:50 AM IST
छत्तीसगढ़ सरकार की बिजली कंपनी ने सरकार के साथ ही अपने उपभोक्ताओं से भी बड़ा धोखा किया है। बिजली तिहार के नाम पर कंपनी के प्रोजेक्ट विभाग के जिम्मेदारों ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए थोक में सब स्टेशन लोकार्पित तो करा दिए, लेकिन ये सब स्टेशन 6 महीने बाद भी अपना काम पूरी तरह से शुरू नहीं कर पाए हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के जिस लो वोल्टेज व बार-बार बिजली जाने की समस्या को दूर करने इन्हें बनाया गया, वह बड़ी समस्या अब भी जस की तस बरकरार है।

कंपनी के जिम्मेदारों ने मुख्यमंत्री समेत अन्य मंत्रियों को अंधेरे में रखा कि सब स्टेशन पूरी तरह तैयार हैं। डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर एक-एक सब स्टेशन बनाए गए। इन्हें लोकार्पित भी करा दिया गया, लेकिन इसके 6 महीने बाद भास्कर की पड़ताल के बाद यह सच्चाई सामने आई है। बड़े स्टेशन व बड़े हिस्सों से लोड बांटने के लिए सब स्टेशन बनाए गए थे, ताकि ग्रामीण इलाकों में बिजली गुल होने की समस्या खत्म हो जाए और सभी हिस्से में लो वोल्टेज की समस्या भी दूर हो जाए। लेकिन कंपनी की जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण ऐसा हो न सका।

भास्कर सीधे मौके से: पथर्रा व कोलेगांव का यह हाल

भास्कर टीम ने कबीरधाम जिले के दो सब स्टेशन पथर्रा और कोलेगांव की हकीकत जानी। इन सब स्टेशनों में जहां दिसंबर से ही तीनों फीडर शुरू कर दिए जाने थे, वहीं कंपनी के जिम्मेदारों ने एक-एक फीडर दिखावे के लिए शुरू कर दिए। आलम यह है कि लोकार्पण के 6 महीने बाद भी यहां एक-एक फीडर ही चालू है। टीम सबसे पहले पथर्रा पहुंची। वहां एक ऑपरेटर मिले। बताया कि एक फीडर चालू है। बाकी चालू नहीं है। यह बात स्पष्ट हो गई, कि यहां लोड शेयरिंग हुई ही नहीं। सिर्फ मुख्य लाइन से सब स्टेशन को जोड़ दिया गया है। अब भी समस्या आने पर पूरे क्षेत्र की बिजली एक साथ गुल होती है और फाॅल्ट ढूंढने में घंटों लगते हैं। पथर्रा के अंतर्गत 15 गांव आते हैं। इसी तरह की स्थिति कोलेगांव की भी है, इसके अंतर्गत भी 15 गांव आते हैं। दरअसल तीन फीडर बनाए इसलिए गए कि एक फीडर सब स्टेशन के मुख्यालय वाले गांव में सप्लाई देगा। दूसरा फीडर बाकी गांवों का काम संभालेगा और तीसरा फीडर किसानों के पंप का लोड लेगा। लेकिन तीनों फीडर का दबाव अब भी एक ही फीडर पर है।

एक दिन पहले ही सीएम से कराया लोकार्पण, वहां भी काम अधूरा

लापरवाह अफसरों के काम की हद तो यह है कि एक दिन पहले ही विकास यात्रा में मुख्यमंत्री के हाथों पंडरिया के अधूरे सब स्टेशन का लोकार्पण करा दिया गया। आईपीडीएस के तहत बने इस सब स्टेशन में भी 3 फीडर का काम होना है। लेकिन सिर्फ दो फीडर चालू किया गया है। तीसरे फीडर को शुरू करने खंभे व लाइन खींचने का काम अब भी जारी है।

6 महीने पहले प्रदेश में 36 सब स्टेशन शुरू हुए, हाल ठीक नहीं

सरकार ने प्रदेश के 20 जिलों के 515 गांवों को रोशन करने के लिए 36 बिजली सब स्टेशन शुरू किए। सरकार ने बताया कि कम वोल्टेज की समस्या से ग्रामीणों को मुक्ति मिलेगी। लेकिन ऐसा हो न सका। 57.49 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसी दौरान कोलेगांव, पथर्रा व बीरनपुर कला में भी 12 दिसंबर को बिजली तिहार मनाया गया व 33/11 केवी के सब स्टेशन का लोकार्पण किया गया।

यह काम है सब स्टेशन का : लो वोल्टेज व बिजली गुल दूर करता

33-11 केवी या किसी भी सब स्टेशन का काम पॉवर सप्लाई करने का है। सब स्टेशन मुख्य और बड़े स्टेशन का लोड कम करता है। छोटे फीडर बनने से लोड बराबर भाग में बंट जाता है। इससे लो वोल्टेज की समस्या दूर हो जाती है। लाइन की लंबाई छोटी हो, तो बिजली गुल होने की समस्या भी छोटे हिस्से में होती है और बड़ा हिस्सा प्रभावित होने से बच जाता है। इससे पॉवर सप्लाई की क्वालिटी भी बढ़ती है।

भास्कर पड़ताल में यह सच सामने आया है कि सब स्टेशन में सुरक्षा के लिहाज से सबसे जरूरी वीसीबी सिस्टम की सप्लाई में ही 6 महीने की देरी हो गई। यह सिस्टम बिजली सब स्टेशन में सुरक्षा को लेकर सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी वजह से ही जब बिजली लाइन में फाॅल्ट आता है, तो सिस्टम ट्रिप होते हैं। इसके अलावा कंट्रोल पैनल जो यार्ड में वीसीबी को कंट्रोल करता है, यह भी नहीं भेजे गए। वहीं कई सब स्टेशनों में लाइन खींचने का काम बाकी रह गया, तो कई जगहों पर कंट्रोल रूम का काम अब भी बाकी है।

डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए के इन सब स्टेशनों में नहीं हो रही लोड शेयरिंग


-वीसीबी और कंट्रोल पैनल की सप्लाई नहीं हो पाई थी। अब ये आ गए हैं। 10 से 15 दिन में सभी जगह लगा दिए जाएंगे।


-नहीं ऐसा नहीं है। दरअसल अब सेंट्रलाइज सिस्टम से सामान लिए जाते हैं। एक साथ कई स्थानों पर सब स्टेशन बनने से सामान की खपत बढ़ी। तो इनके मैनुफैक्चरिंग में कमी आ गई। अब ये मशीन आ गए गए हैं।


-सब स्टेशन इस हालत में थे कि वे शुरू हो जाएं। इसलिए उन्हें शुरू किया गया। अब इनके सभी फीडर जल्द शुरू कर लेंगे।